नई दिल्ली। ऑपरेशन सिंदूर के तहत भारत ने पाकिस्तान के नौ आतंकी ठिकानों पर हमला किया जिसमें बहावलपुर मुरीदके और मुजफ्फराबाद के मरकज सुभान अल्लाह मरकज तैयबा और मरकज सैयदना बिलाल प्रमुख थे। ये ठिकाने जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा के केंद्र थे जिन्हें आइएसआइ का समर्थन प्राप्त था। भारतीय एजेंसियों की लंबी निगरानी के बाद यह कार्रवाई आतंकवाद को करारा जवाब देने के लिए की गई।
आपरेशन सिंदूर के पहले दिन भारत ने पाकिस्तान स्थित नौ आतंकी ठिकानों पर हमला किया लेकिन इनमें से तीन ठिकाने बहावलपुर, मुरीदके और मुजफ्फराबाद खासतौर पर बेहद महत्वपूर्ण रहे। सात और आठ मई की रात में ऑपरेशन सिंदूर की शुरुआत के साथ ही यह सुनिश्चित किया गया था कि बहावलपुर स्थित मरकज सुभान अल्लाह, मुरीदके स्थित मरकज तैयबा और मुजफ्फराबाद स्थित मरकज सैयदना बिलाल को सबसे ज्यादा नुकसान हो।
वजह यह है कि पिछले दो दशकों में भारत पर सीमा पार से पोषित जितने भी आतंकियों ने हमला किया किया है, उन सभी के तार किसी न किसी तौर पर उक्त तीनों ठिकानों से जुड़े हुए हैं। इन तीनों ठिकानों की शुरुआत अफगानिस्तान में सोवियत संघ की सेना के खिलाफ युद्ध करने वाले कट्टरपंथियों के जरिए पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आइएसआइ ने करवाई थी। इन्हें स्थानीय पुलिस व पाक सेना कुछ उसी तरह से प्रश्रय दे रही थी जैसे कई वर्षों तक अबोट्टाबाद में ओसाम बिन लादेन को पोषित किया गया था।
सरकारी सूत्रों ने रविवार को ऑपरेशन सिंदूर के तहत चयनित स्थलों के बारे में विस्तार से बताया। यह भी बताया गया कि हमले में जिस तरह से उक्त तीनों ठिकानों को तबाह किया गया है, उससे आतंकवाद को संरक्षित, पोषित करने वाला पूरा तंत्र दहशत में है। भारतीय एजेंसियां इन ठिकानों की निगरानी लंबे समय से कर रही थीं और इनको निशाना बनाने का खाका लंबे समय से तैयार था। इसके बावजूद भारत उम्मीद किए हुए था कि आतंकवाद को लेकर पाकिस्तान का रवैया बदलेगा मगर ऐसा नहीं हुआ। सूत्र ने बताया कि बहावलपुर स्थित मरकज सुभान अल्लाह पर जैश-ए-मोहम्मद का कब्जा भारतीय जेल से सौंपे गए मौलाना मसूद अजहर के पाकिस्तान पहुंचने के बाद हुआ। इसी जगह से अजहर ने भारत पर फिदाइन हमला करने की रणनीति तैयार की और श्रीनगर स्थित 5-कार्प्स के मुख्यालय के सामने पहला आत्मघाती हमला किया गया। यहीं से भारतीय संसद पर हमले की रणनीति बनी। असल में अफगानिस्तानी जिहाद का संस्थापक अबदुल्लाह आजम भी बहावलपुर स्थित जैश अड्डे के संस्थापकों में से एक रहा है। मुजफ्फराबाद स्थित मरकज सैयदना बिलाल भी जैश-ए-मोहम्मद का प्रमुख केंद्र है और इसको भी ऑपरेशन सिंदूर ने एक तरह से धवस्त कर दिया है। सूत्रों के मुताबिक जैश के उक्त ठिकानों पर पहले ही हमला कर देना चाहिए था। भारत ने जैश के दोनों ठिकानों पर हमला करने के लिए सबसे घातक हथियारों का इस्तेमाल किया और वह भी सोच समझ कर संदेश देने के लिए। इस संगठन को दशकों से पोषित करने वाली पाकिस्तानी एजेंसियों को भी सीधा संदेश है कि उनकी हर गतिविधि पर हमारी नजर है और भारत उन्हें अपनी इच्छा से जब चाहे तब मार सकता है।
इसी तरह से मुरीदके के मरकज तैयबा को लश्कर-ए-तैयबा के मुखिया हाफिज सईद ने अब अपनी गतिविधियों का पूरा केंद्र बना रखा है। मुंबई हमले के बाद भारत ने जब हाफिज सईद के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मुहिम शुरू की और उसे संयुक्त राष्ट्र ने अंतरराष्ट्रीय आतंकी घोषित किया तो सईद इसी मस्जिद में लंबे समय तक रहने लगा था। सूत्रों के मुताबिक पिछले कुछ वर्षों में जम्मू व कश्मीर में जो घुसपैठें हो रही हैं, वह इसी मस्जिद में प्रशिक्षित आतंकी कर रहे हैं। वैसे इस मस्जिद का इतिहास भी सोवियत रूस की लड़ाई से वापस लौटे कट्टरपंथियों से जुड़ा हुआ है। ISI ने पहले कश्मीर में जम्मू व कश्मीर लिब्रेशन फ्रंट को सक्रिय किया था लेकिन बाद में मरकज तैयबा के आतंकियों को हरकत-उल-मुजाहिदीन, हरकत-उल-अंसार जैसे संगठन बना कर भारत भेजा गया। दो दशक पहले कश्मीर में पर्यटकों के अपहरण करने से लेकर समूची घाटी को अशांत बनाने का काम उन्होंने किया।
टेरिरिस्ट कैंपों के तबाह होने से खौफ में पाकिस्तान, ISI ने आतंकियों को दी हुई थी पनाह
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