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Wednesday, August 12, 2026


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बीजिंग में डोभाल-वांग यी की मुलाकात, आतंकवाद के खिलाफ कड़ा संदेश; भारत-चीन संबंधों पर भी चर्चा

बीजिंग: बीजिंग में एससीओ बैठक के दौरान भारत के एनएसए अजीत डोभाल ने चीन के विदेश मंत्री वांग यी से मुलाकात की। इस दौरान डोभाल ने क्षेत्रीय शांति के लिए आतंकवाद के हर रूप के खिलाफ सख्त कदम उठाने की बात पर जोर दिया। साथ ही दोनों नेताओं ने भारत-चीन संबंध मजबूत करने पर भी चर्चा की।
भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल ने सोमवार को चीन के विदेश मंत्री वांग यी से बीजिंग में मुलाकात की। इस दौरान डोभाल ने क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के लिए आतंकवाद के हर रूप और स्वरूप के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जरूरत पर जोर दिया। बता दें कि डोभाल चीन में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के सदस्य देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों की बैठक में भाग लेने के लिए पहुंचे हैं। इस बैठक में शामिल होने के दौरान उनकी वांग यी से यह अहम बातचीत हुई।
भारत के विदेश मंत्रालय (एमईए) की ओर से जारी बयान के मुताबिक, दोनों पक्षों ने भारत-चीन द्विपक्षीय संबंधों में हाल के घटनाक्रम की समीक्षा की। साथ ही आपसी रिश्तों को आगे बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया। इसमें लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने पर भी चर्चा हुई ताकि दोनों देशों के संबंध मजबूत हो सकें।
साथ ही इस मुलाकात के बारे में विदेश मंत्रालय की ओर से जारी बयान में आगे बताया कि बैठक में डोभाल ने साफ कहा कि आतंकवाद का कोई भी रूप बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए और इसके खिलाफ सख्त कदम उठाना जरूरी है ताकि पूरे क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनी रह सके।
बता दें कि डोभाल का यह बयान ऐसे समय आया है जब 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के जवाब में भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत हाल ही में पाकिस्तान में आतंकी ठिकानों पर जवाबी कार्रवाई की थी। इसके बाद से भारत लगातार आतंकवाद के मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठा रहा है।
विदेश मंत्रालय ने आगे यह भी बताया कि डोभाल और वांग यी ने द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी विचार-विमर्श किया। इस दौरान डोभाल ने कहा कि वह वांग यी के साथ भारत में विशेष प्रतिनिधि (एसआर) वार्ता के 24वें दौर के लिए जल्द मिलने की उम्मीद रखते हैं, जिस पर दोनों पक्ष सहमत तारीख तय करेंगे। गौरतलब है कि यह मुलाकात भारत और चीन के बीच संवाद की एक और कोशिश मानी जा रही है, खासकर ऐसे समय में जब दोनों देशों के बीच सीमा विवाद और रणनीतिक तनाव की स्थिति बनी हुई है।

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