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Wednesday, September 23, 2026


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विदेश मंत्री जयशंकर की ईरानी-इस्राइली समकक्षों से फोन पर बात, पश्चिम एशिया क्षेत्र के हालात पर चर्चा की

नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बढ़े तनाव के बीच विदेश मंत्री एस जयशंकर ने ईरान और इस्राइल के विदेश मंत्रियों से अलग-अलग बातचीत कर भारत की ओर से गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने सभी पक्षों से संयम बरतने और तनाव कम करने के लिए संवाद व कूटनीति अपनाने पर जोर दिया।
ईरान में अमेरिका और इस्राइल के संयुक्त सैन्य हमले के बाद से क्षेत्र में भारी तनाव है। इसके मद्देनजर विदेश मंत्री एस जयशंकर ने शनिवार को ईरानी समकक्ष सैयद अब्बास अराघची और इस्राइल के समकक्ष गिदोन सार से अलग-अलग फोन पर बातचीत की। विदेश मंत्री ने कतर के प्रधानमंत्री और अपने समकक्ष शेख मोहम्मद बिन अब्दुल रहमान बिन जसीम अल थानी से भी बात की। जयशंकर ने अराघची से बातचीत में ईरान और पूरे क्षेत्र में हालिया घटनाक्रम को लेकर भारत की ओर से गहरी चिंता जताई। विदेश मंत्री ने सोशल मीडिया पर कहा, आज शाम ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची से टेलीफोन पर बातचीत हुई। ईरान और क्षेत्र में हालिया घटनाओं को लेकर भारत की गहरी चिंता साझा की।
इस्राइली विदेश मंत्री सार से बातचीत के बारे में जयशंकर ने कहा कि उन्होंने भारत का रुख दोहराया कि तनाव कम करने के लिए संवाद और कूटनीति की जरूरत है।
अमेरिका और इस्राइल के हमले के बाद ईरान ने जवाबी सैन्य कार्रवाई करते हुए कतर, संयुक्त अरब अमीरात, कुवैत, बहरीन और जॉर्डन समेत क्षेत्र के कई देशों में इस्राइली और अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया।
इससे पहले दोपहर में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तेहरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई का एलान करते हुए ईरान के लोगों से सरकार को ‘अपने हाथ में लेने’ की अपील की और कहा कि यह आपके पास ‘कई पीढ़ियों में शायद एकमात्र मौका’ होगा।
अमेरिका और इस्राइल के संयुक्त हमले ऐसे समय में हुए हैं, जब वॉशिंगटन और तेहरान के बीच ईरानी के परमाणु कार्यक्रम को लेकर कई हफ्तों तक चली बातचीत का कोई ठोस नतीजा नहीं निकल सका। ईरान के सरकारी मीडिया के मुताबिक, अमेरिका-इस्राइल हमलों में दक्षिणी ईरान के एक बालिका विद्यालय में 85 लोगों की मौत हो गई।
विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत ईरान और खाड़ी क्षेत्र में हालिया घटनाक्रम को लेकर बेहद चिंतित है। मंत्रालय ने कहा, हम सभी पक्षों से संयम बरतने, तनाव बढ़ाने से बचने और नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने की अपील करते हैं। बयान में कहा गया, तनाव कम करने और मूल मुद्दों के समाधान के लिए संवाद और कूटनीति को आगे बढ़ाया जाना चाहिए। सभी देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान किया जाना चाहिए।

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