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Friday, July 10, 2026


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रेडियो सेक्टर को मिलेगा नया विस्तार, केंद्रीय मंत्री एल मुरुगन बोले-डिजिटल एफएम की ओर बढ़ेगा भारत

नई दिल्ली: केंद्रीय मंत्री एल. मुरुगन ने कहा कि सरकार देश में रेडियो सेक्टर के विस्तार के लिए तैयार है। टियर-3 शहरों तक एफएम बढ़ाने और डिजिटल एचडी रेडियो अपनाने की दिशा में काम हो रहा है। उद्योग जगत भी इस बदलाव के पक्ष में है। आइए जानते हैं, डिजिटल एफएम पर केंद्रीय मंत्री ने क्या कुछ कहा।
देश में रेडियो क्षेत्र को मजबूत बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा संकेत दिया है। केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण राज्य मंत्री एल. मुरुगन ने कहा कि सरकार रेडियो सेक्टर के और विस्तार के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने बताया कि लाइसेंस देने से लेकर नई तकनीक अपनाने तक सरकार हर संभव सहयोग करेगी, ताकि रेडियो देश के दूर-दराज इलाकों तक पहुंचे।
नई दिल्ली में ब्रॉडकास्ट इंजीनियरिंग सोसाइटी एक्सपो के दौरान मुरुगन ने कहा कि सरकार टियर-3 शहरों तक एफएम रेडियो का विस्तार चाहती है। फिलहाल देश में 313 शहरों में 839 एफएम स्टेशन संचालित हो रहे हैं, जबकि 532 कम्युनिटी रेडियो स्टेशन तेजी से बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि रेडियो आज भी सूचना और मनोरंजन का सशक्त माध्यम है और इसे नई पीढ़ी तक पहुंचाना जरूरी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत का एफएम रेडियो इकोसिस्टम दशकों के सबसे बड़े बदलाव की ओर बढ़ रहा है। निजी एफएम ब्रॉडकास्टर्स और डिवाइस निर्माता एनालॉग से डिजिटल एफएम यानी एचडी रेडियो में बदलाव के लिए तैयार दिख रहे हैं। उद्योग जगत का कहना है कि यह तकनीक भरोसेमंद, व्यापक और भविष्य के लिए उपयुक्त है।
एक्सपो में हुई चर्चाओं के अनुसार, स्मार्टफोन, फीचर फोन, ब्लूटूथ स्पीकर और वाहनों में डिजिटल रेडियो रिसीवर जोड़ने की तैयारी है। हालांकि इसके लिए सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय से स्पष्ट नीति की जरूरत बताई गई है। नोएडा स्थित इलेक्ट्रॉनिक्स डिजाइन एंड टेस्टिंग सेंटर ने एचडी रेडियो से लैस स्टैंडअलोन रिसीवर और ब्लूटूथ स्पीकर भी विकसित किए हैं, जिनकी कीमत आम लोगों को ध्यान में रखकर तय की गई है।
उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि भारत में बड़ी संख्या में मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस बनने से डिजिटल रेडियो को तेजी से अपनाया जा सकता है। आंशिक स्तर पर भी इसे लागू किया गया, तो करोड़ों लोगों तक रेडियो पहुंच सकता है। इससे “हर जेब में रेडियो” का सपना एक बार फिर साकार हो सकता है।
निशा नारायणन ने कहा कि डिजिटल बदलाव लागत के लिहाज से किफायती होना चाहिए, ताकि मौजूदा ब्रॉडकास्टर्स सक्रिय रूप से जुड़ सकें और नए खिलाड़ियों के लिए भी प्रवेश आसान हो। वहीं इंडिया सेल्युलर एंड इलेक्ट्रॉनिक्स एसोसिएशन ने भी कहा कि साबित तकनीक, तैयार इकोसिस्टम और बाजार आधारित रणनीति अपनाना जरूरी है।

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