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Wednesday, February 18, 2026


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सरकार का बड़ा फैसला: मनरेगा का नाम बदलकर किया ‘पूज्य बापू ग्रामीण रोजगार योजना’, काम के दिन भी बढ़ाए

नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने ग्रामीण रोजगार से जुड़ी देश की सबसे बड़ी योजना मनरेगा को नया रूप देने का फैसला कर लिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम का नाम बदलने वाला बिल मंजूर किया गया। सरकार का कहना है कि यह बदलाव ग्रामीण रोजगार और विकास को नई दिशा देने के लिए किया जा रहा है।
मनरेगा के तहत ग्रामीण परिवारों के वयस्क सदस्य काम की मांग कर सकते हैं। पंचायत स्तर पर रोजगार उपलब्ध कराया जाता है। काम अलग-अलग तरह के होते हैं। जैसे तालाब बनाना, सड़क की मरम्मत, नाला खुदाई, बागवानी, मिट्टी कार्य और अन्य सामुदायिक काम। ग्रामीण क्षेत्रों में यह योजना रोजगार देने और आजीविका को सुरक्षित करने का बड़ा जरिया है।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, ग्रामीण इलाकों में महंगाई और नौकरी की कमी को देखते हुए काम के दिनों को 125 करने का फैसला लिया गया है। सरकार चाहती है कि गांवों में रहने वाले परिवारों को अतिरिक्त काम मिले, ताकि उनकी आमदनी बढ़े और पलायन कम हो। बताया गया कि काम के दिनों की बढ़ोतरी से गांवों में मजदूरी का चक्र मजबूत होगा और स्थानीय अर्थव्यवस्था में गति आएगी।
सूत्रों का कहना है कि योजना का नया नाम ‘पूज्य बापू ग्रामीण रोजगार योजना’ महात्मा गांधी की ग्रामीण स्वावलंबन की विचारधारा को दर्शाने के लिए रखा गया है। सरकार चाहती है कि गांधी के ग्राम स्वराज के सिद्धांत को रोजगार से जोड़ा जाए। हालांकि, योजना की संरचना वही रहेगी। बदलाव सिर्फ नाम और काम के दिनों के रूप में लागू किया जाएगा।
कैबिनेट की मंजूरी के बाद अब यह बिल संसद में पेश किया जाएगा। विधेयक पास होते ही कानून में बदलाव लागू हो जाएंगे। अधिकारियों ने बताया कि बिल के साथ योजना के नियमों में भी संशोधन होंगे, ताकि नए नाम और काम के दिनों को आधिकारिक रूप से लागू किया जा सके।
विशेषज्ञों के अनुसार, अतिरिक्त 25 दिन का रोजगार ग्रामीण परिवारों को काफी राहत देगा। इससे उनकी आय बढ़ेगी और स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन के अवसर मजबूत होंगे। मनरेगा के तहत काम मिलने से ग्रामीण क्षेत्र में नकदी का प्रवाह बढ़ता है, जिससे बाजार और छोटे व्यवसायों को भी लाभ होता है।

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