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Tuesday, September 22, 2026


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शिक्षक भर्ती घोटालाः बंगाल सरकार को हाईकोर्ट से फटकार, एसपी सिन्हा को मिली सशर्त जमानत

कोलकाता। कलकत्ता हाईकोर्ट ने शिक्षक भर्ती घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में अभियोजन की मंजूरी देने में देरी पर पश्चिम बंगाल सरकार को फटकार लगाई है। अदालत ने पूर्व एसएससी सलाहकार एसपी सिन्हा को सशर्त जमानत देते हुए कहा कि राज्य की ढिलाई न्याय के उद्देश्य के खिलाफ है। पश्चिम बंगाल में शिक्षक भर्ती घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में कलकत्ता हाईकोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार को अभियोजन की स्वीकृति देने में हुई देरी पर कड़ी फटकार लगाई है। अदालत ने पूर्व स्कूल सेवा आयोग (एसएससी) सलाहकार एसपी सिन्हा को सशर्त जमानत दे दी।
जस्टिस जय सेनगुप्ता की एकल पीठ ने शुक्रवार को सुनवाई के दौरान कहा कि यदि अभियोजन स्वीकृति में राज्य की ओर से अनावश्यक विलंब होता रहा तो यह न्याय के उद्देश्य के प्रतिकूल होगा। अदालत ने सिन्हा को एक लाख रुपये के निजी मुचलके और समान राशि के दो जमानतदार प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। साथ ही उन्हें अपना पासपोर्ट विशेष पीएमएलए अदालत में जमा करने को कहा गया। अदालत ने कहा कि सहायक शिक्षक पदों पर नियुक्ति दिलाने के नाम पर अभ्यर्थियों से बड़ी रकम वसूले जाने के आरोप अत्यंत गंभीर हैं। आरोपों की प्रकृति चिटफंड मामलों से भी अधिक गंभीर प्रतीत होती है, क्योंकि यहां सार्वजनिक पद का दुरुपयोग कर अपराध किए जाने का आरोप है। सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी कहा कि हजारों नौकरियां रद्द हो चुकी हैं और लाखों अभ्यर्थियों को उचित अवसर से वंचित होना पड़ा है, जिससे यह मामला अत्यंत व्यापक और गंभीर हो जाता है।
अनियमितताओं के कारण स्कूल सेवा आयोग द्वारा की गई 25 हजार से अधिक शिक्षकों और कर्मचारियों की नियुक्तियां रद्द कर दी थीं। एसपी सिन्हा पिछले एक वर्ष आठ महीने से ईडी के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में न्यायिक हिरासत में थे। अदालत ने ट्रायल कोर्ट को निर्देश दिया कि मामले की सुनवाई अनावश्यक स्थगन दिए बिना शीघ्र पूरी की जाए। सिन्हा को इस मामले से जुड़े सीबीआई प्रकरण में पहले ही सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल चुकी है।
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने जमानत का विरोध करते हुए आरोप लगाया कि सिन्हा भर्ती घोटाले में सक्रिय रूप से शामिल थे और आपराधिक आय को अपने, अपनी पत्नी और एक करीबी सहयोगी के नाम संपत्तियां खरीदकर वैध बनाने का प्रयास किया। वहीं, बचाव पक्ष ने दलील दी कि 74 वर्षीय सिन्हा सेवानिवृत्त हैं, किसी प्रभावशाली पद पर नहीं हैं और अभियोजन स्वीकृति में देरी के लिए उन्हें जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।

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