नई दिल्ली। केंद्रीय कैबिनेट ने आगामी आम चुनाव में नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लागू करने के लिए तीन संविधान संशोधन विधेयकों को मंजूरी दे दी है। इन बिलों को बजट सत्र की 16 से 18 अप्रैल को बुलाई गई बैठक में पारित कराया जाएगा। देश की राजनीति में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। केंद्र सरकार ने महिला आरक्षण कानून में बदलाव के मसौदे को मंजूरी दे दी है। इसके तहत लोकसभा की सीटें बढ़ाकर 816 करने और 33 प्रतिशत यानी 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित करने की तैयारी है। सरकार का लक्ष्य है कि यह व्यवस्था 2029 के आम चुनाव से लागू हो जाए।
सूत्रों के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई कैबिनेट की बैठक में कानून में संशोधन के लिए लाए गए मसौदा विधेयकों को मंजूरी दी गई। इस विधेयक को नारी शक्ति वंदन अधिनियम के नाम से जाना जाता है और आम तौर पर इसे महिला आरक्षण अधिनियम कहा जाता है। जिन तीन संविधान संशोधन विधेयकों को मंजूरी दी गई है, उनमें नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लागू करने के लिए जनगणना के बाद होने वाले परिसीमन से मुक्त कर दिया गया है। संसद का विस्तारित सत्र 16 से 18 अप्रैल तक बुलाया गया है, जिसमें इस बिल को पारित कराने की योजना है।
नए प्रस्ताव के तहत लोकसभा की सीटें 543 से बढ़ाकर 816 की जाएंगी। इनमें 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। इसके साथ ही अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए भी आरक्षण का प्रावधान रखा जाएगा। यह पूरा ढांचा महिलाओं को ज्यादा प्रतिनिधित्व देने के उद्देश्य से तैयार किया गया है।
2023 में महिला आरक्षण कानून पास हुआ था, लेकिन उसे लागू करने के लिए 2027 की जनगणना और उसके बाद परिसीमन जरूरी था। इस वजह से यह कानून 2034 तक टल सकता था। अब सरकार ने इसमें बदलाव कर 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन कराने का फैसला लिया है, जिससे लागू करने की प्रक्रिया तेज हो जाएगी।
यह व्यवस्था सिर्फ लोकसभा तक सीमित नहीं रहेगी। राज्यों की विधानसभाओं में भी इसी तरह सीटों का आरक्षण किया जाएगा। हर राज्य में उसकी आबादी के हिसाब से महिलाओं को सीटें दी जाएंगी। इससे राज्यों में भी महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी बढ़ेगी।
सरकार की योजना है कि यह कानून 31 मार्च 2029 से लागू हो जाए। इसके बाद होने वाले लोकसभा चुनाव और कुछ राज्यों के विधानसभा चुनावों में महिलाओं को आरक्षित सीटों का फायदा मिलेगा। इसमें ओडिशा, आंध्र प्रदेश, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश जैसे राज्य शामिल हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में कहा था कि यह मुद्दा महिलाओं के सशक्तिकरण से जुड़ा है और सभी दलों को इसे बिना राजनीति के समर्थन देना चाहिए। उन्होंने सभी पार्टियों से अपील की कि वे देश की माताओं और बहनों का भरोसा जीतने के लिए इस कानून का साथ दें।
महिला आरक्षण समेत तीन संशोधन बिलों को कैबिनेट की मंजूरी, बजट सत्र में पारित होंगे तीनों विधेयक
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