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Monday, August 31, 2026


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वायुसेना की बढ़ेगी ताकत: तेजस लड़ाकू विमानों के लिए 113 जेट इंजन खरीदेगा HAL, जीई एयरोस्पेस के साथ हुआ समझौत

नई दिल्ली: हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) ने अमेरिकी रक्षा कंपनी जीई एयरोस्पेस के साथ अपने तेजस हल्के लड़ाकू विमान (एलसीए) कार्यक्रम के लिए 113 जेट इंजनों की खरीद का बड़ा करार किया है।यह समझौता भारतीय उत्पादों के आयात पर अमेरिका में 50 प्रतिशत सीमा शुल्क लगाए जाने से दोनों देशों के संबंधों में आए तनाव के बीच हुआ है। इस करार के तहत एचएएल अपने स्वदेशी तेजस लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (एलसीए) कार्यक्रम के लिए 97 विमानों में लगाए जाने वाले 113 जेट इंजनों की खरीद करेगा।
अधिकारियों के अनुसार, एफ404-जीई-आईएन20 इंजन की आपूर्ति वर्ष 2027 से शुरू होगी और 2032 तक पूरी की जाएगी। इस सौदे के साथ भारत की स्वदेशी रक्षा उत्पादन क्षमता को एक और मजबूती मिलेगी। एचएएल ने बताया कि यह समझौता जनरल इलेक्ट्रिक कंपनी (जीई) के साथ इंजन और सपोर्ट पैकेज की खरीद के लिए किया गया है, जो तेजस एलसीए मार्क-1ए कार्यक्रम के निष्पादन में अहम भूमिका निभाएगा।
इससे पहले, रक्षा मंत्रालय ने सितंबर में 62,370 करोड़ रुपये के सौदे पर हस्ताक्षर किए थे, जिसके तहत भारतीय वायुसेना के लिए 97 तेजस एमके-1ए लड़ाकू विमान खरीदे जाएंगे। इन विमानों के इंजन अब जीई एयरोस्पेस से प्राप्त किए जाएंगे। एचएएल के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इस समझौते के बाद उत्पादन लाइन को तेज करने की तैयारी की जा रही है ताकि वायुसेना को निर्धारित समय सीमा में विमान सौंपे जा सकें।
उन्होंने कहा, तेजस एमके-1ए भारत की रक्षा तैयारियों का अहम हिस्सा है। यह विमान अत्याधुनिक एवियोनिक्स और हथियार प्रणालियों से लैस है, जो इसे किसी भी आधुनिक वायुसेना के बराबर खड़ा करता है। इस सौदे के पूरा होने के साथ भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि आने वाले वर्षों में वह रक्षा उपकरणों के क्षेत्र में आयातक से निर्यातक देश बनने की दिशा में तेज गति से बढ़ रहा है।
तेजस भारतीय वायुसेना के लिए एक स्वदेशी रूप से विकसित सिंगल-इंजन, मल्टी-रोल फाइटर जेट है। इसे उच्च खतरे वाले हवाई माहौल में संचालित करने की क्षमता के साथ डिजाइन किया गया है। यह विमान हवाई सुरक्षा, समुद्री निगरानी और सटीक हमले जैसे कई मिशनों को अंजाम देने में सक्षम है। रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यह सौदा भारत की ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल को नई गति देगा। इन इंजनों के निर्माण और रखरखाव में भारत की तकनीकी क्षमता और उत्पादन नेटवर्क को भी व्यापक लाभ मिलेगा।

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