29.8 C
Dehradun
Thursday, June 18, 2026


spot_img

भारत ने ब्रिटेन की संसदीय समिति की रिपोर्ट को किया खारिज, आरोपों को बताया बेबुनियाद

नई दिल्ली: भारत ने ब्रिटिश संसदीय रिपोर्ट में लगाए गए ‘अंतरराष्ट्रीय दमन’ के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे दुर्भावनापूर्ण, तथ्यहीन और पूर्वाग्रही करार दिया है। भारत का मानना है कि इस तरह की रिपोर्टें अविश्वसनीय स्रोतों पर आधारित होकर भारत के खिलाफ राजनीतिक एजेंडे को बढ़ावा देती हैं।
भारत सरकार ने शुक्रवार को ब्रिटेन की एक संसदीय रिपोर्ट में लगाए गए आरोपों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है, जिसमें भारत को उन देशों की सूची में शामिल किया गया है जो कथित रूप से ब्रिटेन में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दमन में शामिल हैं। विदेश मंत्रालय (एमईए) के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने इस रिपोर्ट को बेबुनियाद बताते हुए कहा कि इसमें लगाए गए आरोप असत्यापित और संदिग्ध स्रोतों पर आधारित हैं, जिनका संबंध ऐसे व्यक्तियों और संगठनों से है जो भारत-विरोधी गतिविधियों में शामिल रहे हैं।
ब्रिटिश संसद की संयुक्त मानवाधिकार समिति ने 30 जुलाई को एक रिपोर्ट जारी की जिसका शीर्षक- ‘ब्रिटेन में अंतरराष्ट्रीय दमन’ है। इस रिपोर्ट में भारत के अलावा चीन, पाकिस्तान, रूस, तुर्की, ईरान, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, इरिट्रिया, बहरीन, रवांडा और मिस्र जैसे देशों का नाम शामिल है, जिन्हें ब्रिटेन में ट्रांसनेशनल रेप्रेशन यानी सीमाओं से बाहर जाकर अपने विरोधियों को डराने-धमकाने या उत्पीड़न करने का आरोप लगाया गया है।
विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि यह रिपोर्ट अविश्वसनीय स्रोतों पर आधारित है। इन स्रोतों में ऐसे संगठन और व्यक्ति शामिल हैं जो भारत में प्रतिबंधित हैं, जैसे कि सिख फॉर जस्टिस (एसएफजे) – एक खालिस्तान समर्थक संगठन, जिसे भारत ने गैर-कानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत प्रतिबंधित किया है। इन स्रोतों की पृष्ठभूमि भारत-विरोधी रही है और उनका उद्देश्य भारत की छवि को नुकसान पहुंचाना है।
विश्वसनीयता संदिग्ध स्रोतों पर निर्भर है, जिनकी पृष्ठभूमि भारत के खिलाफ पूर्वाग्रह से भरी हुई है। इस प्रकार की रिपोर्ट खुद अपनी विश्वसनीयता पर सवाल खड़ी करती है।’रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ब्रिटेन में रहने वाले कुछ भारतीय मूल के कार्यकर्ताओं, खासकर सिखों, को भारत सरकार की तरफ से प्रताड़ित किया जा रहा है या उन पर निगरानी रखी जा रही है। इसमें कुछ उदाहरण सिख फॉर जस्टिस और ब्रिटेन में स्थित अन्य सिख संगठनों के दिए गए हैं।
खालिस्तान के नाम पर अलगाववादी एजेंडा चला रहे हैं। ये लोग न केवल भारत की संप्रभुता को चुनौती देते हैं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर झूठे प्रचार के माध्यम से भारत की छवि को धूमिल करने की कोशिश करते हैं। ऐसे समूहों को रिपोर्ट के लिए सूत्र मानना स्वयं रिपोर्ट की निष्पक्षता पर संदेह पैदा करता है।

spot_img

Related Articles

Latest Articles

पीएम मोदी ने जी-7 शिखर सम्मेलन से अलग अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप से मुलाकात...

0
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने कहा है कि होर्मुज जलडमरूमध्‍य को आवाजाही के लिए खुला रखना वैश्विक अर्थव्‍यस्‍था के लिए अत्‍यन्‍त महत्‍वपूर्ण है।...

गृह मंत्री अमित शाह ने राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 की समीक्षा की

0
नई दिल्ली। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने आज नई दिल्ली में एक उच्च स्तरीय बैठक में राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन 1 9 3...

पीएम आवास योजना-शहरी के दूसरे चरण में 2.13 लाख से अधिक अतिरिक्त मकानों को...

0
नई दिल्ली। सरकार ने प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी के दूसरे चरण के अंतर्गत पात्र शहरी गरीब परिवारों के लिए 2.13 लाख से अधिक अतिरिक्‍त मकानों...

भारत-ब्रिटेन सीईटीए 15 जुलाई से होगा लागू, पीएम मोदी ने व्यापार में नई गति...

0
नई दिल्ली। भारत और ब्रिटेन के बीच व्यापक आर्थिक और व्यापार समझौता-सीईटीए 15 जुलाई से लागू होगा। इसके साथ ही सामाजिक सुरक्षा से जुड़ा...

उद्योग मित्रों की समस्याओं का समाधान करना जिला प्रशासन की प्राथमिकताः डीएम

0
देहरादून। जिलाधिकारी डॉ. आशीष चैहान की अध्यक्षता में आज ऋषिपर्णा सभागार, कलेक्ट्रेट में जिला उद्योग मित्र समिति की बैठक आयोजित की गई। जिलाधिकारी ने...