बंगलूरू। बिहार के बाद कर्नाटक ने भी सरकारी डॉक्टरों को निजी अस्पतालों में इलाज करने पर प्रतिबंध लगा दिया है। कर्नाटक के स्वास्थ्य मंत्री दिनेश गुंडू राव ने गुरुवार को कहा कि सरकारी डॉक्टरों को निजी अस्पतालों में भर्ती मरीजों का इलाज करने से सख्ती से प्रतिबंधित किया गया है। मंत्री ने कहा कि सरकारी डॉक्टरो को अपने नियमित सरकारी कर्तव्यों को पूरा करने के बाद निजी क्लीनिकों अथवा अस्पतालों के केवल बाह्य रोगी विभाग (ओपीडी) में ही सेवा देने की अनुमति है।
कर्नाटक के स्वास्थ्य मंत्री दिनेश गुंडू राव ने कहा कि सरकारी चिकित्सकों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि इससे स्वास्थ्य क्षेत्र में नियमित सरकारी कार्य बाधित न हों। उन्होंने कहा कि चिकित्सकों को निजी अस्पतालों में इस तरह की अपनी सेवा के बारे में पूरी जानकारी सरकार को देनी होगी। इन शर्तों का उल्लंघन करने पर संबंधित चिकित्सक के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
दिनेश गुंडू राव ने कहा, सरकारी आदेशों के अनुसार सीमित दायरे में निजी प्रैक्टिस की अनुमति है, लेकिन सरकार की प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि सरकारी डॉक्टरों की नियमित ड्यूटी पर किसी भी तरह का असर न पड़े।उन्होंने कहा कि सरकारी अस्पतालों में इनपेशेंट मरीजों की निरंतर देखभाल, आपातकालीन सेवाएं और नियमित निगरानी बेहद जरूरी है। यदि सरकारी डॉक्टर निजी अस्पतालों में भर्ती मरीजों के इलाज में शामिल होते हैं, तो इससे सरकारी अस्पतालों की सेवाओं की गुणवत्ता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
मंत्री ने बताया कि सरकार के संज्ञान में ऐसे कई मामले आए हैं, जिनमें मरीजों की देखभाल में लापरवाही सामने आई और कुछ मामलों में इसके गंभीर परिणाम भी हुए। राव ने यह भी कहा कि लोकायुक्त ने इस मुद्दे पर कई बार अपनी राय रखी है, जबकि कर्नाटक प्रशासनिक सुधार आयोग ने भी सार्वजनिक सेवा को प्राथमिकता देने के उद्देश्य से सरकारी डॉक्टरों की निजी प्रैक्टिस को विनियमित करने की सिफारिश की है।
उन्होंने कहा कि केरल समेत अन्य राज्यों में भी निजी प्रैक्टिस को सीमित करने के लिए कड़े नियम लागू हैं। सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने और सरकारी अस्पतालों में सेवाओं की गुणवत्ता सुधारने पर जोर देते हुए मंत्री ने कहा कि सरकार ने यह निर्णय लेने से पहले विस्तृत समीक्षा की है।
उन्होंने दोहराया, सरकारी डॉक्टरों को निजी अस्पतालों में इनपेशेंट इलाज देने से पूरी तरह प्रतिबंधित किया गया है। उन्हें केवल नियमित कामकाज के घंटों के बाद और सरकारी ड्यूटी को प्रभावित किए बिना ओपीडी में ही निजी प्रैक्टिस की अनुमति है। इस संबंध में सरकार को पूरी जानकारी देना अनिवार्य है। राव ने चेतावनी दी कि नियमों के उल्लंघन पर कर्नाटक सिविल सेवा नियमों के तहत अनुशासनात्मक और कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
कर्नाटक सरकार का फैसला, सरकारी डॉक्टर निजी अस्पतालों में भर्ती मरीजों का नहीं कर सकते इलाज
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