24.5 C
Dehradun
Tuesday, August 11, 2026


spot_img

‘दुनिया में बढ़ती अर्थव्यवस्था से अधिक भारत का अध्यात्म अहम’: भागवत

नागपुर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत ने शुक्रवार को कहा कि विश्व भारत को उसके आध्यात्मिक ज्ञान के लिए महत्व देता है, न कि उसकी बढ़ती अर्थव्यवस्था के लिए। भागवत नागपुर के शिव मंदिर में आयोजित एक सांस्कृतिक कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा, दुनिया भारत को अध्यात्म के क्षेत्र में विश्वगुरु मानती है। सभी के साथ अच्छाई बांटने और दूसरों के लिए जीने की भावना ही भारत को सचमुच महान बनाती है।
उन्होंने कहा, अगर हम 3 लाख करोड़ डॉलर की अर्थव्यवस्था बन भी जाएं तो दुनिया को इससे कोई आश्चर्य नहीं होगा, क्योंकि कई देश हैं, जिन्होंने यह उपलब्धि हासिल की है। अमेरिका अमीर है, चीन अमीर हो गया है और कई अमीर देश हैं। कई चीजें ऐसी हैं जो अन्य देशों ने की हैं और हम भी करेंगे। लेकिन, दुनिया में अध्यात्म और धर्म नहीं है जो हमारे पास है।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख ने कहा कि यद्यपि धन भी महत्वपूर्ण है और इसलिए सभी क्षेत्रों में प्रगति की आवश्यकता है, लेकिन भारत को सही मायने में विश्वगुरु तब माना जाएगा जब देश अध्यात्म और धर्म में आगे बढ़ेगा। भागवत ने कहा, अध्यात्म और धर्म में यह वृद्धि तब होगी जब हम न केवल त्योहार मनाएंगे और अपनी पूजा पद्धति से काम करेंगे, बल्कि हमारा जीवन भी भगवान शिव की तरह इतना निर्भय हो जाएगा कि हम अपने गले में सांप भी धारण कर सकें। आरएसएस प्रमुख ने कहा कि भारत सभी को अच्छाई देकर महान बनता है।
भगवान शिव को दूसरों की भलाई के लिए त्याग करने का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि हमारे पास जो गुण, शक्ति और बुद्धि है उसका उपयोग दूसरों के लाभ के लिए किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, हमारे अंदर जो भी अच्छाई है, उसे हमें सबके साथ बांटना चाहिए। बुराई कुछ हद तक मौजूद है, लेकिन उसे रोका जाना चाहिए। हमें नकारात्मकता को कभी दूसरों को नहीं देना चाहिए।
भागवत ने कहा कि कट्टरता इंसान के भीतर क्रोध और घृणा पैदा करती है, जो आगे चलकर लड़ाई और युद्ध का कारण बनती है। उन्होंने कहा कि दुनिया की सभी समस्याओं की जड़ इंसान की प्रकृति में मौजूद पांच या छह प्रवृत्तियों में छिपी हुई है। इन बुरी प्रवृत्तियों को बदलने के लिए इंसान को भगवान शिव की भक्ति करनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि व्यक्ति को विनम्रता का जीवन अपनाना चाहिए और सभी के प्रति करुणा रखनी चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि हर दिन एक कदम इस पवित्र जीवन शैली की ओर बढ़ाना ही वास्तव में शिव की सच्ची भक्ति है। भागवत ने कहा कि वर्तमान दुनिया बदलाव के दौर से गुजर रही है। यदि इंसान सही कदम नहीं उठाता, तो विनाश हो सकता है। लेकिन अगर सही दिशा में कदम उठाए, तो मानवता का एक नया और ऊंचा रूप सामने आएगा।

spot_img

Related Articles

Latest Articles

मुख्यमंत्री ने प्रदान की विभिन्न विकास योजनाओं के लिए 74 करोड़ की वित्तीय स्वीकृति

0
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में अवस्थाना सुविधाओं के विकास, प्रारम्भिक व माध्यमिक विद्यालयों की आपदा के कारण क्षतिग्रस्त...

चारधाम यात्राः 114 दिनों में दर्शनार्थियों की संख्या 47 लाख पार

0
देहरादून। उत्तराखण्ड में मानसून की बाधाओं और चुनौतियों के बावजूद चारधाम यात्रा नया रिकॉर्ड बनाने की ओर अग्रसर है। प्रदेश सरकार श्रद्धालुओं की सुरक्षा...

फलोत्पादन को बढ़ावा देने के लिए इकोसिस्टम विकसित करना होगाः मुख्य सचिव

0
देहरादून। मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन की अध्यक्षता में मंगलवार को सचिवालय में सेब, कीवी, ड्रैगन फ्रूट आदि से उत्पादन सम्बन्धित योजनाओं को लेकर जिलाधिकारियों...

ट्राई ने अन्य क्षेत्रों की संस्थाओं के लिए लेनदेन और सेवा संबंधी कॉल में...

0
नई दिल्ली। भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण–ट्राई ने आज बैंकिंग, वित्तीय सेवा और बीमा-बीएफएसआई क्षेत्र और सरकारी संस्थाओं के अलावा अन्य क्षेत्रों में कार्यरत संस्थाओं...

संसद ने देश के विनिर्माण क्षेत्र को मजबूत करने, निवेश आकर्षित करने और रोजगार...

0
नई दिल्ली। संसद ने कराधान एवं अन्य विधियां संशोधन विधेयक 2026 को पारित कर दिया है। राज्यसभा ने इस विधेयक को चर्चा के बाद...