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Saturday, August 8, 2026


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संसद से पारित हुआ सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विकास-संशोधन विधेयक

नई दिल्ली। संसद ने सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विकास-संशोधन विधेयक, 2026 पारित कर दिया है। राज्यसभा से सोमवार को मंजूरी मिलने के बाद लोकसभा ने आज इस विधेयक को भी पारित किया। पहले स्थगन के बाद सदन की कार्यवाही शुरू होने पर सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्री जीतन राम मांझी ने सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विकास अधिनियम, 2006 में संशोधन संबंधी विधेयक सदन में पेश किया। इस विधेयक का उद्देश्य सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम-एमएसएमई क्षेत्र के भुगतान में होने वाली देरी को दूर करना और विवाद निपटान प्रक्रिया को सरल बनाना है।

विधेयक के अनुसार, सभी केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों को एमएसएमई से खरीदे गए सामान और सेवाओं के सभी बिलों का भुगतान ट्रेड रिसीवेबल्स डिस्काउंटिंग सिस्टम के माध्यम से करना होगा। यदि किसी विवाद में मध्यस्थता विफल रहती है, तो मध्यस्थता समाप्त होने की तिथि से 30 दिन के अन्‍दर मामले को आर्बीट्रेशन के लिए भेजना होगा। इसके अलावा, पक्षों की दलीलें पूरी होने के 90 दिन के भीतर मध्‍यस्‍थता का निर्णय देना अनिवार्य होगा। विधेयक में यह भी प्रावधान है कि यदि कोई मामला छह महीने से अधिक समय तक लंबित रहता है, तो आपूर्तिकर्ता को दिए गए निर्णय की राशि का कम से कम 50 प्रतिशत भुगतान किया जाएगा।

विधेयक पारित होने के बाद पीठासीन अधिकारी दिलीप सैकिया ने सदन की कार्यवाही चलाने का प्रयास किया और प्रदर्शन कर रहे सदस्यों से सदन को सुचारु रूप से चलने देने की अपील की। उन्होंने लगातार हो रहे व्यवधान पर नाराज़गी जताते हुए कहा कि इस तरह का विरोध लोकतांत्रिक व्यवस्था के अनुरूप नहीं है। उन्होंने कहा कि बार-बार पोस्टर और बैनर लाकर कार्यवाही बाधित करना उचित नहीं है। उन्होंने सदस्यों से अपनी-अपनी सीटों पर लौटकर रचनात्मक चर्चा में भाग लेने का आग्रह किया और भरोसा दिलाया कि उन्हें अपने मुद्दे उठाने का पूरा अवसर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि सदन की गरिमा बनाए रखना सभी सदस्यों की जिम्मेदारी है और कार्यवाही सुचारु रूप से चलनी चाहिए।

संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने भी विपक्ष के रवैये पर चिंता जताते हुए कहा कि गृह मंत्री अमित शाह संसद सत्र के दौरान नियमित रूप से सदन में आते हैं और देर रात तक संसद में मौजूद रहते हैं। लगातार हंगामा जारी रहने पर पीठासीन अधिकारी ने लोकसभा की कार्यवाही दिनभर के लिए स्थगित कर दी। अब सदन की अगली बैठक सोमवार सुबह 11 बजे होगी।

इससे पहले, सुबह सदन की कार्यवाही शुरू होने पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने भारत छोड़ो आंदोलन के स्वतंत्रता सेनानियों और शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि 9 अगस्त भारत छोड़ो आंदोलन की 84वीं वर्षगांठ है। महात्मा गांधी के ‘करो या मरो’ के ऐतिहासिक आह्वान का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यह आंदोलन राष्ट्रीय एकता, साहस, सत्य और अहिंसा का स्थायी प्रतीक है। उन्होंने कहा कि इस आंदोलन ने लोकतंत्र, स्वतंत्रता, राष्ट्रीय एकता और संविधान में निहित मूल्यों के प्रति देश की प्रतिबद्धता को और मजबूत किया तथा स्वतंत्रता प्राप्ति के लिए जन-जागरण को नई दिशा दी। सदन ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी, स्वतंत्रता सेनानियों और देश की आजादी के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले शहीदों को भी श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके सम्मान में कुछ देर का मौन रखा।

इसके बाद अध्यक्ष ओम बिरला ने प्रश्नकाल शुरू कराने का प्रयास किया, लेकिन विपक्षी सदस्यों ने नीट मुद्दे पर विद्यार्थियों के प्रदर्शन के दौरान कथित पुलिस कार्रवाई का मामला उठाया। विपक्ष ने इस विषय पर गृह मंत्री अमित शाह से सदन में बयान देने की मांग की। अध्यक्ष ने कहा कि प्रश्नकाल सदन की कार्यवाही का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो प्रत्येक सदस्य को जनहित के मुद्दे उठाने का अवसर देता है। उन्होंने कहा कि संसद चर्चा, सवाल पूछने और सार्थक विचार-विमर्श का मंच है। हालांकि, हंगामा जारी रहने पर सदन की कार्यवाही पहले दोपहर 12 बजे फिर दिनभर के लिए स्थगित कर दी गई।

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