नई दिल्ली। सरकार ने इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स मैन्युफैक्चरिंग स्कीम के तहत 31 और आवेदनों को मंजूरी दी है। करीब 7,900 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश का अनुमान है। इन मंजूरियों से 82,000 करोड़ रुपये मूल्य के इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स का उत्पादन और 9,500 से अधिक रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है। ये आवेदन 10 राज्यों से आए हैं, जिनमें तमिलनाडु से 7 तथा महाराष्ट्र और हरियाणा से 6-6 आवेदन शामिल हैं। इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने नई दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में आवेदकों को मंजूरी पत्र सौंपे। इन परियोजनाओं में एसीटिलीन ब्लैक, स्पीकर-माइक्रोफोन, ऑप्टिकल ट्रांसीवर, कैपेसिटर और कॉइल जैसे इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों का विनिर्माण शामिल है।
श्री वैष्णव ने बताया कि इन 31 मंजूरियों के साथ ईसीएमएस के तहत अब तक 106 कंपनियों के आवेदनों को मंजूरी मिल चुकी है। सरकार ने 59 हजार करोड़ रुपये के निवेश का लक्ष्य रखा था, जबकि अब यह 69 हजार करोड़ रुपये से अधिक हो गया है।
उन्होंने कहा कि ईसीएमएस के तहत इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स का अनुमानित उत्पादन 5 लाख करोड़ रुपये से अधिक और प्रत्यक्ष रोजगार 75,000 से अधिक लोगों को मिलने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि यह योजना केवल इलेक्ट्रॉनिकी असेंबली तक सीमित नहीं है, बल्कि जरूरी कंपोनेंट्स और कच्चे माल का देश में ही उत्पादन बढ़ाकर एक मजबूत स्वदेशी इलेक्ट्रॉनिक उद्योग तैयार कर रही है।
श्री वैष्णव ने बताया कि पिछले 12 वर्षों में देश का इलेक्ट्रॉनिक विनिर्माण सात गुना बढ़ा है और अब यह 13 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया है। इलेक्ट्रॉनिक निर्यात भी 11 गुना बढ़कर 4 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया है।
उन्होंने कहा कि नई मंजूरियां घरेलू आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने, आयात पर निर्भरता कम करने और उन्नत विनिर्माण क्षमता विकसित करने में मदद करेंगी, जिससे भारत के वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक विनिर्माण केंद्र के रूप में उभरने को और गति मिलेगी।
इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने कहा कि पिछले एक दशक में इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों का विनिर्माण सात गुना से अधिक बढ़ा है। कार्यक्रम में इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिव एस. कृष्णन भी उपस्थित थे।

















