नई दिल्ली। संसद ने कराधान एवं अन्य विधियां संशोधन विधेयक 2026 को पारित कर दिया है। राज्यसभा ने इस विधेयक को चर्चा के बाद आज लोकसभा को वापस भेज दिया है। लोकसभा पहले ही इस विधेयक को पारित कर चुकी है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारामन ने यह विधेयक पेश किया था। इस विधेयक के माध्यम से भुगतान एवं निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007, आयकर अधिनियम, 2025 और वित्त अधिनियम, 2026 में संशोधन किया गया है। यह विधेयक आयकर (संशोधन) अध्यादेश, 2026 का स्थान लेगा, जिसे इस वर्ष 5 जून को जारी किया गया था। अध्यादेश को बाहरी आर्थिक जोखिम के प्रभाव को कम करने, घरेलू अर्थव्यवस्था में स्थिरता सुनिश्चित करने और अधिनियम के कुछ प्रावधानों में संशोधन करके मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों से प्रभावित प्रमुख क्षेत्रों को समर्थन देने के उद्देश्य से जारी किया गया था। विधेयक के तहत विदेशी संस्थागत निवेशकों और अंतर्राष्ट्रीय निपटान बैंक को सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश पर अर्जित ब्याज पर आयकर से छूट दी गई है। यह छूट इस वर्ष पहली अप्रैल या उसके बाद अर्जित आय पर लागू होगी।
पहले आयकर अधिनियम के तहत ब्याज आय पर 20 प्रतिशत, अल्पकालिक पूंजीगत लाभ पर 30 प्रतिशत और दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ पर 12.5 प्रतिशत कर लगता था। इस विधेयक में आयकर अधिनियम में आगे संशोधन करके अधिसूचित विशेष क्षेत्र में कच्चे हीरों की बिक्री से कुछ विदेशी कंपनियों द्वारा अर्जित आय को कर से छूट प्रदान की गई है।
चर्चा का जवाब देते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारामन ने कहा कि विधेयक का उद्देश्य भारत के विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करना, और अधिक निवेश आकर्षित करना, रोजगार सृजित करना और विनिर्माण गतिविधियों को बढ़ावा देना है। उन्होंने कहा कि दूसरा प्रमुख सुधार भारत में निर्दिष्ट डेटा केंद्रों से डेटा सेवाएं प्राप्त करने वाली विदेशी कंपनियों को कर छूट प्रदान करने से संबंधित है। सुश्री सीतारामन ने कहा कि इस उपाय से वैश्विक क्लाउड सेवा प्रदाताओं के लिए व्यापार करने में आसानी बढ़ेगी, भारत के डेटा सेंटर पारिस्थितिकी तंत्र का विस्तार होगा और एआई-संचालित डेटा शहरों के विकास में सहायता मिलेगी। उन्होंने बताया कि इन सुधारों से भारतीय कंपनियों को काफी लाभ होगा क्योंकि मौजूदा डेटा केंद्र अपने संचालन का विस्तार करेंगे।
वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया कि विधेयक में यूपीआई उपयोगकर्ताओं पर कोई कर या लेनदेन शुल्क नहीं लगाया गया है। सुश्री सीतारामन ने कहा कि इलेक्ट्रॉनिक भुगतान माध्यमों को शुल्क से वैधानिक सुरक्षा मिलती रहेगी। उन्होंने कहा कि व्यापारी छूट दर-एमडीआर के किसी ढांचे को अभी तक अंतिम रूप नहीं दिया गया है। उन्होंने आश्वासन दिया कि छोटे व्यापारियों और उपभोक्ताओं को यूपीआई पर एमडीआर शुल्क नहीं देना होगा।
वित्त मंत्री ने कहा कि इस संशोधन का उद्देश्य वैश्विक हीरा व्यापार गतिविधियों को आकर्षित करना भी है। इसका उद्देश्य देश के भीतर हीरों के वित्तपोषण, खरीद-बिक्री के लिए एक व्यापक पारिस्थितिकी तंत्र को बढ़ावा देना भी है। सुश्री सीतारामन ने कहा कि प्रस्तावित कर छूटों के साथ, ये वैश्विक कंपनियां भारत में थोक व्यापार स्थापित कर सकते हैं, जिससे भारतीय खरीदारों के लिए उनकी पहुंच आसान हो जाएगी।
इससे पहले, चर्चा में भाग लेते हुए, भाजपा के तरुण चुघ ने विधेयक का समर्थन करते हुए कहा कि यह स्थानीय और वैश्विक दोनों स्तरों पर राष्ट्र की प्रगति में सहायक होगा। उन्होंने कहा कि यह विधेयक देश की अर्थव्यवस्था को महत्वपूर्ण गति प्रदान करेगा और आत्मनिर्भर भारत की परिकल्पना को और मजबूत करेगा। डीएमके के पी. विल्सन ने चिंता व्यक्त की कि विधेयक के कुछ प्रावधान गरीबों, मध्यम वर्ग और आम आदमी को प्रभावित करेंगे।
आम आदमी पार्टी के संजय सिंह ने दावा किया कि छोटे लेन-देन पर कर लगाकर यह विधेयक छोटे विक्रेताओं को प्रभावित करेगा। कई अन्य सदस्यों ने भी चर्चा में भाग लिया। इसके बाद राज्यसभा में विशेष उल्लेख पर चर्चा हुई, जिसमें सदस्यों ने जन हित के अत्यावश्यक मुद्दों को उठाया। कार्य पूरा होने पर पर पीठासीन अधिकारी ने सदन को दिनभर के लिए स्थगित कर दिया।

















