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Wednesday, July 22, 2026


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आरजी कर मेडिकल केस में CBI की कार्रवाई जारी, अस्पताल के दो सुरक्षा गार्डों का हुआ पॉलीग्राफ टेस्ट

कोलकाता: पश्चिम बंगाल में आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में महिला डॉक्टर के साथ दरिंदगी के मामले में सीबीआई की कार्रवाई जारी है। सीबीआई ने मामले में जांच का दायरा बढ़ाते हुए अस्पताल के दो सुरक्षा गार्डों का पॉलीग्राफ टेस्ट किया है। सीबीआई के अधिकारियों के अनुसार कोलकाता बलात्कार और हत्या मामले के सिलसिले में कोलकाता के आरजी कर अस्पताल के दो सुरक्षा गार्डों का पॉलीग्राफ परीक्षण किया गया है।
बता दें कि इस मामले में सीबीआई जांच का दायरा लगातार बढ़ रहा है, पहले जहां आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल के पूर्व प्रिंसिपल संदीप घोष के साथ अन्य लोगों का पॉलीग्राफ टेस्ट किया गया था, वहीं इस मामले में सीबीआई ने एएसआई रैंक के पुलिस अधिकारी अनूप दत्ता का पॉलीग्राफ टेस्ट किया, अब सीबीआई ने आरजी कर अस्पताल के दो सुरक्षा गार्डों का पॉलीग्राफ टेस्ट किया है। सीबीआई ने गुरुवार को आरजी कर कॉलेज के पूर्व प्रिंसिपल संदीप घोष से लगातार 14वें दिन पूछताछ की है। पिछले 13 दिनों में उनसे केंद्रीय एजेंसी लगभग 130 घंटे पूछताछ कर चुकी है।
सीबीआई के अधिकारी शव मिलने के तुरंत बाद संदीप घोष के मोबाइल फोन से की गई फोन डिटेल का भी पता लगा रहे हैं। सीबीआई को पता चला है कि संदीप घोष ने सुबह छह बजे से नौ बजे तक कई सहकर्मियों और करीबियों को फोन किया था। अधिकारी जानकारी जुटा रहे हैं कि इस दौरान संदीप घोष ने किसे-किसे फोन किया और क्या बात हुई।
बता दें कि इस मामले की जांच में सीबीआई के लिए जो बात सबसे महत्वपूर्ण हो गई है वह है एक वीडियो, जो हाल ही में इंटरनेट मीडिया पर बहुप्रसारित हुआ है। इसमें कथित रूप से आरजी कर के पूर्व प्रिंसिपल संदीप घोष के करीबियों को नौ अगस्त की सुबह पीड़िता के शव बरामद होने के तुरंत बाद सेमिनार हाल में देखा गया था। लेकिन, इस वीडियो में पीड़िता का शव नहीं दिखाई दिया था। सूत्रों ने बताया कि कोलकाता पुलिस ने दावा किया है कि शव बरामद होने के बाद से सेमिनार हाल के बड़े हिस्से की घेराबंदी कर दी गई थी, लेकिन सीबीआई अधिकारी इस तर्क को नहीं मान रहे हैं। प्रोटोकाल के अनुसार, पूरा सेमिनार हाल अपराध से जुड़ा एक हिस्सा है। इसलिए इसके एक हिस्से को सील करने के बजाए पूरे हाल को सील किया जाना चाहिए था। और कमरे में अन्य लोगों के प्रवेश पर रोक लगानी चाहिए थी।
सीबीआई के जांच अधिकारी हाल ही में इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित हुए फर्जी पत्र की भी जांच कर रहे हैं। इसमें कथित केंद्रीय एजेंसी के अधिकारी मामले के कई पहलुओं पर टिप्पणी कर रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक फर्जी पत्र जानबूझकर गलत सूचना फैलाने और जांच प्रक्रिया के बारे में लोगों को गुमराह करने के लिए प्रसारित किए जा रहे हैं।

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