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Tuesday, April 7, 2026


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भारतीय सेना ने मानवरहित हवाई प्रणाली और मंडराने वाली युद्धक सामग्री के लिए प्रौद्योगिकी रोडमैप का अनावरण किया

नई दिल्ली। भारतीय सेना ने आज मानवरहित हवाई प्रणाली और मंडराने वाली युद्धक सामग्री के लिए प्रौद्योगिकी रोडमैप का अनावरण किया। यह पहल मानवरहित हवाई प्रणालियों के क्षेत्र में भारतीय सेना की दीर्घकालिक आवश्यकताओं की स्पष्टता प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। भारतीय सेना ने कहा कि यह रोडमैप उद्योग, शिक्षा जगत और अनुसंधान तथा विकास संस्थानों को निवेश और तकनीकी प्रयासों को प्राथमिकता वाले क्षेत्रों की ओर निर्देशित करने के लिए स्पष्ट और कार्रवाई योग्य दिशा-निर्देश प्रदान करता है। भारतीय सेना ने आगे कहा कि यह दस्तावेज परिचालन आवश्यकताओं और तकनीकी विकास के बीच  महत्वपूर्ण कड़ी का काम करता है, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि भारत का ड्रोन तंत्र संरचित और मांग-आधारित तरीके से विकसित हो।

सेना के उप प्रमुख, लेफ्टिनेंट जनरल राहुल आर सिंह ने इस अवसर पर आधुनिक युद्ध की बदलती प्रकृति और ड्रोन प्रौद्योगिकी की बढ़ती भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि हाल के संघर्षों ने बड़े पैमाने पर तैनाती और सटीक लक्ष्यीकरण के बीच संतुलन की आवश्यकता को प्रदर्शित किया है। इस कार्यक्रम में सशस्त्र बलों, रक्षा उद्योग, स्टार्टअप और शिक्षा जगत के प्रमुख हितधारक एक साथ आए।

भारतीय सेना ने आज मानवरहित हवाई प्रणाली और मंडराने वाली युद्धक सामग्री के लिए प्रौद्योगिकी रोडमैप का अनावरण किया। यह पहल मानवरहित हवाई प्रणालियों के क्षेत्र में भारतीय सेना की दीर्घकालिक आवश्यकताओं की स्पष्टता प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। भारतीय सेना ने कहा कि यह रोडमैप उद्योग, शिक्षा जगत और अनुसंधान तथा विकास संस्थानों को निवेश और तकनीकी प्रयासों को प्राथमिकता वाले क्षेत्रों की ओर निर्देशित करने के लिए स्पष्ट और कार्रवाई योग्य दिशा-निर्देश प्रदान करता है। भारतीय सेना ने आगे कहा कि यह दस्तावेज परिचालन आवश्यकताओं और तकनीकी विकास के बीच  महत्वपूर्ण कड़ी का काम करता है, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि भारत का ड्रोन तंत्र संरचित और मांग-आधारित तरीके से विकसित हो।

सेना के उप प्रमुख, लेफ्टिनेंट जनरल राहुल आर सिंह ने इस अवसर पर आधुनिक युद्ध की बदलती प्रकृति और ड्रोन प्रौद्योगिकी की बढ़ती भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि हाल के संघर्षों ने बड़े पैमाने पर तैनाती और सटीक लक्ष्यीकरण के बीच संतुलन की आवश्यकता को प्रदर्शित किया इस कार्यक्रम में सशस्त्र बलों, रक्षा उद्योग, स्टार्टअप और शिक्षा जगत के प्रमुख हितधारक एक साथ आए।

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