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Monday, February 16, 2026


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मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने हिंदू आबादी में गिरावट पर चिंता जताई

गुवाहाटी। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने गुरुवार को हिंदू आबादी में गिरावट और मुस्लिम आबादी में वृद्धि पर चिंता व्यक्त की। सरमा ने अपने स्वतंत्रता दिवस भाषण में कहा कि हिंदू आबादी घटकर 57 प्रतिशत रह गई है, जबकि मुस्लिम आबादी बढ़कर 41 प्रतिशत हो गई है। यह हमारे लिए गहरी चिंता का विषय है।
राज्य सरकार असम में जनसांख्यिकीय संतुलन बनाए रखने को प्राथमिकता दे रही है और हम स्वदेशी लोगों के अधिकारों की सुरक्षा की दिशा में काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि गोलपारा, बारपेटा और कुछ अन्य स्थानों पर मूल लोगों की जमीनें अन्य धर्मों के लोगों द्वारा नहीं खरीदी जा सकती हैं। स्वदेशी संस्कृति की रक्षा के लिए ऐसे स्थानों पर अंतरधार्मिक भूमि हस्तांतरण को रोका जाएगा।
राज्य सरकार आगामी विधानसभा सत्र में इस संबंध में एक नया अधिनियम लाएगी। उन्होंने राज्य सरकार द्वारा लाई जाने वाली कई परियोजनाओं के बारे में भी जानकारी दी। भूमि संबंधी विवादों को कम करने के लिए उन्होंने दो अक्टूबर को मिशन बसुंधरा 3.0 की शुरुआत की घोषणा की। सीएम सरमा के अनुसार, 74 नए जिले या उपखंड बनाए जाएंगे और चिकनाझार असम में आठवां राष्ट्रीय उद्यान बनेगा।
हिमंत बिस्व सरमा ने बांग्लादेश के मौजूदा हालात पर चिंता जताते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से आग्रह किया कि पड़ोसी देश में रह रहे हिंदुओं की सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए सभी कूटनीतिक विकल्पों का उपयोग करें। 78वें स्वतंत्रता दिवस पर राष्ट्रीय ध्वज फहराने के बाद मुख्यमंत्री हिमंत ने गुरुवार को कहा कि एकजुट राष्ट्र के लिए सभी ने अंग्रेजों से लड़ाई की थी। किसी को भी देश का विभाजन नहीं चाहिए था।
उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता दिवस समारोह मनाते हुए बांग्लादेश में रह रहे हिंदुओं, ईसाइयों, बौद्धों और जैनियों की चिंता हो रही है। हमें विशेष रूप से बांग्लादेशी हिंदुओं की सुरक्षा की चिंता हो रही है। हम मानते हैं कि प्रधानमंत्री मोदी उनकी सुरक्षा को सुनिश्चित कराएंगे। मैं उन सभी लोगों के लिए संवेदना व्यक्त करता हूं जो बांग्लादेश की हिंसा में मारे गए हैं।
सीमाओं की सुरक्षा को संवैधानिक दायित्व बताते हुए सरमा ने बीएसएफ और असम पुलिस का बांग्लादेश से लगी अंतरराष्ट्रीय सीमा की सुरक्षा के लिए आभार जताया। उन्होंने कहा कि इन लोगों ने यह सुनिश्चित किया कि कोई भी देश में दाखिल नहीं हो सके। सरमा ने कहा कि कोई भी भारत का विभाजन नहीं चाहता था। बांग्लादेश और पाकिस्तान के हिंदुओं ने भी एकीकृत राष्ट्र के लिए संघर्ष किया था। हालांकि जो लोग भारत की राजनीतिक ताकत के लिए जिम्मेदार थे, उन्होंने ही मौलावादी ताकतों के आगे आत्मसमर्पण कर दिया और देश के हिंदू, पाकिस्तानी हिंदू और बांग्लादेशी हिंदू बन गए। उन्होंने कहा कि लोगों ने 1975 के काले अध्याय आपातकाल के समय भी उसका जमकर विरोध कर भारतीय लोकतंत्र का एक बड़ा उदाहरण पेश किया।

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