नई दिल्ली। अफ्रीकी देशों में अपनी ढांचागत परियोजनाओं से गहरी पैठ बना चुके चीन को भारत व जापान से चुनौती मिलेगी। भारत और जापान के बीच अफ्रीका में साझा परियोजना चलाने को लेकर विचार-विमर्श चल रहा है। लेकिन भारत इस बात का ख्याल रखेगा कि अफ्रीका में उसकी तरफ से लगाई जाने वाली परियोजनाएं सिर्फ कुछ हासिल करने के उद्देश्य से नहीं लगाई जाएंगी। इनका उद्देश्य यह होगा कि सभी पक्षों के हितों का ख्याल रखा जाए। इस बात का संकेत विदेश मंत्री एस जयशंकर ने जापान-भारत-अफ्रीका फोरम की बैठक को संबोधित करते हुए दिया।
जयशंकर ने कहा कि भारत और जापान अफ्रीका व दूसरे क्षेत्रों में विकास व आर्थिक प्रगति को प्रोत्साहित करने के लिए अपनी द्विपक्षीय साझेदारी को मजबूत करने को प्रतिबद्ध हैं। भारत और जापान काफी लंबे समय से तीसरे देशों में कनेक्टिविटी व अन्य परियोजनाओं को साझा तौर पर लागू करने के लिए वचनबद्ध हैं। हालांकि, अभी तक किसी अहम परियोजना की इन्होंने घोषणा नहीं की है। जयशंकर ने कहा कि अफ्रीका को लेकर भारत का हमेशा से यह मानना रहा है कि साझेदारी दीर्घकालिक और सभी पक्षों के हितों का ख्याल रखने वाला हो। भारत सिर्फ हासिल करने के मॉडल को लागू नहीं करना चाहता।
उन्होंने कहा कि हम क्षमता बढ़ाने, कौशल प्रशिक्षण देने और प्रौद्योगिकी हस्तांतरित करने में भरोसा करते हैं, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि अफ्रीकी देशों को सिर्फ फायदा ना हो बल्कि वहां सतत विकास का ढांचा भी स्थापित हो। कहने की जरूरत नहीं कि विदेश मंत्री ने यहां चीन की तरफ इशारा किया है जिसकी अफ्रीका में चलाई जा रही विकास परियोजनाओं को लेकर कई तरह के सवाल उठने लगे हैं। चीन अफ्रीका में निवेश करने वाला सबसे बड़ा देश है।
सितंबर, 2024 में बीजिंग में हुए चीन-अफ्रीका फोरम की बैठक के बाद चीन की सरकार की तरफ से बताया गया कि वह अगले तीन वर्षों में अफ्रीकी देशों में कुल 51 अरब डॉलर का निवेश करेगा। इसमें 30 अरब डॉलर कर्ज के तौर पर होगा। कई एजेंसियां पहले ही रिपोर्ट दे चुकी हैं कि चीन की विकास परियोजनाओं के वित्तीय बोझ में अफ्रीकी देश कितना दब चुके हैं। चीन के मुकाबले भारत का अफ्रीकी देशों को दिया गया सहयोग बहुत कम है। विदेश मंत्री जयशंकर ने बताया कि भारत व अफ्रीका के बीच द्विपक्षीय कारोबार 100 अरब डॉलर को पार कर गया है। भारत ने अफ्रीकी देशों को अभी तक 12 अरब डॉलर का कर्ज दिया है और वहां 200 परियोजनाओं को पूरा किया है। जापान के आने के बाद स्थिति बदल सकती है।
अफ्रीका में भारत और जापान मिलकर करेंगे काम, जयशंकर के एलान से चीन की बढ़ गई टेंशन
Latest Articles
एआई इम्पैक्ट समिट-2026 में बड़ा खुलासा, दुनिया की 16% एआई प्रतिभा भारतीय
नई दिल्ली: इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट की रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया की 16 प्रतिशत एआई प्रतिभा भारतीय मूल के है। इस क्षेत्र में अगले...
भारतीय तटरक्षक बल की कार्रवाई, भारत के जलसीमा में मछली पकड़ते 28 बांग्लादेशी को...
कोलकाता: भारतीय तटरक्षक बल ने बंगाल की खाड़ी में अवैध रूप से मछली पकड़ रही एक बांग्लादेशी नाव को पकड़ा है। आईसीजीएस अमृत कौर...
दीक्षांत केवल डिग्री नहीं, आत्मबोध से राष्ट्रबोध की यात्राः राज्यपाल
देहरादून/रुड़की। राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि) ने कोर विश्वविद्यालय, रुड़की के दूसरे दीक्षांत समारोह में प्रतिभाग कर विद्यार्थियों को डिग्री और मेडल...
‘द्विपक्षीय रणनीतिक साझेदारी को नए स्तर पर ले जाने का फैसला लिया’
नई दिल्ली। फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की भारत यात्रा पर विदेश मंत्रालय ने मंगलवार को विशेष प्रेस वार्ता की। फ्रांस में भारत के राजदूत...
अवैध निर्माणों पर एमडीडीए की सख्त कार्रवाई, ऋषिकेश, डोईवाला में ध्वस्तीकरण और सीलिंग
देहरादून। मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) द्वारा प्राधिकरण क्षेत्र में अवैध निर्माणों और अनधिकृत प्लॉटिंग के खिलाफ लगातार अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम...















