23.3 C
Dehradun
Saturday, March 7, 2026


spot_img

राज्य कैबिनेट की बैठक में लिए गए महत्वपूर्ण निर्णय

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में हुई राज्य कैबिनेट की बैठक में महत्वपूर्ण फैसले लिए गए। उत्तराखंड में सार्वजनिक स्थानों पर जुआ खेलने और जुआघर चलाने वालों के खिलाफ अब सख्त कानूनी कार्रवाई होगी। उत्तराखंड सार्वजनिक द्यूत रोकथाम विधेयक में जुआ खेलने और खिलाने की गतिविधियों में संलिप्त दोषियों के लिए न्यूनतम तीन माह से लेकर अधिकतम पांच साल तक जेल और पांच हजार से 10 लाख रुपये तक जुर्माने का प्रावधान है। शुक्रवार को कैबिनेट ने इस पर मुहर लगा दी है। अब आगामी विधानसभा सत्र में उत्तराखंड सार्वजनिक द्यूत रोकथाम विधेयक-2026 को सदन पटल पर रखा जाएगा। इसके अलावा उत्तराखंड भाषा संस्थान अधिनियम में संशोधन कर नेपाली अकादमी को शामिल किया गया।
वर्तमान में राज्य में केंद्र सरकार का वर्ष 1867 का गैंबलिंग एक्ट लागू है। इस एक्ट में सार्वजनिक स्थानों पर जुआ खेलने और जुआ घर चलाने पर मामूली जुर्माने का प्रावधान है। वहीं सार्वजनिक द्यूत रोकथाम कानून लागू होने के बाद राज्य में जुआ खेलने और सट्टेबाजी पर सख्त कार्रवाई का प्रावधान किया गया है। इसके अनुसार, सड़क और गली में सार्वजनिक रूप से जुआ खेलने पर तीन माह का साधारण कारावास या पांच हजार रुपये जुर्माना या दोनों ही सजा हो सकती है। घर में बैठाकर जुआ खिलाने पर दो साल की जेल या दस हजार रुपये जुर्माना, जुआघर चलाने पर पांच साल की जेल या एक लाख रुपये जुर्माना या दोनों ही सजा एक साथ लागू होगी। सिंडीकेट की तरह सट्टेबाजी आदि जुए की गतिविधि चलाने पर न्यूनतम तीन से पांच साल तक जेल और 10 लाख रुपये तक जुर्माने का प्रावधान किया गया है।
उत्तराखंड भाषा संस्थान अधिनियम, 2018 में वर्तमान हिंदी, अंग्रेजी, उर्दू, पंजाबी भाषा शामिल थी। अब कैबिनेट ने उत्तराखंड भाषा संस्थान संशोधन विधेयक को मंजूरी दी है। इसमें उत्तराखंड नेपाली अकादमी को भी शामिल किया गया। इससे नेपाली साहित्य को बढ़ावा मिलेगा। इसके अलावा उत्तराखंड निजी विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक को मंजूरी दी गई है। इस संशोधन में नैनीताल जिले में तुलाज व शिवालिक विश्वविद्यालय नाम से निजी विश्वविद्यालय स्थापित किया जाएगा। उत्तराखंड अल्पसंख्यक आयोग (संशोधन) विधेयक 2026 को भी कैबिनेट ने मंजूरी दी है। संशोधन में आयोग के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष व सदस्यों का कार्यकाल पांच वर्ष से घटाकर तीन वर्ष किया गया। राज्य में अल्पसंख्यक मुस्लिम, जैन, ईसाई, बौद्ध, पारसी एवं सिख धर्मों के सांविधानिक अधिकारों के हितों की रक्षा एवं सामाजिक तथा आर्थिक विकास को गति देने के उद्देश्य से वर्ष 2002 में अल्पसंख्यक आयोग का गठन किया गया।
कार्मिक विभाग ने 22 मई 2020 को एक शासनादेश जारी कर नियम बनाया था कि यदि कोई भूतपूर्व सैनिक एक बार आरक्षण का लाभ लेकर सरकारी नौकरी पा लेता है, तो वह भविष्य में किसी अन्य सरकारी पद के लिए दोबारा आरक्षण का दावा नहीं कर सकता। इस पर हाईकोर्ट ने इस प्रावधान पर एक्ट बनाने के आदेश दिए थे। अब कैबिनेट ने शासनादेश की जगह आरक्षण लाभ के लिए अधिनियम बनाने का निर्णय लिया है।

spot_img

Related Articles

Latest Articles

ईरान पर होगा बड़ा हमला, ब्रिटिश ठिकानों पर अमेरिकी बी-2 स्टील्थ बमवर्षकों की तैनाती...

0
नई दिल्ली। अमेरिकी स्टील्थ बमवर्षक विमानों के ब्रिटेन के हवाई अड्डों पर पहुंचने की आशंका बढ़ गई है, ठीक उसी समय जब राष्ट्रपति डोनाल्ड...

यूपीएससी के 10 चमकते चेहरे, किसी ने MBBS की तो कोई है आईआईटीयन

0
नई दिल्ली। यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा 2025 का अंतिम परिणाम घोषित हो चुका है। राजस्थान के रावतभाटा के अनुज अग्निहोत्री ने इस परीक्षा में...

चुनाव से पहले भाजपा की ‘परिवर्तन यात्रा’ तेज, भ्रष्टाचार और कट-मनी के खिलाफ बदलाव...

0
नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी की 'परिवर्तन यात्रा' पूरे राज्य में तेजी से आगे बढ़ रही है।...

केन्द्रीय मंत्री अमित शाह शनिवार को हरिद्वार में ‘जन-जन की सरकार: चार साल बेमिसाल’...

0
देहरादून: केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह शनिवार, 7 मार्च 2026 को हरिद्वार में आयोजित कार्यक्रम ‘जन-जन की सरकार : चार साल बेमिसाल’...

नैनीताल की झीलों का होगा कायाकल्प, भीमताल-नौकुचियाताल और कमलताल विकास योजनाओं को मिली रफ्तार

0
देहरादून। उत्तराखंड के प्रमुख पर्यटन जनपद नैनीताल की झीलों को और अधिक आकर्षक और व्यवस्थित बनाने की दिशा में सरकार ने कदम तेज कर...