देहरादून। उत्तराखंड की राजनीति में बीते चार वर्षों का दौर केवल विकास योजनाओं तक सीमित नहीं रहा, बल्कि नीतिगत फैसलों के स्तर पर भी राज्य ने राष्ट्रीय पहचान बनाई है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार ने ऐसे कई निर्णय लिए, जिन्होंने न केवल प्रशासनिक व्यवस्था को सुदृढ़ किया बल्कि देश के सामने एक नया मॉडल भी प्रस्तुत किया।
सरकारी नौकरियों में नकल माफिया के कुचक्र को तोड़ने के लिए पुष्कर सिंह धामी सरकार ने फरवरी 2023 से उत्तराखंड प्रतियोगी परीक्षा (भर्ती में अनुचित साधनों की रोकथाम व निवारण के उपाय), कानून लागू कर प्रदेश और देश को एक मॉडल नकल विरोधी कानून दिया। इसके बाद से उत्तराखंड में भर्ती परीक्षाएं पारदर्शी तरीके से समय पर बिना बाधा के सम्पन्न हो रही हैं। पहले भर्तियों में औसतन दो से तीन साल का समय लग रहा था, अब औसतन एक साल में ही भर्ती प्रक्रिया पूरी हो जा रही है। इस कानून के तहत भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक, नकल कराने या अनुचित साधनों में संलिप्तता पाए जाने पर आजीवन कारावास की सजा का प्रावधान किया गया है। साथ में 10 करोड़ रुपये तक जुर्माना और दोषियों की संपत्ति जब्त करने का भी प्रावधान है। पारदर्शी भर्ती पक्रिया के चलते बीते चार साल में प्रदेश में 30 हजार से अधिक युवाओं का सरकारी नौकरी मिल चुकी है।
यूसीसी लागू करने वाला पहला राज्य
सरकार ने 27 जनवरी 2025 से उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता लागू कर दी है। इसी के साथ उत्तराखंड आजाद भारत में समान नागरिक संहिता लागू करने वाला पहला राज्य बन गया है। इसके बाद देश के कई राज्यों ने इस दिशा में पहल की है। धामी सरकार ने दंगा, हड़ताल, विरोध प्रदर्शन के दौरान सार्वजनिक और निजी सम्पत्ति को नुकसान पहुंचाने वाले उपद्रवी तत्वों पर लगाम कसने के लिए 2024 से ‘उत्तराखंड लोक एवं निजी सम्पत्ति क्षति वसूली कानून’ लागू कर दिया है। इस कानून के जरिए उत्तराखंड में विरोध प्रदर्शन के दौरान सार्वजनिक और निजी सम्पत्ति को नुकसान पहुंचाने वाले उपद्रवियों से नुकसान की भरपाई, बाजार भाव के हिसाब से किए जाने का प्रावधान है।
गैंगस्टर एक्ट को बनाया सख्त
धामी सरकार ने गैंगस्टर एक्ट में संशोधन करते हुए गोवध, मानव तस्करी, बाल श्रम, बंधुआ मजदूरी, नकल माफिया, मनी लॉन्ड्रिंग जैसे अपराधों को इसके दायरे में ला दिया है। इसी तरह जबरन धर्मांतरण के खिलाफ सख्त कानून बनाया गया है, जिसमें दोष सिद्ध होने पर 10 साल की गैर-जमानती सजा और 50 हजार रुपये तक जुर्माने का प्रावधान किया गया है।
उत्तराखंड आंदोलनकारी आरक्षण
राज्य सरकार ने उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारियों के लिए सरकारी नौकरियों में 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण को फिर लागू कर दिया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आंदोलनकारी आरक्षण पर जारी कानूनी उलझन को सुलझाकर वर्षों से लंबित इस विधेयक को नए सिरे से विधानसभा से पारित करवाया। यह कानून 11 अगस्त 2004 की तिथि से लागू किए जाने के फलस्वरूप विभिन्न राज्याधीन सेवाओं व पदों पर चयनित राज्य आंदोलनकारियों की गई नियुक्तियां वैध मानी जाएंगी।
साहसिक फैसलों से राष्ट्रीय फलक पर छाए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी
Latest Articles
लोक भवन में उल्लास और आत्मीयता के साथ मनाया गया रक्षाबंधन पर्व
देहरादून: रक्षाबंधन के पावन पर्व पर आज लोक भवन में प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय की बहनों ने राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि)...
मुख्यमंत्री धामी की बड़ी घोषणाः अब 60 वर्ष की आयु से महिलाओं को रोडवेज...
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेश में महिलाओं की सुविधा, सुरक्षा और गरिमा को ध्यान में रखते हुए आधुनिक सुविधाओं से युक्त हाईटेक...
खेल विश्वविद्यालय के लिए 94 पदों का सृजन, संचालन का रास्ता साफः खेल मंत्री...
देहरादून। हल्द्वानी के गौलापार में स्थापित किए जा रहे खेल विश्वविद्यालय के संचालन का रास्ता साफ हो गया है। राज्यपाल की स्वीकृति के बाद...
देवीधुरा में फलों-फूलों से बरसी बग्वाल, ऐतिहासिक पाषाण युद्ध के साक्षी बने लाखों श्रद्धालु
चंपावत/देहरादून। चम्पावत के विश्व प्रसिद्ध शक्तिपीठ माँ वाराही धाम देवीधुरा में शुक्रवार को ऐतिहासिक बग्वाल मेले का भव्य आयोजन हुआ। रक्षाबंधन के पावन अवसर...
सरकार ने प्याज़ की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए बफर स्टॉक से प्याज की...
नई दिल्ली। सरकार ने आने वाले महीनों में प्याज की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने और मौसमी कीमतों को कम करने के लिए बफर स्टॉक...
















