नई दिल्ली: वर्षों के इंतजार के बाद आखिरकार नए यमुना रेल ब्रिज का निर्माण कार्य पूरा कर लिया गया है। मुख्य जांच संरक्षा आयुक्त (सीआरएस) के निरीक्षण के बाद इस ब्रिज से ट्रेनों का संचालन शुरू कर दिया जाएगा। यह पुल 168 साल से यमुना के पुराने लोहे के पुल की जगह लेगा। इसके चालू होने से पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन से आनंद विहार के रास्ते गाजियाबाद के बीच रेल ट्रैफिक में सुधार होगा। यमुना में बाढ़ की स्थिति आने पर भी ट्रेनों का संचालन बाधित नहीं होगा। उत्तर रेलवे के अधिकारियों के अनुसार पुल का काम पूरा हो चुका है। सिग्नलिंग सिस्टम को भी पूरा कर लिया गया है। अब सिर्फ टेक्निकल और सीआरएस इंस्पेक्शन बाकी है। सीआरएस जल्द ही इस पुल का निरीक्षण करेंगे। उनसे एनओसी मिलते ही नए ब्रिज पर ट्रेनों का परिचालन शुरू कर दिया जाएगा।
रेलवे ने इस वित्तीय वर्ष से पहले इस ब्रिज को शुरू करने का लक्ष्य रखा है। नए ब्रिज से दिल्ली और गाजियाबाद के बीच रेल यातायात बेहतर होने के साथ ही भीड़ कम होगी और ट्रेनों की संख्या में भी इजाफा होगा। इसके अलावा दिल्ली से यूपी के रास्ते बिहार-बंगाल की तरफ जाने वाली ट्रेनों को और अधिक रफ्तार मिल जाएगी। पुराने पुल से नया पुल करीब 30 मीटर ऊंचा है।इस पुल में कुल 14 स्पैन हैं, जिसमें अलग-अलग तरह के गर्डर बने हैं। आने और जाने वाला ट्रैक अलग-अलग गर्डरों पर बना है। ब्रिज का निर्माण गाजियाबाद छोर पर 1180 मीटर और दिल्ली छोर पर 135 मीटर है। दोनों छोर पर रेल अंडर ब्रिज तैयार किया गया है। ब्रिज के निर्माण में कुल 6,900 मीट्रिक टन स्टील का उपयोग हुआ है। रेलवे अधिकारियों के अनुसार, 226.73 करोड़ की अनुमानित लागत है। शुरू में इसकी अनुमानित लागत 137 करोड़ रुपये थी।
दिल्ली से शाहदरा के रास्ते गाजियाबाद जाती हैं ट्रेनें पुराने लोहे के पुल से ट्रेनें पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन से शाहदरा के रास्ते गाजियाबाद जाती हैं। इस पुल पर रेल लाइन के नीचे सड़क मार्ग है। 1867 में अंग्रेजों ने इस पुल का निर्माण किया था। इसकी आयु (80 वर्ष) 1947 में ही पूरी हो चुकी है। इसके बावजूद दूसरा विकल्प नहीं होने के कारण अभी भी इस पुल से ट्रेनों की आवाजाही होती है। रेलवे की शब्दावली में ‘ब्रिज नंबर 249’ के नाम से पहचाना जाने वाला पुराना यमुना ब्रिज दिल्ली-गाजियाबाद सेगमेंट पर स्थित है।
नए यमुना रेल ब्रिज का पूरा हुआ निर्माण, लेगा अंग्रेजों के जमाने से खड़े लोहे के पुल की जगह
Latest Articles
सदियों पुराने व्यापारिक मार्ग लिपुलेख दर्रे से फिर होगा व्यापार शुरू
देहरादून। हिमालय की ऊंची चोटियों के बीच स्थित लिपुलेख दर्रा केवल एक व्यापारिक मार्ग नहीं, बल्कि इतिहास, आस्था और सभ्यताओं के संवाद का जीवंत...
अवैध निर्माणों पर एमडीडीए का शिकंजा, ऋषिकेश और देहरादून में दो भवन सील
देहरादून। मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) ने प्राधिकरण क्षेत्र में अवैध निर्माणों के खिलाफ अभियान को और तेज करते हुए ऋषिकेश और देहरादून में दो...
देवप्रयाग के पास कार अलकनंदा में समाई, 3 लोगों की मौत, 4 लापता
ऋषिकेश। ऋषिकेश-बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर देवप्रयाग के पास मंगलवार सुबह एक दर्दनाक सड़क हादसा हो गया। पर्यटकों से भरी एक कार अनियंत्रित होकर गहरी...
धामों में क्षमता के अनुरूप दर्शन व्यवस्था के लिए बनाई जाए एसओपी, भीड़ प्रबंधन...
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंगलवार को सचिवालय में चारधाम यात्रा व्यवस्थाओं की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक के दौरान अधिकारियों को निर्देश दिए कि...
नीति एक्सट्रीम अल्ट्रा रनः सीमांत नीति घाटी में साहस, समन्वय और विकास की नई...
देहरादून। उत्तराखंड के चमोली जनपद की दुर्गम, सुरम्य एवं सामरिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण नीति घाटी में आयोजित “नीति एक्सट्रीम अल्ट्रा रन 2026” का...
















