नई दिल्ली: देश के 12 राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण की घोषणा होते ही इन सभी राज्यों व केंद्रशासित प्रदेशों की मतदाता सूचियां फ्रीज कर दी गईं। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा राज्य सरकारों को भी प्रशासनिक फेरबदल के लिए चुनाव आयोग से अनुमति लेनी होगी। फ्रीज की गई सूची के सभी मतदाताओं को बीएलओ विशिष्ट गणना प्रपत्र देंगे। इन गणना प्रपत्रों में वर्तमान मतदाता सूची के सभी आवश्यक विवरण होंगे। बीएलओ द्वारा मौजूदा मतदाताओं को प्रपत्र वितरित करने के बाद, जिन लोगों के नाम गणना प्रपत्रों में हैं, वे यह मिलान करने का प्रयास करेंगे कि क्या उनका नाम पिछले एसआईआर की सूची में था। यदि हां, तो उन्हें कोई अतिरिक्त दस्तावेज जमा करने की आवश्यकता नहीं है। वे सिर्फ प्रपत्र भरकर जमा कर दें। यदि उनके माता-पिता का नाम सूची में था, तब भी उन्हें कोई अतिरिक्त दस्तावेज नहीं देना। 2002 से 2004 तक के एसआईआर वाली मतदाता सूची http://voters.eci.gov.in पर कोई भी देख सकता है, और स्वयं मिलान कर सकता है।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन करते हुए, चुनाव आयोग ने बिहार में एसआईआर से संबंधित अपने 9 सितंबर के आदेश के अनुसार, आधार को 12 दस्तावेजों की सूची में शामिल कर लिया है। आधार पर स्थिति स्पष्ट करते हुए, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा, जहां तक आधार कार्ड का संबंध है, सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि आधार का उपयोग आधार अधिनियम के अनुसार किया जाना है। आधार अधिनियम की धारा 9 कहती है कि आधार निवास या नागरिकता का प्रमाण नहीं होगा। सर्वोच्च न्यायालय ने कई बार यह निर्णय दिया है कि आधार जन्मतिथि का प्रमाण नहीं है। इसे ध्यान में रखते हुए, आधार प्राधिकरण ने अपनी अधिसूचना जारी की और आज भी, यदि आप नया आधार डाउनलोड करते हैं, तो कार्ड पर उल्लेख है कि यह न तो जन्मतिथि, न ही निवास या नागरिकता का प्रमाण है। आधार कार्ड पहचान का प्रमाण है और इसका उपयोग ई-हस्ताक्षर के लिए भी किया जा सकता है।
ज्ञानेश कुमार ने इस सवाल के जवाब में कहा, नागरिकता कानून के तहत असम में नागरिकता के अलग प्रावधान लागू हैं। वहां सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में नागरिकता जांच की प्रक्रिया पूरी होने वाली है। 24 जून का एसआईआर आदेश पूरे देश के लिए था, पर असम की विशेष परिस्थिति के कारण यह आदेश वहां लागू नहीं होता। असम के लिए अलग से पुनरीक्षण आदेश जारी किए जाएंगे और अलग एसआईआर तिथि की घोषणा की जाएगी।
बिहार के अनुभव से लाभ उठाते हुए, चुनाव आयोग ने यह भी निर्णय लिया है कि बूथ स्तरीय अधिकारी (बीएलओ) फॉर्मों के मिलान और लिंकिंग के लिए अधिकतम तीन बार घरों का दौरा करेंगे। कुमार ने कहा, यदि मतदाता उपलब्ध नहीं है या मिलान और लिंकिंग में देरी हो रही है, तो बीएलओ कुल तीन बार घरों का दौरा करेंगे। बीएलओ सिर्फ संबंधित राज्य ही नहीं बल्कि देश भर के मतदाता सूची की जांच कर यह देखेंगे के संबंधित व्यक्ति का नाम कहीं और तो नहीं है। यदि किसी अन्य सूची में नाम पाया गया तब भी उन्हें मतदाता माना जाएगा।
मतदाता ऑनलाइन भी फॉर्म भर सकते हैं। यदि उनके नाम, या उनके पिता या माता के नाम, 2003 की सूची में नहीं थे तो ईआरओ 12 दस्तावेजों के आधार पर पात्रता निर्धारित करेगा।आयोग द्वारा तय 12 दस्तावेजों के अलावा यदि किसी के पास अतिरिक्त वैध दस्तावेज है तो आयोग उसे भी मान्य करेगा। ईआरओ के फैसले के बाद, यानी अंतिम सूची प्रकाशित होने के बाद भी किसी भी निर्वाचन क्षेत्र का कोई भी मतदाता या निवासी जिला मजिस्ट्रेट के पास अपील कर सकता है और 15 दिनों के भीतर राज्य के मुख्य चुनाव अधिकारी के पास अपनी दूसरी अपील भी दायर कर सकता है।चुनाव आयोग ने मतदाता के लिए जरूरी अर्हताएं भी बताईं। इसके अनुसार संविधान की धारा 326 के अनुसार जो भी भारतीय नागरिक है, उसे 18 साल की आयु का होना, संबंधित क्षेत्र का निवासी होना, कानून के तहत किसी तरह के मामलों में वांछित नहीं होना चाहिए। ऐसे लोगों को सूची में नाम शामिल कराने का अधिकार है। वहीं, भीड़भाड़ से बचने के लिए, आयोग ने निर्णय लिया है कि किसी भी मतदान केंद्र पर 1,200 से ज्यादा मतदाता नहीं होंगे और ऊंची इमारतों, गेटेड कॉलोनियों और झुग्गी बस्तियों में नए मतदान केंद्र बनाए जाएंगे। ज्ञानेश कुमार ने कहा कि राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी राजनीतिक दलों के साथ बैठकें करेंगे और उन्हें एसआईआर प्रक्रिया के बारे में जानकारी देंगे। बूथ स्तरीय अधिकारी (बीएलओ) फॉर्मों के मिलान और लिंकिंग के लिए अधिकतम तीन बार घरों का दौरा करेंगे। बीएलओ सिर्फ संबंधित राज्य ही नहीं बल्कि देश भर के मतदाता सूची की जांच कर यह देखेंगे के संबंधित व्यक्ति का नाम कहीं और तो नहीं है। यदि किसी अन्य सूची में नाम पाया गया तब भी उन्हें मतदाता माना जाएगा।
राज्यों में पिछले एसआईआर की मतदाता सूची मूल मानी जाएगी, उसी के आधार पर नए मतदाताओं के नाम काटे या जोड़े जाएंगे। ठीक उसी तरह, जैसे बिहार में 2003 की मतदाता सूची का उपयोग गहन पुनरीक्षण के लिए किया था। ज्यादातर राज्यों में अंतिम एसआईआर 2002 व 2004 के बीच हुआ था। इन राज्यों ने पिछले एसआईआर के अनुसार वर्तमान मतदाताओं का आकलन पूरा कर लिया है।
अब मतदाता सूची से खेल नहीं: ECI ने 12 राज्यों में फ्रीज की लिस्ट
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