नई दिल्ली। राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण ने यमुना नदी में प्रदूषण को लेकर कई एजेंसियों को नोटिस जारी किए हैं। न्यायाधिकरण ने राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन, उत्तर प्रदेश सरकार तथा मथुरा वृंदावन नगर निगम और केंद्रीय तथा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों सहित स्थानीय प्राधिकरणों से जवाब मांगा है। यह मामला वृंदावन और कोसी कस्बों से कथित तौर पर अशोधित सीवेज और अपशिष्ट जल को नदी में बहाए जाने से संबंधित है।
न्यायाधिकरण के अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव की अध्यक्षता वाली पीठ दिसंबर 2021 के निर्देशों का पालन नहीं करने से संबंधित याचिका पर सुनवाई कर रही थी। इन निर्देशों में सीवेज शोधन प्रणालियों में सुधार करने, अतिक्रमण हटाने और नदी सुरक्षा के लिए वृक्षारोपण अभियान चलाने का आह्वान किया गया था।
याचिकाकर्ता ने न्यायाधिकरण को बताया कि क्षेत्र में यमुना के पानी की गुणवत्ता नहाने, पीने या घरेलू उपयोग के लिए अनुपयुक्त है। न्यायाधिकरण ने काफी समय तक अनुपालन न किए जाने के कारण सभी प्रतिवादियों को नोटिस जारी किए हैं। मामले की अगली सुनवाई 4 अगस्त को होगी।
















