नई दिल्ली। मणिपुर के इंफाल वेस्ट जिले में रविवार को बम विस्फोट हुआ है। यह धमाका राज्य में मैतेई और कुकी समुदायों के बीच जारी जातीय संघर्ष की तीसरी बरसी के दिन हुआ। अधिकारियों के मुताबिक, संदिग्ध उग्रवादियों ने इंफाल एयरपोर्ट के पास इस विस्फोट को अंजाम दिया। विस्फोट मालोम इलाके में सिंगजामेई थाने के अंतर्गत एक श्मशान घाट के पास हुआ, जो इंफाल एयरपोर्ट से एक किलोमीटर से भी कम दूरी पर स्थित है। राहत की बात यह रही कि इस घटना में न तो कोई व्यक्ति हताहत हुआ और न ही किसी संपत्ति को नुकसान पहुंचा।
घटनास्थल के पास ही टेरिटोरियल आर्मी का एक कैंप भी मौजूद है। विस्फोट के बाद पूरे इलाके को सुरक्षा घेरे में ले लिया गया है और स्थिति पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है। अधिकारियों ने बताया कि मामले की जांच शुरू कर दी गई है। प्रतिबंधित संगठन कांगलेइपाक कम्युनिस्ट पार्टी (केसीपी) ने इस धमाके की जिम्मेदारी ली है। संगठन ने बयान जारी कर कहा कि राज्य में लगातार हो रहे बंद, नाकेबंदी और शटडाउन के विरोध में यह विस्फोट किया गया।
मणिपुर के ट्रोंगलाओबी में पिछले महीने एक बम धमाके में मारे गए दो मासूम बच्चों का आखिरकार 25 दिन बाद अंतिम संस्कार कर दिया गया। सात अप्रैल की रात को मोइरांग के ट्रोंगलाओबी अवांग लेइकाई इलाके में एक घर पर उग्रवादियों ने बम फेंक दिया था। धमाके में वहां सो रहे पांच साल के एक बच्चे और उसकी छह महीने की बहन की मौत हो गई थी जबकि मां घायल हो गई थीं।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, परिजनों ने शनिवार को इंफाल के क्षेत्रीय चिकित्सा विज्ञान संस्थान (आरआईएमएस) से दोनों बच्चों के शव लिए और इसके बाद अंतिम यात्रा निकाली गई। इससे पहले स्थानीय लोगों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। बिष्णुपुर जिले के फौगाकचाओ इखाई के लामथाबोंग में गमगीन वातावरण के बीच अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी हुई। बता दें कि धमाके के दिन से ही दोनों शव आरआईएमएस के मुर्दाघर में रखे हुए थे। मणिपुर सरकार ने इस घटना की जांच एनआईए को सौंपी है लेकिन पीड़ित परिवार का आरोप है कि सरकार हमसे सच छिपा रही है। वह हत्यारों को जानती है, लेकिन पुलिस कुछ नहीं कर रही है। उन्होंने दावा किया कि जो कैदी जेल में बंद हैं, उन्हें हमारे बच्चों का हत्यारा बताया जा रहा है।
मणिपुर में वर्ष 2023 से जारी जातीय हिंसा में अब तक कम से कम 260 लोगों की मौत हो चुकी है और हजारों लोग बेघर हो गए हैं। यह हिंसा तीन मई 2023 को उस समय शुरू हुई थी, जब पहाड़ी जिलों में ‘ट्राइबल सॉलिडैरिटी मार्च’ निकाला गया था, जिसमें मैतेई समुदाय को अनुसूचित जनजाति का दर्जा देने की मांग का विरोध किया गया था।
राज्य की आबादी में मैतेई समुदाय की हिस्सेदारी करीब 53 प्रतिशत है, जो मुख्य रूप से इंफाल घाटी में रहते हैं, जबकि नागा और कुकी समेत आदिवासी समुदाय लगभग 40 प्रतिशत हैं और वे अधिकतर पहाड़ी इलाकों में निवास करते हैं। लगातार हिंसा के बाद नौ फरवरी को तत्कालीन मुख्यमंत्री बीरेन सिंह के इस्तीफे के पश्चात 13 फरवरी को राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू किया गया था। बाद में चार फरवरी को राष्ट्रपति शासन हटाते हुए भाजपा नेता वाई खेमचंद सिंह के नेतृत्व में नई सरकार का गठन किया गया।
इंफाल एयरपोर्ट के पास हुआ बम विस्फोट, जातीय हिंसा की तीसरी बरसी पर घटी घटना
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