नई दिल्ली। भारत सरकार ने वरिष्ठ राजनयिक दिनेश के. पटनायक को कनाडा में भारत का अगला उच्चायुक्त नियुक्त किया है। वे 1990 बैच के भारतीय विदेश सेवा (आईएफएस) अधिकारी हैं और इस समय स्पेन में भारत के राजदूत के तौर पर कार्यरत हैं। जानकारी के मुताबिक वे बहुत जल्द ही अपना नया कार्यभार संभालेंगे। वहीं कनाडा की विदेश मंत्री अनिता आनंद ने आज घोषणा की कि क्रिस्टोफर कूटर को भारत में कनाडा का नया हाई कमिश्नर नियुक्त किया गया है। यह पद इससे पहले कैमरन मैके के पास था। यह नियुक्ति पिछले साल जून में जी-7 सम्मेलन के दौरान कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच हुई सहमति के बाद की गई है। दोनों देशों ने वादा किया था कि वे नए हाई कमिश्नरों की नियुक्ति कर आपसी रिश्तों को आगे बढ़ाएंगे।
हाल के दिनों में भारत और कनाडा के संबंध तनावपूर्ण रहे हैं। खालिस्तानी अलगाववाद से जुड़े मुद्दों और राजनीतिक बयानों ने रिश्तों में खटास ला दी थी। दोनों देशों के बीच व्यापार, शिक्षा और प्रवासी भारतीयों के कारण गहरे रिश्ते हैं, लेकिन राजनीतिक मतभेद के चलते संवाद मुश्किल दौर में है। ऐसे समय में दिनेश पटनायक की नियुक्ति को बेहद अहम माना जा रहा है।
कनाडा में करीब 16 लाख भारतीय मूल के लोग रहते हैं, जो वहां की आबादी का बड़ा हिस्सा हैं। शिक्षा और कारोबार में भी भारतीय युवाओं की मजबूत मौजूदगी है। ऐसे में उनकी प्राथमिक जिम्मेदारी होगी कि दोनों देशों के बीच संवाद को सकारात्मक दिशा दें और रिश्तों में आए तनाव को दूर करें। उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती होगी कि दोनों देशों के राजनीतिक मतभेदों को किनारे कर सहयोग के रास्ते तलाशना, खासकर व्यापार, शिक्षा, विज्ञान और टेक्नोलॉजी के क्षेत्रों में।
कनाडा सरकार के मुताबिक, यह कदम दोनों देशों के बीच राजनयिक सेवाओं को बहाल करने और व्यापारिक व नागरिक जरूरतों को पूरा करने की दिशा में एक अहम पहल है। कनाडाई विदेश विभाग के अनुसार, क्रिस्टोफर कूटर के पास कूटनीति का 35 साल का अनुभव है। उन्होंने हाल ही में इस्राइल में कनाडा के चार्ज डी’अफेयर्स के तौर पर काम किया है। इसके अलावा वे दक्षिण अफ्रीका, नामीबिया, लेसोथो, मॉरिशस और मेडागास्कर में भी कनाडा के हाई कमिश्नर रह चुके हैं। खास बात यह है कि कूटर 1998 से 2000 के बीच नई दिल्ली स्थित कनाडा के हाई कमिश्नन में फर्स्ट सेक्रेटरी भी रह चुके हैं।
वहीं इस नियुक्ति पर कनाडा की विदेश मंत्री अनिता आनंद ने कहा, ‘नए हाई कमिश्नर की नियुक्ति से भारत-कनाडा के रिश्तों में नई ऊर्जा आएगी। यह कदम कनाडा की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने, द्विपक्षीय सहयोग को गहरा करने और कनाडाई नागरिकों के लिए सेवाएं बहाल करने की दिशा में महत्वपूर्ण है।’
ये विवाद तब शुरू हुआ, जब कनाडा के तत्कालीन प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने खलिस्तान समर्थक नेता हरदीप सिंह निज्जर की हत्या मामले में आरोप लगाया कि उनके पास इस हत्या में भारतीय एजेंटों के शामिल होने के सुबूत हैं। भारत ने इस आरोप को खारिज किया और इसे प्रेरित करार दिया। इसके बाद ही दोनों देशों में सारे सभी संबंध खराब होते चले गए। फिर दोनों देशों से उच्चायुक्तों का निष्कासन हुआ, वीजा सेवाएं रद्द हो गई। मार्च 2025 में, जस्टिन ट्रूडो की जगह मार्क कार्नी ने कनाडा में प्रधानमंत्री की कुर्सी संभाली। उनका रूझान शांत और ठंडे राजनयिक पटरों पर लौटने का था। जून 2025 में, जी7 समिट में पीएम मोदी और मार्क कार्नी की मुलाकात हुई। इस दौरान दोनों नेताओं ने ही उच्चायुक्तों की वापसी, वीजा सर्विस शुरू करना, व्यापार वार्तालाप, और टेक्नोलॉजी, खाद्य सुरक्षा, डिजिटल सहयोग जैसे क्षेत्रों में काम बढ़ाने पर सहमति जताई।
भारत और कनाडा ने नियुक्त किए उच्चायुक्त, दिनेश पटनायक व क्रिस्टोफर कूटर पर बड़ी जिम्मेदारी
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