नई दिल्ली।। महिला जवानों को आधुनिक तकनीक से लैस करने को लेकर बीएसएफ ने बड़ी पहल की है। बीएसएफ द्वारा इसके लिए पहले महिला ड्रोन स्क्वाड्रन, जिसे ‘दुर्गा ड्रोन स्क्वाड्रन’ का नाम दिया गया है, इसकी ट्रेनिंग भी महिला जवानों को दी जा रही है।
सीमा सुरक्षा बल ‘बीएसएफ’ की महिला जवान, सीमा पार से आने वाले ड्रोन को मार गिराएंगी। बीएसएफ द्वारा इसके लिए पहले महिला ड्रोन स्क्वाड्रन, जिसे ‘दुर्गा ड्रोन स्क्वाड्रन’ का नाम दिया गया है, की ट्रेनिंग जोर-शोर से चल रही है। यह ट्रेनिंग बल के ग्वालियर स्थित ‘स्कूल ऑफ ड्रोन वॉरफेयर’ में प्रदान की जा रही है। इस ट्रेनिंग का मकसद, महिला जवानों को आधुनिक तकनीक से लैस कर सीमा प्रबंधन और सुरक्षा में उनकी सक्रिय भागीदारी को ज्यादा सशक्त बनाना है। प्रशिक्षण के दौरान, महिला प्रहरियों को ड्रोन उड़ाने, नियंत्रित करने और निगरानी मिशनों के लिए डेटा एकत्रित करने की विशेष ट्रेनिंग दी जा रही है।
बीएसएफ के मुताबिक, डीजी दलजीत चौधरी की प्रेरणा से सीमा सुरक्षा बल के इतिहास में यह एक नया अध्याय जुड़ गया है। वर्तमान समय में युद्ध, बल से नहीं, बल्कि तकनीक से लड़ा जा रहा है। महिलाओं की तीन विशेषताएं, ‘धैर्य-सटीकता-दृढ़ता’ को पहचान कर ड्रोन संचालित ऑपरेशन में उनकी विशेष भूमिका को समाहित करने के लिए यह प्रशिक्षण कार्यक्रम, अकादमी के निदेशक डॉ. शमशेर सिंह, आईपीएस, एडीजी के दूरदर्शी नेतृत्व में प्रारंभ किया गया है।
इस ट्रेनिंग का मकसद, प्रशिक्षुओं को सीमा पार से आने वाले ड्रोन खतरों से निपटने के उपाय, इलेक्ट्रॉनिक डिटेक्शन और रेस्पांस सिस्टम की जानकारी दी जा रही है। ड्रोन के माध्यम से खोज-बचाव कार्यों और आपदा परिस्थितियों में सहायता के लिए तकनीकी दक्षता विकसित की जा रही है। यह विशेष ड्रोन प्रशिक्षण न केवल, महिला प्रहरियों की तकनीकी क्षमताओं को निखारने का माध्यम है, बल्कि उन्हें भविष्य की स्मार्ट सीमा सुरक्षा प्रणाली का अभिन्न हिस्सा बनने की दिशा में अग्रसर करता है। इस ट्रेनिंग से महिला स्क्वाड्रन, आधुनिक तकनीक, डेटा आधारित निर्णय क्षमता और आत्मनिर्भरता के उस स्तर तक पहुंच रही है, जहां वे हर परिस्थिति में तेजी, सटीकता और आत्मविश्वास के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन कर सकेंगी। ड्रोन तकनीक से महिला जवान अब सीमाओं की निगरानी को अधिक सटीक, तीव्र और व्यापक बना सकेंगी।
ट्रेनिंग से महिला स्क्वाड्रन, रियल टाइम इंटेलिजेंस, डेटा विश्लेषण और निर्णय क्षमता में दक्ष होगी, जिससे सुरक्षा व्यवस्था और मजबूत होगी। यह पहल, महिला प्रहरियों को आधुनिक तकनीकी दक्षता, आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता से सशक्त बनाकर सीमा प्रबंधन में नई मिसाल स्थापित करेगी। सीमा सुरक्षा बल अकादमी ग्वालियर का ‘स्कूल ऑफ ड्रोन वॉरफेयर’, वर्तमान में देशभर के बीएसएफ कर्मियों को ड्रोन कमांडो कोर्स, ड्रोन वॉरियर कोर्स तथा ड्रोन ओरिएंटेशन कोर्स जैसी विशिष्ट प्रशिक्षण सुविधाएं प्रदान कर रहा है।
सीमा पार से आने वाले ड्रोन को मार गिराएगा महिलाओं का ‘दुर्गा ड्रोन स्क्वाड्रन’, सीमा सुरक्षा में नई मिसाल
Latest Articles
भारत-कुवैत संयुक्त रक्षा समिति की नई दिल्ली में हुई पहली बैठक भारत-कुवैत संयुक्त रक्षा...
नई दिल्ली। भारत-कुवैत संयुक्त रक्षा समिति- जेडीसी की पहली बैठक आज नई दिल्ली में हुई। बैठक के दौरान, दोनों देशों ने प्रशिक्षण, सैन्य अभ्यास,...
नेपाल-तिब्बत में विनाशकारी बाढ़ में मृतकों की संख्या बढ़कर 547; सीमा के दोनों तरफ...
नई दिल्ली। नेपाल और तिब्बत में विनाशकारी बाढ़ से मृतकों की संख्या बढ़कर 547 हो गई है। 1,545 लोग अब भी लापता हैं। राहत...
भारत ने नेपाल में बचाव और राहत कार्यों के लिए 47 टन से ज़्यादा...
नई दिल्ली। विदेश मंत्रालय ने बताया कि नेपाल में बुधवार को अचानक बाढ़ की त्रासदी के बाद 320 भारतीय नागरिकों से संपर्क नहीं हो...
लोक भवन में उल्लास और आत्मीयता के साथ मनाया गया रक्षाबंधन पर्व
देहरादून: रक्षाबंधन के पावन पर्व पर आज लोक भवन में प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय की बहनों ने राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि)...
मुख्यमंत्री धामी की बड़ी घोषणाः अब 60 वर्ष की आयु से महिलाओं को रोडवेज...
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेश में महिलाओं की सुविधा, सुरक्षा और गरिमा को ध्यान में रखते हुए आधुनिक सुविधाओं से युक्त हाईटेक...
















