22.9 C
Dehradun
Friday, July 31, 2026


spot_img

ईरान में आर्थिक भूचाल: एक डॉलर का भाव 14 लाख रियाल के बराबर

नई दिल्ली: ईरान इस समय साल 2022 के ‘महसा अमीनी’ प्रदर्शनों के बाद के सबसे बड़े नागरिक असंतोष का सामना कर रहा है। ईरान के प्रमुख शहरों में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए, इसका मुख्य कारण राष्ट्रीय मुद्रा ‘रियाल’ में आई रिकॉर्ड गिरावट और गहराता आर्थिक संकट है। इस तनाव की सबसे बड़ी वजह ईरानी रियाल का ऐतिहासिक निचले स्तर पर पहुंच जाना है। सोमवार को रियाल डॉलर के मुकाबले 14.2 लाख (1.42 million) के स्तर पर आ गया। 2015 के परमाणु समझौते के दौरान डॉलर के मुकाबले रियाल की कीमत लगभग 32,000 थी।
इस आर्थिक गिरावट ने देश में कई गंभीर संकट पैदा कर दिए हैं। महंगाई चरम पर है। दैनिक जरूरतों और खाद्य पदार्थों की कीमतों में बेतहाशा वृद्धि हुई है, जिससे मध्यम और निम्न आय वर्ग के परिवारों का बजट पूरी तरह चरमरा गया है। 21 मार्च से शुरू होने वाले ईरानी नववर्ष में सरकार की ओर से कर बढ़ाने की खबरों ने जनता के गुस्से को और भड़का दिया है। पेट्रोल की कीमतों में हालिया बदलावों ने महंगाई के दबाव को और बढ़ा दिया है, इसका सीधा असर परिवहन और रसद पर पड़ा है।
प्रदर्शनों की शुरुआत राजधानी तेहरान से हुई, लेकिन जल्द ही यह इस्फाइन, शिराज और मशहद जैसे अन्य प्रमुख शहरी केंद्रों तक फैल गई। इस बार के विरोध प्रदर्शनों में सबसे महत्वपूर्ण पहलू व्यापारी वर्ग की भागीदारी है। तेहरान के ऐतिहासिक ‘ग्रैंड बाजार’ सहित कई महत्वपूर्ण व्यापारिक क्षेत्रों में दुकानदारों ने अपनी दुकानें बंद कर दीं और हड़ताल पर चले गए। जानकारों के अनुसार, व्यापारियों का यह रुख 1979 की इस्लामी क्रांति के दौरान उनकी भूमिका की याद दिलाता है।
आर्थिक मोर्चे पर बढ़ते दबाव का पहला बड़ा राजनीतिक असर ईरान के सेंट्रल बैंक के प्रमुख मोहम्मद रजा फरजीन के इस्तीफे के रूप में सामने आया है। मुद्रा में लगातार आ रही गिरावट और बढ़ते विरोध के बीच उन्होंने अपना पद छोड़ दिया है। तेहरान के कई हिस्सों में भीड़ को तितर-बितर करने के लिए दंगा रोधी पुलिस ने आंसू गैस का इस्तेमाल किया। सोशल मीडिया और स्थानीय समाचार एजेंसियों के अनुसार, सड़कों पर सरकार विरोधी नारे भी सुने गए।
ईरान के राष्ट्रपति मसौद पेजेश्कियान ने पिछली सरकारों की तुलना में कुछ नरम रुख अपनाया है। आधिकारिक समाचार एजेंसी आईआरएनए के अनुसार, उन्होंने आंतरिक मंत्री को प्रदर्शनकारियों की जायज मांगों को सुनने और उनके प्रतिनिधियों के साथ संवाद करने का निर्देश दिया है ताकि समस्याओं का समाधान निकाला जा सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि जहां 2022 का ‘महिला, जीवन, स्वतंत्रता’ आंदोलन मुख्य रूप से सामाजिक और नागरिक स्वतंत्रता पर केंद्रित था, वहीं 2025 का यह वर्तमान विद्रोह पूरी तरह से प्रणालीगत आर्थिक विफलता और लंबे समय से जारी अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के प्रभाव पर आधारित है। मंगलवार तक स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है और वैश्विक समुदाय इस क्षेत्र की आर्थिक और राजनीतिक स्थिरता पर कड़ी नजर रखे हुए है।

spot_img

Related Articles

Latest Articles

अमरीका और ईरान के बीच मिसाइल हमले तेज, पश्चिम एशिया संघर्ष के तत्‍काल समाधान...

0
नई दिल्ली। अमरीका और ईरान के एक-दूसरे पर नए मिसाइल हमलों से व्‍यापक क्षेत्रीय संघर्ष की आशंका बढ़ गई है। नए हमलों से अन्‍य...

राष्ट्रमंडल खेलों में नीरज चोपड़ा समेत तीन भारतीय भाला फेंक और दो ट्रिपल जंप...

0
नई दिल्ली।  दो बार के ओलंपिक पदक विजेता नीरज चोपड़ा राष्ट्रमंडल खेलों में पुरुषों की भाला फेंक स्पर्धा के फाइनल में पहुंच गए। रोहित...

संसद ने वंदे मातरम् को राष्ट्रगान के समान वैधानिक संरक्षण प्रदान करने वाला विधेयक...

0
नई दिल्ली। संसद ने राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक, 2026 पारित कर दिया है। राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम, 1971 में संशोधन के...

पश्चिम एशिया की स्थिति की समीक्षा के लिए मंत्रिमंडल की सुरक्षा समिति की बैठक हुई

0
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सुरक्षा मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति की बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष को...

मुख्यमंत्री ने प्रदान की विभिन्न विकास योजनाओं एवं निर्माण कार्यों के लिए 676 करोड़...

0
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्वच्छ हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए सोलर लाईटों की स्थापना, पेयजल, विद्युत आपूर्ति के साथ ही...