बंगलूरू: कर्नाटक हाईकोर्ट ने बृहस्पतिवार को वक्फ अधिनियम के खिलाफ विरोध प्रदर्शन को लेकर राज्य सरकार को लताड़ लगाई। हाईकोर्ट ने सरकार से पूछा कि उसने कानून के खिलाफ विरोध प्रदर्शन की अनमुति क्यों दी, जबकि मामला अभी सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है। जस्टिस एम नागप्रसन्ना ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में चल रही कार्यवाही को देखते हुए इस तरह के प्रदर्शन की अनुमति देना अनुचित है। मामले की सुनवाई 23 अप्रैल को दोबारा की जाएगी।
जस्टिस नागप्रसन्ना ने कहा, राज्य को यह ध्यान में रखना चाहिए कि वक्फ अधिनियम में संशोधन के मामले में सुप्रीम कोर्ट विचार कर रहा है। इस दौरान इस तरह के विरोध प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। अदालत ने सरकार को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि इस तरह के आयोजनों से सार्वजनिक सड़कें बाधित न हों और विरोध प्रदर्शन केवल निर्दिष्ट स्थानों पर और आधिकारिक अनुमति के साथ ही किए जाएं। अदालत ने जोर देकर कहा, अगर अनुमति नहीं है, तो कोई विरोध प्रदर्शन नहीं किया जा सकता।
हाईकोर्ट की ये टिप्पणियां मंगलुरु निवासी राजेश ए की याचिका की सुनवाई के दौरान आईं। याचिका में शहर के पुलिस आयुक्त की ओर से जारी किए गए एक संदेश को चुनौती दी गई थी, जिसमें निजी बस ऑपरेटरों और कर्नाटक राज्य सड़क परिवहन निगम को निर्देश दिया गया था कि वे वक्फ अधिनियम संशोधन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के कारण शुक्रवार दोपहर 12 बजे से रात 9 बजे तक राष्ट्रीय राजमार्ग 73 के एक हिस्से पर सेवाएं संचालित न करें। याचिकाकर्ता के अनुसार, इस सलाह के कारण सार्वजनिक परिवहन में अनावश्यक व्यवधान उत्पन्न हुआ है। अधिवक्ता हेमंत आर राव और लीलेश कृष्ण ने उनका प्रतिनिधित्व किया।
विरोध प्रदर्शन के बारे में पूछे जाने पर राज्य सरकार ने अपने जवाब में अदालत को बताया कि प्रारंभिक संचार को संशोधित किया गया है। सामान्य यातायात प्रवाह बनाए रखा जाएगा। हालांकि, अधिकारियों ने सलाह दी है कि भारी और मध्यम वाणिज्यिक वाहन एहतियात के तौर पर वैकल्पिक मार्ग अपनाएं।
हाईकोर्ट ने कर्नाटक सरकार को लताड़ा, पूछा-वक्फ कानून के विरोध में प्रदर्शन की अनुमति क्यों दी
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