कलकत्ता: पश्चिम बंगाल में हाल ही में कई हिंसा की घटनाएं देखने को मिली हैं। बंगाल की कानून-व्यवस्था पर राज्यपाल सीवी आनंद बोस ने अहम टिप्पणी की है। उन्होंने कहा कि पिछले दो साल से मैं उन क्षेत्र का दौरा कर चुका हूं, जहां हिंसा हुई है। इस दौरान कई पीड़ितों और उनके परिजनों से बातचीत भी की। उन्होंने सीमा पार से घुसपैठ के सवाल पर कहा कि भारत सरकार और खुफिया एजेंसियां इस पर ध्यान दे रही हैं और तुरंत कार्रवाई कर रही हैं। इस दौरान उन्होंने कहा कि राज्य सरकार को भी अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए। राज्यपाल बोस ने कहा कि जब भी उन्होंने प्रशासन के किसी भी पहलू पर रिपोर्ट मांगी तो राज्य सरकार ने उन्हें समय पर जानकारी नहीं भेजी।
नवंबर 2022 में बंगाल के राज्यपाल बने बोस ने आम जनता और यहां की संस्कृति की सराहना करते हुए कहा कि मेरा अनुभव संतोषजनक रहा है। मुझे बंगाल और यहां के लोगों की महानता का अहसास हुआ। बंगाल एक ऐसा स्थान है जो अपनी संस्कृति के लिए जाना जाता है। बंगाल की एक महान परंपरा है। यह कहा जाता था कि बंगाल में पहले इतने दूरदर्शी लोग थे, जो अनुमान लगा लेते थे कि भविष्य में क्या होने वाला है, लेकिन अब ऐसी बात नहीं है। शांति और शौहार्दपूर्ण माहौल में रहना जनता का अधिकार है। अब लोगों के जीवन और संपत्ति की रक्षा करना सरकार का कर्तव्य है।
राज्यपाल ने आगे कहा कि पिछले दो साल के कार्यकाल में मुझे ऐसा महसूस हुआ है कि बंगाल में राजनीतिक हिंसा बढ़ रही है। कानून-व्यवस्था बनाए रखना राज्य सरकार का दायित्व है। और यह सुनिश्चित करने के लिए मैं जरूरी कदम उठा रहा हूं, और आगे भी ऐसा करता रहूंगा। राजभवन में मंगलवार को पत्रकारों से बात करते हुए, राज्यपाल बोस ने संविधान के अनुच्छेद 167 का जिक्र किया। इस अनुच्छेद के तहत राज्यपाल को अधिकार है कि वह राज्य सरकार से सूचना मांग सके। ज्यादातर मामलों में, मुझे रिपोर्टें नहीं मिल पातीं, लेकिन जब मैं सख्ती करता हूं तो एक-दो रिपोर्टें मिलती हैं, इसलिए यह कहना ठीक नहीं होगा कि सरकार बिल्कुल सूचना नहीं दे रही है। हालांकि, यह अनियमित है।
राज्यपाल बोस ने बंगाल की कानून व्यवस्था पर की टिप्पणी, कहा- रिपोर्ट मांगने पर जानकारी नहीं देती सरकार
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