23.3 C
Dehradun
Thursday, August 27, 2026


spot_img

जयशंकर ने भारत-चीन संबंधों पर चर्चा की, कहा- बीजिंग की बढ़ती ताकतों के लिए तैयार रहना होगा

नई दिल्ली: विदेश मंत्री एस जयशंकर ने शनिवार को कहा कि भारत-चीन संबंधों में 2020 के बाद की सीमा स्थिति के चलते जटिलताएं बढ़ी हैं। उन्होंने कहा कि अब इन संबंधों के दीर्घकालिक विकास पर अधिक विचार करने की आवश्यकता है। विदेश मंत्री ने मुंबई में एक व्याख्यान में पिछले दशकों में चीन के साथ भारत के संबंधों के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की। उन्होंने बताया कि पूर्व के नीति-निर्माताओं द्वारा की गई ‘गलत व्याख्याओं’ ने सहयोग और प्रतिस्पर्धा दोनों को बाधित किया। उन्होंने यह भी कहा कि पिछले दशक में हालात में बदलाव आया है।
उन्होंने कहा कि आपसी विश्वास, सम्मान और संवेदनशीलता दोनों देशों के रिश्तों की नींव होनी चाहिए। भारत और चीन के बीच संबंध हमेशा से आसान नहीं रहे हैं, क्योंकि सीमा विवाद और विभिन्न सामाजिक-राजनीतिक प्रणालियां इसे और मुश्किल बनाती हैं। उन्होंने कहा कि इसका एक बड़ा कारण यह है कि दोनों देश उन्नति कर रहे हैं।
जयशंकर ने कहा कि भारत को ‘चीन की बढ़ती क्षमताओं’ का सामना करने के लिए तैयार रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि अपने लक्ष्य को पूरा करने के लिए, भारत की व्यापक राष्ट्रीय शक्ति का अधिक तेजी से विकास आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि यह केवल सीमाओं और समुद्री क्षेत्रों में सुधार करने की बात नहीं है, बल्कि संवेदनशील क्षेत्रों में निर्भरता को कम करने की भी बात है। उन्होंने भारत के दृष्टिकोण को तीन पहलुओं में बांटा- आपसी सम्मान, संवेदनशीलता और हित। जयशंकर ने यह भी कहा कि द्विपक्षीय संबंधों को समझने से हमें पता चलेगा कि ये दोनों देशों और वैश्विक व्यवस्था के लिए कितने महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में अमेरिका और चीन के बदलते रुख का भी उल्लेख किया और कहा कि यह भारत की ‘एक्ट ईस्ट’ नीति का विस्तार है, जो शुरू में आसियान पर केंद्रित थी। उन्होंने कहा कि यह जापान और ऑस्ट्रेलिया के साथ गहरे जुड़ाव को भी दर्शाता है। विदेश मंत्री जयशंकर ने क्वाड समूह की भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि इसने जलवायु, आपूर्ति श्रृंखला और समुद्री सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में महत्वपूर्ण प्रगति की है। जयशंकर ने कहा कि भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारा (आईएमईसी) एक नया लॉजिस्टिक टेम्पलेट पेश करता है। उन्होंने बताया कि पिछले दशक में भारत ने विभिन्न मुद्दों पर कई देशों के साथ लगभग 40 सहयोगी प्रयास किए हैं, जो भारत की रणनीतिक प्राथमिकताओं को बनाए रखते हैं।

spot_img

Related Articles

Latest Articles

भारत और अमरीका ने द्विपक्षीय परमाणु सहयोग मजबूत करने पर चर्चा की

0
नई दिल्ली। भारत और अमरीका ने द्विपक्षीय नागरिक परमाणु सहयोग में हुए विकास और इस क्षेत्र में संबंधों को और मजबूत करने के तरीकों...

व्‍यस्‍ततम रेल लाइनों को चार लेन में बदलने की दिशा में काम किया जा...

0
नई दिल्ली। रेल मंत्री अश्विनी वैष्‍णव ने कहा है कि व्‍यस्‍ततम रेल लाइनों को चार लेन में बदलने की दिशा में काम किया जा...

ईद मिलाद-उन-नबी देश के विभिन्न हिस्सों में धार्मिक उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया...

0
नई दिल्ली। पैगंबर हज़रत मुहम्मद का जन्मदिन, ईद मिलाद-उन-नबी, आज देश के विभिन्न हिस्सों में धार्मिक उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया गया। जगह-जगह मिलाद...

नेपाल में भीषण बाढ़ में 100 लोगों की मौत, 750 लापता

0
नई दिल्ली। तिब्बत की सीमा से लगे मध्य नेपाल के जिलों में बुधवार सुबह अचानक आई भीषण बाढ़ ने भारी तबाही मचाई जिसमें 100...

टपकेश्वर महादेव की भव्य शोभायात्रा में शामिल हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी

0
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बुधवार को सहारनपुर चैक, देहरादून में टपकेश्वर महादेव की भव्य शोभायात्रा में प्रतिभाग किया। मुख्यमंत्री ने टपकेश्वर महादेव...