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Sunday, March 8, 2026


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‘केंद्र ग्रामीण विकास निधि के बकाये का जल्द भुगतान करे’; अपील के साथ पंजाब सरकार अदालत पहुंची

दिल्ली: पंजाब सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करके केंद्र से ग्रामीण विकास निधि के बकाया एक हजार करोड़ रुपये का जल्द भुगतान कराने की मांग की है। पंजाब सरकार ने कहा है कि बजट न मिलने से पंजाब में फसल की खरीद का काम प्रभावित हो सकता है।
ग्रामीण विकास निधि के तहत बजट न मिलने से परेशान पंजाब सरकार ने अब केंद्र सरकार के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। पंजाब सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करके केंद्र से ग्रामीण विकास निधि के बकाया एक हजार करोड़ रुपये का जल्द भुगतान कराने की मांग की है। पंजाब सरकार ने कहा है कि बजट न मिलने से पंजाब में फसल की खरीद का काम प्रभावित हो सकता है। सरकार ने शीर्ष अदालत से जल्द से जल्द याचिका पर सुनवाई करने की मांग की है। मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति जे बी पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ के सामने पंजाब के महाधिवक्ता गुरमिंदर सिंह की ने कहा कि राज्य में आगामी फसल के मौसम और मंडियों की खराब स्थिति को ध्यान में रखते हुए याचिका पर सुनवाई की जरूरत है। कटाई का मौसम शुरू हो रहा है और पंजाब की मंडियों का बुनियादी ढांचा जर्जर स्थिति में है।
उन्होंने सीजेआई से राज्य सरकार की याचिका को भविष्य की तारीखों में प्राथमिकता देने का आग्रह किया। इस पर सीजेआई ने महाधिवक्ता से कहा कि हम अन्य मामलों की सुनवाई के बाद याचिका को किसी उच्च स्थिति में रखेंगे। 18 सितंबर को पीठ ने कहा था कि वह पंजाब सरकार की अंतरिम याचिका को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करेगी। इससे पहले शीर्ष अदालत ने 30 अगस्त को भगवंत मान सरकार को आश्वासन दिया था कि याचिका पर दो सितंबर को सुनवाई की जाएगी।
राज्य सरकार ने केंद्र के खिलाफ लंबित मुकदमे में एक अंतरिम आवेदन दायर किया है और अंतरिम उपाय के रूप में एक हजार करोड़ रुपये से अधिक के बजट का तत्काल भुगतान कराने की मांग की है। पंजाब सरकार ने 2023 में ग्रामीण विकास निधि (आरडीएफ) जारी न करने और बाजार शुल्क के एक हिस्से को रोकने का आरोप लगाते हुए शीर्ष अदालत का रुख किया है। इसमें दावा किया गया कि केंद्र पर पंजाब का 4,200 करोड़ रुपये से अधिक का बकाया है। याचिका में कहा गया है कि आरडीएफ और बाजार शुल्क मिलने से खरीद प्रक्रिया तेज होती है। खाद्यान्न की खरीद के लिए बाजार शुल्क और आरडीएफ निर्धारित करने का विशेषाधिकार राज्य सरकार के पास है क्योंकि इसे संविधान के तहत मान्यता दी गई है।

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