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Monday, August 24, 2026


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केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण के अध्यक्ष ने आईआईटी रुड़की की पम्प्ड स्टोरेज जलविद्युत पर रिपोर्ट जारी की

देहरादून। केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (सीईए) के चेयरपर्सन घनश्याम प्रसाद ने भारत के स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन में पंप्ड स्टोरेज हाइड्रोपावर (पीएसपी) की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया। चेयरपर्सन सीईए में पीएसपी पर विशेषज्ञों के एकत्रित समूह को संबोधित कर रहे थे, जहाँ आईआईटी रुड़की द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट “भारत में पंप्ड स्टोरेज हाइड्रोपावरः प्रगति, पहल, बाज़ार वृद्धि और चुनौतियाँ” जारी की गई। श्री प्रसाद ने कहा कि भारत नवीकरणीय ऊर्जा में अभूतपूर्व वृद्धि देख रहा है, जिसे केवल बड़े पैमाने पर ऊर्जा भंडारण की तैनाती, विशेष रूप से दीर्घ अवधि ऊर्जा भंडारण, के माध्यम से ही बनाए रखा जा सकता है। पीएसपी की दीर्घ अवधि ऊर्जा भंडारण क्षमताओं को रेखांकित करते हुए उन्होंने बताया कि यह भारत में एक सिद्ध दीर्घ अवधि ऊर्जा भंडारण प्रौद्योगिकी है, जिसमें उच्च स्तर का स्वदेशीकरण है और जो पीक घंटों के लिए तुलनात्मक रूप से प्रतिस्पर्धी लागत पर उपलब्ध है। उन्होंने आगे देश में पीएसपी के विकास को तेज करने के लिए भारत सरकार द्वारा उठाए गए विभिन्न कदमों का भी उल्लेख किया।
उन्होंने आईआईटी रुड़की की उस टीम को बधाई दी जिसका नेतृत्व जलविद्युत और पीएसपी के वैश्विक स्तर पर प्रसिद्ध विशेषज्ञ प्रोफेसर अरुण कुमार कर रहे हैं, जिन्होंने एक व्यापक रिपोर्ट तैयार की है। यह रिपोर्ट भारत और वैश्विक स्तर पर पीएसपी विकास की स्थिति की समीक्षा करती है, जिसमें प्रौद्योगिकी, नीतियाँ और विनियम, तथा पीएसपी के व्यावसायिक मॉडल शामिल हैं और देश में पीएसपी विकास को तेज करने के लिए सुझाव प्रदान करती है।
इस अवसर पर बोलते हुए, आईआईटी रुड़की के प्रोफेसर अरुण कुमार ने चेयरपर्सन सीईए का रिपोर्ट जारी करने के लिए सहर्ष सहमति देने तथा इसके समीक्षा में उनके अधिकारियों द्वारा दिए गए सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया। प्रोफेसर कुमार ने जोर दिया कि भारत को अपने विद्युत ग्रिड को कार्बन मुक्त बनाने के लिए पीएसपी के विकास को और तेज करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि भारत को पीएसपी प्रौद्योगिकियों के स्वदेशी विकास के लिए अनुसंधान और विकास में निवेश करना चाहिए। इस कार्यक्रम में सीईए के वरिष्ठ अधिकारी, उद्योग जगत के नेता, केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम, पीएसपी डेवलपर, प्रमुख परामर्श कंपनियाँ, वित्तीय संस्थान और प्रौद्योगिकी प्रदाता उपस्थित थे।

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