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Wednesday, February 18, 2026


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ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शन जारी, हिंसा में 538 लोगों की मौत; पूरे देश में स्थिति तनावपूर्ण

तेहरान: ईरान में सत्ता के खिलाफ जारी देशव्यापी प्रदर्शनों के बीच तनाव और बढ़ गया है। ईरान में लगभग दो सप्ताह से जारी राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शनों के दौरान हिंसा और दमन की कार्रवाई में अब तक 538 लोगों की मौत हो चुकी है। इंटरनेट और फोन सेवाएं बंद होने से हालात की स्वतंत्र पुष्टि करना मुश्किल हो गया है।
कार्यकर्ताओं के मुताबिक, प्रदर्शनों से जुड़ी हिंसा में अब तक 538 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि करीब 10,670 लोगों को हिरासत में लिया गया है।ईरान में इंटरनेट और फोन सेवाओं के बंद होने के कारण विदेश से प्रदर्शनों की स्थिति का आकलन करना मुश्किल हो गया है।
अमेरिका स्थित ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट न्यूज एजेंसी के अनुसार, प्रदर्शनों में जान गंवाने वालों की संख्या में भारी वृद्धि हुई है। एजेंसी के अनुसार, मृतकों में 450 से अधिक प्रदर्शनकारी और 41 सुरक्षा बलों के सदस्य शामिल हैं। ईरान सरकार ने प्रदर्शनों में हताहतों की संख्या जारी नहीं की है।
इसी बीच ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाकर कालिबाफ ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका ईरान पर हमला करता है तो अमेरिकी और इस्राइली सैनिकों को भी निशाना बनाया जाएगा। यह चेतावनी ऐसे समय आई है, जब राजधानी तेहरान और देश के दूसरे सबसे बड़े शहरों में प्रदर्शन दो हफ्ते से ज्यादा समय से जारी हैं।
संसद में यह बयान उस वक्त आया, जब सांसद नारेबाजी करते हुए आसन के पास पहुंच गए और अमेरिका मुर्दाबाद के नारे लगाए। विदेश में मौजूद लोगों को आशंका है कि सूचनाओं पर पाबंदी के कारण सुरक्षा बलों के सख्त रुख को बढ़ावा मिल सकता है। इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर प्रदर्शनकारियों के प्रति समर्थन जताया। उन्होंने कहा कि अमेरिका मदद के लिए तैयार है। अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ट्रंप को ईरान पर संभावित सैन्य कार्रवाई के विकल्प बताए गए हैं, हालांकि अंतिम फैसला नहीं हुआ है। वहीं, अमेरिकी विदेश विभाग ने चेताया कि ट्रंप जो कहते हैं, उस पर अमल भी करते हैं।
वहीं, दूसरी ओर ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने कहा है कि अधिकारी प्रदर्शनकारियों की बात सुनेंगे, लेकिन प्रदर्शनकारी पूरे इस्लामी गणराज्य में फैल रहे हैं और दंगाई पूरे समाज को तबाह करने का प्रयास कर रहे हैं। राष्ट्रपति ने कहा, लोगों की चिंताएं हैं, हमें उनके साथ बैठकर उनकी चिंताओं का समाधान करना चाहिए। अगर यह हमारा कर्तव्य है, तो हमें उनकी चिंताओं को दूर करना चाहिए। लेकिन इससे भी बड़ा कर्तव्य यह है कि हम दंगाइयों के एक समूह को आकर पूरे समाज को तबाह करने की अनुमति न दें।

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