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Thursday, August 20, 2026


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क्यों बनाया गया ‘श्री महाकाल लोक’?

भगवान शिव से जुड़ी कथाओं, ज्ञान, भक्तिभाव और तन-मन शिवमय हो सके, इसके लिए ही ‘श्री महाकाल लोक’ बनाया गया है। शासन द्वारा यहां आने वाले श्रद्धालुओं के लिए हर तरह की सुविधा का बंदोबस्त किया गया है। श्री महाकाल लोक का लोकार्पण पीएम मोदी द्वारा मंगलवार की शाम को किया जाएगा। इसके साथ ही प्रधानमंत्री भगवान महाकालेश्वर को समर्पित श्री महाकाल लोक स्तुति गान को भी लॉन्च करेंगे। इस गान को लॉन्च करने के बाद तमाम सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर इसे देखा और सुना जा सकेगा।

लोकार्पण के बाद शिप्रा नदी के किनारे कार्तिक मेला ग्राउण्ड पर पीएम मोदी जनसभा को सम्बोधित करेंगे। इसके पूर्व मशहूर गायक कैलाश खैर के द्वारा रंगारंग कार्यक्रमों की प्रस्तुति दी जाएगी। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बनारस के कॉरिडोर की तर्ज पर उज्जैन में भी इसी तरह का विकास करने के बारे में संकल्प लिया और यह संकल्प अब पूर्ण हो चुका है। श्री महाकाल लोक श्री महाकाल महाराज विकास योजना के प्रथम चरण के अन्तर्गत निर्मित हुआ है। मंगलवार को प्रधानमंत्री द्वारा लोकार्पण के पश्चात कुछ दिन के बाद श्री महाकाल लोक आम श्रद्धालुओं के लिये खोल दिया जाएगा।

सुंदरता देख खुद खिंचे चले आते हैं लोग

श्री महाकाल लोक को इस तरह से विकसित किया गया है कि पर्यटक और श्रद्धालु यहां खिंचे चले आएंगे। श्री महाकाल लोक का सौंदर्य मन मोहने वाला है। यहां पौराणिक कथाओं पर केन्रिलेत भगवान शिव की लीलाओं पर ऐसी अधोसंरचना का निर्माण किया गया है, जिन्हें देखकर लोगों को धरती पर शिवलोक के दर्शन होंगे। श्री महाकाल लोक के लोकार्पण कार्यक्रम का प्रसारण लाइव किया जाएगा।

कैसे जा सकते हैं ‘श्री महाकाल लोक’ ?

श्री महाकाल लोक पहुंचने के लिए चार भुजाओं वाले महाकाल ओवर ब्रिज से होकर त्रिवेणी संग्रहालय जाना होगा। संग्रहालय के ठीक सामने लगभग 450 वाहनों की पार्किंग की व्यवस्था की गई है। पार्किंग शेड के ऊपर सोलर पैनल लगाये गए हैं। उज्जैन में बना 900 मीटर से अधिक लंबा श्री महाकाल लोक भारत में अब तक निर्मित ऐसे सबसे बड़े गलियारों में से एक है। दो राजसी प्रवेश द्वार-नन्दी द्वार और पिनाक द्वार थोड़ी-थोड़ी दूरी पर श्री महाकाल लोक के शुरूआती बिन्दु पर बनाए गए हैं, जो प्राचीन मन्दिर के प्रवेश द्वार तक जाते हैं। पार्किंग के ठीक सामने पिनाक द्वार है और उसके समीप स्थित है त्रिवेणी संग्रहालय। यहीं पर श्री महाकाल लोक में प्रवेश करने के पहले नन्दी द्वार बनाया गया है। द्वार के बाहरी हिस्से में भगवान गणेश के दर्शन होते हैं। प्रवेश द्वार पर विशाल नन्दी की प्रतिमा बनाई गई है, जो कि अत्यन्त आकर्षक लगती है। इन्हें निहारते हुए ही महाकाल लोक में प्रवेश होता है।

कैसे बनाया गया है श्री महाकाल लोक ?

उल्लेखनीय है कि श्री महाकाल लोक में राजस्थान में पहाड़पुर क्षेत्र से प्राप्त बलुआ पत्थरों का उपयोग संरचनाओं के निर्माण के लिए किया गया है। राजस्थान, गुजरात और उड़ीसा के कलाकारों और शिल्पकारों ने मुख्य रूप से बलुआ पत्थरों को तराशकर और उन्हें अलंकृत कर सौंदर्य स्तंभों और पैनल में तब्दील किया है। श्री महाकाल लोक के दाहिनी तरफ कमल ताल, शिव स्तंभ, सप्तऋषि परिसर, पब्लिक प्लाजा और नवग्रह परिसर बनाये गये हैं। यहां पर बैठक व्यवस्था भी की गई है। पास ही में कमल ताल है, जहां 25 फीट ऊंची शिव की प्रतिमा बनाई गई है।

आकर्षक चित्रण मोह लेंगे मन

महाकाल लोक में बनी प्रतिमाएं, फव्वारे और आसपास की हरियाली आकर्षित करती है। कोबल्ड स्टोन की रोड क्रॉसिंग के जरिये पदयात्रियों की कनेक्टिविटी विकसित की गई है। पैदल चलते हुए शिव, देवी और श्रीकृष्ण से जुड़ी प्रतिमाएं नजर आती हैं। चित्रों के नीचे सम्बन्धित कथाएं भी अंकित की गई हैं। क्यूआर कोर्ड भी बनाये गये हैं, जिन्हें मोबाइल से स्केन कर कथा सुनी जा सकती है। इनमें शिव बारात का आकर्षक चित्रण किया गया है। एक शिल्प में कैलाश पर्वत को रावण ने उठा रखा है। कैलाश पर शिव परिवार भी विराजित है। एक शिल्प में देवी की नृत्य मुद्रा बनाई गई है।

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