परिवहन निगम: रफ़्तार भर रही मौत की सवारी !

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NEWS DESK:  उत्तराखंड रोडवेज को अपने सवारियों के जान की सलामती की कितनी चिंता है इस बात का अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि UTC सेकड़ों कंडम बसों के भरोसे चल रहा है. प्रदेश में UTC की 15 बसें हर महीने कंडम हो रही, यानी साल भर में 180 के करीब बसें कबाड़ हो रही हैं लेकिन परिवहन निगम के कान में जूं नहीं रेंग रही. जानकर बताते हैं कि निगम के नियमानुसार UTC के बेड़े में हर साल करीब 200 नई बसें शामिल करने की जरूरत है, पर उत्तराखंड में सब कुछ भगवान भरोसे चल रहा है. बसों की सालों साल तक खरीद नहीं हो पा रही है. आपको बताते चलें की उत्तराखंड रोडवेज तय मानकों के अनुसार एक बस 6 साल पुरानी हो जाती है तो इसका ऑक्शन किया जा सकता है. उत्तराखंड में स्थितियां बिलकुल भिन्न हैं मनमाने तरीके से यात्रियों की जान से खिलवाड़ किया जा रहा है.

800 बसें ऑन रोड

उत्तराखंड रोडवेज के बड़े में वर्तमान में करीब 1300 बसें हैं. इनमें नार्मल बस के अलावा 200 के करीब डीलक्स और वाल्वो और AC बस हैं. एक अनुमान के मुताबिक हर दिन UTC की 800 बसें अलग अलग रूट्स पर होती हैं. जबकि बाकी बची 500 बसें फिटनेस, रिपेयरिंग के बहाने वर्कशॉप का चक्कर काटती हैं में. इनमें 300 बसें कंडम हो चुकी हैं और इनकी नीलामी हो जानी चाहिए थी, पर निगम इन्हें दौड़ाए जा रहा है. परिवहन निगम में पहली बार नई बसें 2005 में खरीदी गई. रोडवेज की माली हालत को देखते सरकार ने 60 करोड़ रुपये नई बसें खरीदने को दिए. इस बजट से 500 बसें हिल और प्लेन्स इलाकों के लिए खरीदीं गईं. साल 2012 में भाजपा सरकार के दौरान 300 बसें खरीदी गई. लेकिन वित्तीय स्थिति नहीं सुधरी. डेढ़ साल पहले तक 1300 बसों के बेड़े से ही सड़क पर चलती रही. इनमें से 300 बसें कंडम हो गईं. पिछले साल रोडवेज ने एक सौ करोड़ रुपये की सरकारी मदद से 500 नई बसें अपने बेड़े में जोड़ी लेकिन इन बसों की खरीदी लेकिन यह मामला भी विवादों से जुड़ा रहा.


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