हरिद्वार। अगले वर्ष हरिद्वार में आयोजित होने वाले कुंभ मेले के सुव्यवस्थित आयोजन के लिए मेला प्रशासन द्वारा विभिन्न व्यवस्थाओं एवं अवस्थापना सुविधाओं को तेजी से विकसित करने की मुहिम शुरू कर दी गई है। पिछले अनुभवों के आधार पर कुंभ मेले के दौरान प्रमुख स्नान पर्वों पर श्रद्धालुओं की अत्यधिक भीड़ उमड़ने की संभावना को देखते हुए श्रद्धालुओं को नजदीकी घाटों पर सुविधाजनक एवं सुरक्षित स्नान की व्यवस्था उपलब्ध कराने के उद्देश्य से घाटों के रख-रखाव, सुधार एवं विस्तार पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। वर्तमान में हरिद्वार क्षेत्र में चार घाटों का निर्माण कराया जा रहा है। इनमें शहीद भगत सिंह घाट एवं नगर निगम घाट का निर्माण कार्य शुरू हो चुका है, जबकि अमरापुर घाट के डाउनस्ट्रीम में तथा साक्षी सतनाम घाट से ऋषिकुल बस अड्डे तक घाट का निर्माण कार्य एक सप्ताह के भीतर शुरू कराने की तैयारी है। इन सभी घाटों के निर्माण कार्य को आगामी 31 अक्टूबर तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
इसी सिलसिले में मेलाधिकारी सोनिका के निर्देश पर अपर मेलाधिकारी दयानन्द सरस्वती ने शुक्रवार को शहीद भगत सिंह घाट एवं नगर निगम घाट का स्थलीय निरीक्षण कर निर्माण कार्यों की प्रगति का जायजा लिया। इस अवसर पर अपर मेलाधिकारी ने कार्यदायी संस्था सिंचाई विभाग के अभियंताओं को निर्देशित किया कि घाटों के निर्माण कार्य में गुणवत्ता और समयबद्धता का विशेष ध्यान रखा जाए। अपर मेलाधिकारी ने स्नानार्थियों एवं क्षेत्र से गुजरने वाले लोगों की सुरक्षा के दृष्टिगत निर्माण सामग्री को सुव्यवस्थित ढंग से सुरक्षित स्थान पर रखने के निर्देश दिए। साथ ही उन्होंने घाट निर्माण से प्रभावित पेड़ों के क्षतिपूर्ति वृक्षारोपण के लिए वन विभाग से समन्वय स्थापित कर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा। उन्होंने घाटों पर स्नानार्थियों की सुरक्षा एवं सुगमता के लिए सभी आवश्यक प्रावधान सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए।
इस अवसर पर सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता अनुभव नौटियाल ने बताया कि शहीद भगत सिंह घाट के निर्माण कार्य की लंबाई 365 मीटर तथा नगर निगम घाट के निर्माण कार्य की लंबाई 270 मीटर है। उन्होंने बताया कि निर्माण कार्यों की गुणवत्ता एवं प्रगति की निगरानी तय नियमों एवं प्रक्रियाओं के अनुसार नियमित रूप से की जा रही है।
उन्होंने यह भी बताया कि घाट निर्माण से प्रभावित पेड़ों के पातन के लिए वन विभाग से नियमानुसार अनुमति प्राप्त की गई है। क्षतिपूर्ति वृक्षारोपण के तहत हटाए जाने वाले पेड़ों की संख्या से दस गुना अधिक वृक्षारोपण करने का प्रावधान किया गया है, जिसके लिए वन विभाग के साथ समन्वय कर आवश्यक कार्रवाई की जा रही है। शीघ्र ही वृक्षारोपण कार्य भी पूर्ण कर लिया जाएगा। उन्होंने बताया कि घाटों के वर्तमान में जलमग्न हिस्सों का निर्माण कार्य गंगनहर के क्लोजर के दौरान संपन्न कराया जाएगा। निरीक्षण के दौरान मेला कार्यालय के टेक्निकल सेल के अभियंता भी उपस्थित रहे।
अपर मेला अधिकारी ने कुंभ मेला की तैयारियों के तहत निर्माणाधीन घाटों का किया निरीक्षण
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