नई दिल्ली। जल्द ही आपको राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ की तरह ‘वंदे मातरम’ के लिए भी खड़ा होना पड़ सकता है, क्योंकि सरकार राष्ट्रीय गीत 150वीं वर्षगांठ पर लिए भी वहीं प्रोटोकॉल लागू करने की योजना बना रही है।
सूत्रों के मुताबिक, गृह मंत्रालय फिलहाल इस बात पर चर्चा कर रहा है कि क्या वंदे मातरम पर भी वही नियम और कानून लागू होने चाहिए। हालांकि, इस संबंध में अभी तक कोई फैसला नहीं लिया गया है।
वंदे मातरम एक संस्कृत का वाक्यांश है जिसका अर्थ है- “मां, मैं तुम्हें प्रणाम करता हूं”, जो राष्ट्रवाद, देशभक्ति, आध्यात्मिकता और पहचान को एक साथ जोड़कर एक कहानी सुनाता है। बंकिन चंद्र चट्टोपाध्याय के उपान्यास ‘आनंद मठ’ के एक हिस्से के रूप में एक भजन के रूप में लिखा गया ‘वंदे मातरम’ का नारा भारत को औपनिवेशिक शासन से आजाद कराने के आंदोलन में स्वतंत्रता सेनानियों के लिए एक आदर्श वाक्य बन गया। इसे साल 1950 में राष्ट्रीय गीत के रूप में अपनाया गया था।
राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम अधिनियम , 1971, वर्तमान में केवल राष्ट्रगान पर लागू होता है। यहां तक कि संविधान का अनुच्छेद 51(ए) भी नागरिकों को राष्ट्रगान का सम्मान करने का आदेश देता है, हालांकि, ऐसे कोई प्रावधान नहीं है जो लोगों को खड़े होने या ‘वंदे मातरम’ गाने में भाग लेने के लिए अनिवार्य करता हो।
वंदे मातरम पर भी वही नियम लागू करने की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट और कई हाई कोर्ट में याचिकाएं दायर की गई हैं। हालांकि, सरकार ने कहा कि ये नियम केवल जन गण मन पर लागू होता है, न कि ‘वंदे मातरम’ पर।
गृह मंत्रालय के निर्देशों में राष्ट्रगान की अविधि और इसके गायन के दौरान क्या आवश्यक है, जिसमें सभी का अनिवार्य रूप से खड़ा होना और गाना शामिल है, निर्दिष्ट किया गया है।
कानूनी प्रावधावों के अनुसार, जो कोई भी राष्ट्रगान का सम्मान करने से दूसरे को रोकता या बाधा डालता है, उसे तीन साल तक की जेल की सजा हो सकती है। अब इस बात पर चर्चा हो रही है क्या इसी तरह के प्रावधान वंदे मातरम पर भी लागू किए जा सकते हैं।

















