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Monday, May 4, 2026


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राहुल गांधी की मतदाता सूची को आयोग ने बताया भ्रामक, फैक्ट चेक के बाद फिर दोहराई अपनी मांग

नई दिल्ली: भारत के चुनाव आयोग ने रविवार को कांग्रेस राहुल गांधी की तरफ से जारी उस मतदाता सूची को पूरी तरह गलत और भ्रामक बताया है, जिसमें 30,000 मतदाताओं के पते फर्जी होने का दावा किया है। चुनाव आयोग ने फैक्ट चेक के बाद कहा कि विधि सम्मत प्रक्रिया को ध्वस्त करने की कोशिश कर रहे हैं और जितना भी संभव हो सकता है, उतना ज्यादा लोगों को भ्रमित करने की कोशिश कर रहे हैं। चुनाव आयोग ने अपने आधिकारिक एक्स सोशल मीडिया पर कांग्रेस की पोस्ट को साझा करते हुए लिखा, यह बयान पूरी तरह भ्रामक है। अगर राहुल गांधी को लगता है कि उनकी तरफ से साझा की जा रही सूची वाकई सही है तो उन्हें कानूनी प्रक्रिया का पालन करने में कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए। उन्हें बिना देरी कर्नाटक के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को जवाब भेजना चाहिए। आयोग ने इसके साथ ही फिर दोहराया कि या तो वह अपनी प्रेस कांफ्रेंस में उठाए गए मुद्दों पर हस्ताक्षरित हलफनामा दें या फिर देश से माफी मांगें।
आयोग ने अपनी पोस्ट में लिखा कि विपक्ष के नेता के पास अब दो ही विकल्प हैं। पहला, अगर उन्हें लगता है कि उनका विश्लेषण सही है और आयोग पर लगाए गए उनके आरोप सत्य हैं तो उन्हें संबंधित मतदाताओं के बारे में दावे और आपत्तियां जताते हुए मतदाता पंजीकरण नियम 1960 की धारा 20(3)(बी) के तहत हस्ताक्षरित शपथ देनी चाहिए। दूसरा, अगर वह शपथपत्र नहीं देते हैं तो यही माना जाएगा कि उनकी जानकारी तथ्यात्मक रूप से गलत है और वह बेबुनियाद आरोप लगा रहे हैं। इसके लिए उन्हें देश से माफी मांगनी चाहिए। हरियाणा के मुख्य निर्वाचन अधिकारी की ओर से लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को नोटिस जारी किया गया है, जिसमें उनसे उन दस्तावेजों को पेश करने के लिए कहा गया है जिनके आधार पर उन्होंने 7 अगस्त को दिल्ली में एक प्रेस वार्ता के दौरान हरियाणा के चुनाव से संबंधित आरोप लगाए थे।
हरियाणा के मुख्य निर्वाचन अधिकारी की ओर से जारी पत्र के अनुसार प्रेसवार्ता के दौरान राहुल गांधी ने दिए गए बयानों में उल्लेख है कि हरियाणा की मतदाता सूची में कथित रूप से अयोग्य मतदाताओं को शामिल करने और योग्य मतदाताओं को बाहर करने से संबंधित है। इस संबंध में दस्तावेजों को 10 दिन के अंदर प्रदान करवाया जाए, ताकि उचित कार्रवाई की जा सके। रविवार को कर्नाटक के मुख्य चुनाव अधिकारी ने भी कांग्रेस सांसद राहुल गांधी से उन दस्तावेजों और सबूतों की मांग की है, जिनके आधार पर उन्होंने दावा किया था कि एक महिला ने दो बार वोट डाला। यह मामला राजनीतिक और चुनावी नियमों के लिहाज से गंभीर माना जा रहा है। चुनाव आयोग का कहना है कि ऐसे आरोपों की पुष्टि के लिए ठोस प्रमाण जरूरी हैं। गांधी ने पिछले हफ्ते राष्ट्रीय राजधानी में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में ये दस्तावेज दिखाए थे। आयोग ने कहा कि आपने यह भी बताया था कि मतदान अधिकारी द्वारा दिए गए रिकॉर्ड के अनुसार, श्रीमती शकुन रानी ने दो बार मतदान किया था। जांच करने पर, श्रीमती शकुन रानी ने कहा है कि उन्होंने केवल एक बार मतदान किया है, दो बार नहीं, जैसा कि आपने आरोप लगाया है।
पत्र में कहा गया है कि मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय द्वारा की गई प्रारंभिक जांच में यह भी पता चला है कि कांग्रेस नेता द्वारा प्रस्तुत प्रस्तुति में दिखाया गया सही का निशान वाला दस्तावेज मतदान अधिकारी द्वारा जारी नहीं किया गया था। नोटिस में कहा गया कि आपसे अनुरोध है कि आप वे प्रासंगिक दस्तावेज उपलब्ध कराएं जिनके आधार पर आपने यह निष्कर्ष निकाला है कि शकुन रानी या किसी और ने दो बार मतदान किया है, ताकि इस कार्यालय द्वारा विस्तृत जांच की जा सके।
कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने राज्य के विधि विभाग को 2024 के लोकसभा चुनावों में मतदान में धांधली के आरोपों की जांच करने का निर्देश दिया है। सिद्धरमैया ने कहा कि यह जांच आगामी बृहत बेंगलुरु महानगर पालिका (बीबीएमपी) चुनावों से पहले पूरी हो जाएगी। शनिवार को पत्रकारों से बात करते हुए मुख्यमंत्री ने पुष्टि की कि महाधिवक्ता को जांच करने और जल्द से जल्द रिपोर्ट सौंपने का काम सौंपा जाएगा। उन्होंने आश्वासन दिया, सिफारिशों के आधार पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। यह कदम लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी की ओर से कर्नाटक के महादेवपुरा निर्वाचन क्षेत्र में बड़े पैमाने पर चुनावी गड़बड़ी का आरोप लगाने के एक दिन बाद उठाया गया है।
उल्लेखनीय है कि 7 अगस्त को एक प्रेस सम्मेलन में राहुल गांधी ने दावा किया कि राज्य में भाजपा ने लोकसभा चुनाव में 1,00,000 से ज्यादा वोट चुराए हैं। कांग्रेस के आंतरिक विश्लेषण का हवाला देते हुए, उन्होंने कहा कि पार्टी को कर्नाटक में 16 सीटें जीतने की उम्मीद थी, लेकिन उसे केवल नौ सीटें ही मिलीं। सात सीटों पर मिली अप्रत्याशित हार की जांच की गई, जिनमें महादेवपुरा को सबसे गंभीर मामला बताया गया।

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