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Friday, February 20, 2026


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उप चुनावों में ईसीआई नेट (ECINET) प्रणाली की शुरुआत, कारगर साबित हुई नई प्रणाली

नई दिल्ली। भारत निर्वाचन आयोग ने हाल ही में केरल, गुजरात, पंजाब और पश्चिम बंगाल की पाँच विधानसभा क्षेत्रों में सम्पन्न हुए उप चुनावों में अपने नए डिजिटल प्लेटफॉर्म ईसीआई नेट को सक्रिय कर दिया है। यह उल्लेखनीय है कि आयोग ने इस वर्ष 4 मई को अपने 40 से अधिक मौजूदा मोबाइल और वेब एप्लिकेशन को एकीकृत करने वाले एक एकीकृत प्लेटफॉर्म ईसीआई नेट को विकसित करने की घोषणा की थी। इन उप चुनावों में ईसीआई नेट के कुछ मॉड्यूल का सफलतापूर्वक उपयोग किया गया, जिन्हें आने वाले हफ्तों में पूर्ण रूप से लागू कर दिया जाएगा। मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार तथा निर्वाचन आयुक्त डॉ सुखबीर सिंह संधू और डॉ विवेक जोशी के नेतृत्व में आयोग द्वारा पारदर्शिता और समयबद्ध चुनावी जानकारी प्रदान करने के उद्देश्य से यह एक महत्त्वपूर्ण पहल की गई है। उप चुनावों के दौरान एक प्रमुख उपलब्धि यह रही कि पीठासीन अधिकारियों ने ईसीआई नेट के माध्यम से सीधे मतदाता प्रतिशत (वीटीआर) ट्रेंड्स अपलोड किए, जबकि पहले यह कार्य मैन्युअली किया जाता था। इस नई प्रक्रिया ने सूचनाओं को तेजी से साझा करने, पारदर्शिता बढ़ाने और आंकड़ों के प्रकाशन में लगने वाले समय को काफी हद तक कम कर दिया।

पीठासीन अधिकारियों ने अपने मतदान केंद्र छोड़ने से पहले अंतिम मतदाता प्रतिशत आंकड़े अपलोड कर दिए, जिससे सार्वजनिक रूप से उपलब्ध मतदाता प्रतिशत प्रवृति (Voter turnout trends) और भी शीघ्रता से ईसीआई नेट पर दिखाई देने लगे। यह तकनीकी आधारित प्रणाली उप चुनावों के दौरान अनुमानित मतदान प्रतिशत के ट्रेंड्स को समय पर उपलब्ध कराने में कारगर रही। ईसीआई नेट की एक और बड़ी उपलब्धि यह रही कि उप चुनावों के इंडेक्स कार्ड्स को परिणाम घोषित होने के 72 घंटों के भीतर प्रकाशित कर दिया गया। इस प्रक्रिया को तेज करने और डिजिटलीकृत करने का निर्णय आयोग ने 5 जून को लिया था। नए सिस्टम के अंतर्गत, अधिकांश डेटा ईसीआई नेट से स्वतः भरे जाते हैं। पहले इस प्रक्रिया में कई दिन, सप्ताह या कभी- कभी महीनों का समय लग जाता था, क्योंकि पूरा डेटा मैन्युअल रूप से सत्यापित होने के बाद भरा जाता था। इंडेक्स कार्ड एक गैर वैधानिक (गैर स्टेच्युटरी), लेकिन महत्त्वपूर्ण पोस्ट इलेक्शन रिपोर्टिंग प्रारूप है, जिसे 1980 के दशक के अंत में विकसित किया गया था ताकि निर्वाचन संबंधी आंकड़े सभी हितधारकों जैसे शोधकर्ता, शिक्षाविद, नीति- निर्माता, पत्रकार और आम जनता के लिए सुलभ हो सकें। इन रिपोर्ट्स में उम्मीदवारों, मतदाताओं, डाले गए वोटों, गिने गए वोटों, पार्टीवार और प्रत्याशीवार वोट शेयर, लिंग आधारित मतदान रुझान, क्षेत्रीय विविधताएं और राजनीतिक दलों के प्रदर्शन जैसे विभिन्न आयामों पर आंकड़े उपलब्ध होते हैं।

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