नई दिल्ली। सरकार ने कहा है कि देश में घरेलू मांग को पूरा करने के लिए चीनी का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है, हालांकि इसका उत्पादन अनुमान से कम रहने की संभावना है। सरकार ने चीनी की कीमतों में हाल की बढ़ोतरी को देखते हुए पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने और कीमतें स्थिर रखने के लिए कई कदम उठाए हैं।
उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय ने कहा है कि वह स्थिति पर करीबी नजर रख रहा है। पिछले कुछ हफ्तों में चीनी की कीमत बढ़ी है। पिछले महीने की 20 तारीख को चीनी की कीमत 48 रुपये प्रति किलोग्राम थी, जो कल बढ़कर करीब 55 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई।
मंत्रालय ने कहा है कि चीनी की कीमतों में हाल की बढ़ोतरी को इथेनॉल उत्पादन के लिए चीनी के इस्तेमाल से जोड़ना सही नहीं है। मंत्रालय के अनुसार, इथेनॉल के लिए चीनी का उपयोग वर्ष 2022-23 में करीब 12% था, जो 2025-26 में घटकर करीब 9% रह गया है। देश में इथेनॉल का करीब तीन-चौथाई हिस्सा अब अनाज, खासकर मक्का से तैयार होता है।
मंत्रालय ने बताया कि चीनी की कीमतों में मौजूदा बढ़ोतरी के पीछे कई कारण हैं। इनमें घरेलू उत्पादन का अनुमान से कम रहना, त्योहारी सीजन से पहले मांग बढ़ना, मौसम के कारण गन्ने की फसल को नुकसान, वैश्विक स्तर पर चीनी की कम उपलब्धता तथा कुछ वर्गों द्वारा जमाखोरी और सट्टेबाजी शामिल हैं।
मंत्रालय ने बताया कि मौजूदा सीजन में चीनी का उत्पादन करीब 306 लाख टन रहने का अनुमान है, जबकि गन्ना उत्पादक राज्यों ने शुरुआत में करीब 343 लाख टन उत्पादन का अनुमान लगाया था। सरकार ने कहा कि कुछ चीनी मिलों और व्यापारियों द्वारा सट्टेबाजी और जमाखोरी से भी हाल में कीमतें बढ़ी हैं। देशभर में चीनी डीलरों के लिए एक अगस्त से 30 नवंबर तक अधिकतम 400 टन का स्टॉक रखने की सीमा तय की गई है। इसके अलावा, एक सितंबर से थोक उपभोक्ता 15 दिनों की खपत से अधिक चीनी का भंडार नहीं रख सकेंगे।
















