16.4 C
Dehradun
Saturday, February 21, 2026


spot_img

बजट से पहले आठवें वेतन आयोग का गठन

नई दिल्ली। केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के वेतन, भत्ते व पेंशन में वृद्धि करने पर अनुशंसा देने के लिए केंद्र सरकार ने गुरुवार को आठवें वेतन आयोग के गठन का फैसला किया। सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने यह जानकारी दी कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आठवें वेतन आयोग के गठन के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इस फैसले से केंद्र सरकार में कार्यरत (सैन्य बलों में कार्यरत कर्मियों समेत) 50 लाख कर्मचारियों और 65 लाख पेंशनभोगियों को लाभ होगा। इस फैसले से सरकार पर वित्तीय बोझ तो बढ़ेगा, लेकिन इसका असर देश में विभिन्न उत्पादों व सेवाओं की मांग को बढ़ाने पर भी होगा।
अभी जिस तरह भारतीय इकोनॉमी मांग की कमी से जूझ रही है, उसे देखते हुए इसका सकारात्मक असर होगा। दिल्ली में भी चार लाख केंद्रीय कर्मचारी (सैन्य बल शामिल) हैं जो इस फैसले से फायदे में होंगे। दिल्ली चुनाव को देखते हुए यह फैसला अहम साबित हो सकता है।
वैष्णव ने बताया, ‘आजादी के बाद से ही एक निश्चित अंतराल पर केंद्रीय कर्मचारियों का वेतनमान बढ़ाने पर सुझाव देने के लिए वेतन आयोग का गठन किया जाता रहा है। अंतिम बार सातवें वेतन आयोग की सिफारिशें 2016 से प्रभावी हुई थीं। वैसे आठवें वेतन आयोग का गठन अगले वर्ष 2026 में किया जाना था, लेकिन प्रधानमंत्री ने यह फैसला अभी इसलिए किया है ताकि उसे सिफारिश देने और सरकार को उस पर फैसला करने के लिए पर्याप्त समय मिले।’
वेतन आयोग की सिफारिशों के बाद जब वेतन-भत्ते आदि में वृद्धि होती है तो उससे पूरी इकोनॉमी पर सकारात्मक असर होता है। सातवें वेतन आयोग का गठन फरवरी 2014 में तत्कालीन मनमोहन सिंह सरकार ने किया था और उसकी सिफारिशों को मोदी सरकार ने एक जनवरी, 2016 से लागू किया था। वर्ष 2016-17 में सातवें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू करने के लिए सरकार के व्यय में एक लाख करोड़ रुपये की वृद्धि हुई थी। हालांकि, सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों को केंद्र ने पूरी तरह से लागू नही किया था। हालांकि केंद्र सरकार ने वेतन व पेंशन में वृद्धि का जो फैसला किया था उसकी वजह से केंद्र सरकार में न्यूनतम मूल वेतन 7,000 रुपये से बढ़ कर 18,000 रुपये प्रति माह और न्यूनतम पेंशन 3,500 रुपये से बढ़कर 9,000 रुपये प्रति माह हो गई थी। जबकि अधिकतम वेतन 2.50 लाख रुपये और अधिकतम पेंशन 1.25 लाख रुपये तय की गई थी। सूत्रों ने बताया, आम तौर पर देखा गया है कि वेतन आयोग की रिपोर्ट लागू होने के दो-तीन वर्षों तक नए आवासों, कारों व घरेलू सामानों की मांग में तेजी रहती है। पर्यटन पर भी इसका सकारात्मक असर देखा जाता रहा है। वैसे इसका असर महंगाई पर भी दिखता है क्योंकि बाजार में मांग बढ़ जाती है। साथ ही सरकार के राजस्व में इजाफा होता है क्योंकि ज्यादातर सरकारी कर्मचारी ज्यादा टैक्स देते हैं। वेतन आयोग महंगाई से निपटने के लिए केंद्रीय कर्मियों एवं पेंशनभोगियों के लिए महंगाई भत्ते एवं महंगाई राहत में संशोधन के फार्मूले की भी सिफारिश करता है।

spot_img

Related Articles

Latest Articles

ट्रंप पर भारी पड़ सकता है सुप्रीम कोर्ट का फैसला, मिड-टर्म चुनाव में दिख...

0
नई दिल्ली। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने अपने दूसरे कार्यकाल में टैरिफ को केंद्र में बना रखा है और दूसरे देशों के साथ...

इंडिया एआई समिट की बड़ी कामयाबी: होगा 250 अरब डॉलर का निवेश, 70 से...

0
नई दिल्ली: इंडिया एआई समिट में इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए 250 अरब डॉलर का निवेश हासिल हुआ है और 'दिल्ली घोषणापत्र' पर 70 देशों ने...

परिवहन सुधारों में उत्तराखण्ड को बड़ी उपलब्धि, केन्द्र से 125 करोड़ की प्रोत्साहन राशि...

0
देहरादून। उत्तराखण्ड में परिवहन क्षेत्र में किए जा रहे व्यापक सुधारों को केन्द्र सरकार ने सराहते हुए पूंजीगत निवेश योजना 2025-26 के अंतर्गत राज्य...

5 लाख से अधिक लोगों तक पहुंचा ‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’ अभियान

0
देहरादून: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में चला ‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’ अभियान 45 दिन की अवधि के बाद शुक्रवार को...

लोकभवन देहरादून में वसन्तोत्सव का आयोजन 27 फरवरी से

0
देहरादून। उत्तराखंड लोक भवन में हर साल की तरह इस साल भी तीन दिवसीय वसन्तोत्सव 2026 का आयोजन होने जा रहा है। उद्यान एवं...