22 साल के युवा प्रधान ने प्रवासियों को दिखाई स्वरोज़गार की राह । Postmanindia

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वो कहावत तो अपने सुनी ही होगी कि बिना बढाओ के मंजिल पार नहीं होती, कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती. गढ़वाल विवि के पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष एवं मयकोटी के ग्राम प्रधान अमित प्रदाली पर ये लाइन सटी बैठती हैं. 22 साल के इस प्रधान ने गांव में बीरान और बंजर पड़ी भूमि को आवाद कर हरा भरा बनाया है. उन्होंने पहाड़ लौटे प्रवासियों के लिए स्वरोजगार की राह दिखाई है. उनकी कोशिश है कि पहाड़ के गांवों के लोग अधिक से अधिक खेतीबाड़ी का काम कर लोग अपनी आर्थिकी बेहतर कर सकते हैं.अपने और गांव के कुछ लोगों के 5-6 खेतों पर ग्राम प्रधान ने भिंडी, बीन, मक्का, मूली, खीरा आदि लगाई है जो साकार होने लगे हैं. ग्रामीण विकास में प्रधान अहम भूमिका निभाते रहे हैं. किसी भी गांव का प्रधान चाहे तो अपनी ग्राम पंचायत को उत्कृष्ट बना सकता है इसके लिए उसे स्वयं के प्रयास भी करने होते हैं. ऐसे ही रुद्रप्रयाग जिले के ग्राम मयकोटी के प्रधान अमित प्रदाली ने अभिनव पहल की है.

उनका प्रयास है कि गांव को ऑर्गेनिक हब के रूप में विकसित किया जाए साथ ही पहाड़ लौटें प्रवासी को जैविक खेती के जरिए रोजगार देने का काम हो. इसके लिए उन्होंने बंजर भूमि को हरा भरा बनाने का काम शुरू कर दिया है. साथ ही उत्तराखंड के सभी प्रधानों, क्षेत्र पंचायत सदस्य एवं जिपं सदस्यों से अनुरोध भी किया है कि वह भी अपने क्षेत्रों में ऐसी योजनाओं को बनाएं जो, धरातल में कारगर हो. अपने गांव और क्षेत्र को आर्थिक सम्पन्न बनाने के लिए योजनाओं को तरीके से संचालित करने की जरूरत है. उन्होंने कहा कि गांव में रोजगार के लिए पर्यटन, जैविक खेती जैसी योजनाओं को बढ़ावा देना होगा. उत्तराखंड में अपार संभावनाएं हैं.

पशुपालन, पेड़ लगाने, बागवानी, आदि पर ईमानदारी से कार्य किया जाए तो इसके बेहतर परिणाम मिल सकते हैं. युवाओं की रुचि को देखते हुए स्वयं सहायता समूह के माध्यम से गांव के लोगों को स्थाई रोजगार दिया जा सकता है. उन्होंने कहा कि पांच सालों के भीतर इस मुहिम को धरातल पर साकार करते हुए सफल किया जाएगा. कहा कि उत्तराखंड राज्य बनने के 19 साल में पहाड़ के गांव के गांव खाली हुए हैं किंतु कुछ समय से विश्वभर में चली कोरोना महामारी के चलते अनेक गांवों में बड़ी संख्या में प्रवासी घर लौटे हैं. यह एक बेहतर अवसर है जब पहाड़ को खेती बाड़ी बागवानी सब्जी उत्पादन आदि में बेहतर बनाया जा सकता है.


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