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Saturday, April 18, 2026


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दिल्ली सरकार का बड़ा फैसला, अलग-अलग इमरजेंसी नंबरों से छुटकारा; अब एक ही नंबर ‘112’ पर होगा हर समाधान

नई दिल्ली। दिल्ली में आपातकालीन सेवाओं को और अधिक प्रभावी, त्वरित और तकनीक सक्षम बनाने की दिशा में बड़ी पहल की जा रही है। अब दिल्ली में किसी भी प्रकार की आपदा या आपात स्थिति में अलग-अलग हेल्पलाइन नंबर डायल नहीं करने पड़ेंगे।
किसी भी तरह की आपात स्थिति में सिर्फ 112 डायल करने पर तेजी से मदद पहुंचेगी। इसकी शुरुआत इमरजेंसी रिस्पांस सपोर्ट सिस्टम (ईआरएसएस) 2.0 के तहत की गई है। इस पहल का उद्देश्य लोगों को संकट की घड़ी में अलग-अलग नंबर याद रखने की परेशानी से मुक्त करना और तेजी से सहायता उपलब्ध कराना है।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के अनुसार केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से 112 को राष्ट्रीय आपातकालीन नंबर घोषित किया गया है। इसी के मद्देनजर दिल्ली भी इसे लागू करने का काम करने जा रही है। उन्होंने बताया कि ईआरएसएस 2.0 एक आधुनिक यूनिफाइड सिग्नल हैंडलिंग सिस्टम है, जिसमें सभी इमरजेंसी काॅल, मोबाइल ऐप इमरजेंसी, पैनिक बटन, एसएमएस और वेब अलर्ट एक ही पब्लिक सेफ्टी आंसरिंग प्वाॅइंट (पीएसएपी) पर प्राप्त होंगे।
यहां से जिस भी तरह की इमरजेंसी होगी उसके आधार पर पुलिस, फायर, एम्बुलेंस और आपदा प्रबंधन सेवाओं को एक साथ अलर्ट किया जा सकेगा। इस प्रणाली में 112 पर सिर्फ काॅल ही नहीं, बल्कि मोबाइल ऐप, इमरजेंसी बटन, एसएमएस और ऑनलाइन माध्यम से भी सहायता मांगी जा सकती है यानी अगर कोई नागरिक आपात स्थिति में बोलने की स्थिति में नहीं है, तब भी वह आसानी से मदद का संकेत भेज सकता है।
दिल्ली सरकार के अधिकारी ने कहा कि ईआरएसएस 2.0 की सबसे बड़ी खासियत यह है कि काॅल या इमरजेंसी का पता चलते ही सिस्टम अपने आप काॅल करने वाले की लोकेशन पहचान लेगा। इससे पीड़ित व्यक्ति को यह समझाने की जरूरत नहीं पड़ती कि वह कहां है।
लोकेशन मिलते ही कंट्रोल रूम से सबसे नजदीकी पुलिस वैन, एम्बुलेंस या फायर ब्रिगेड को तुरंत रवाना कर दिया जाएगा, जिससे गोल्डन आवर (शुरुआती 60 मिनट) में समय की बचत होगी और मदद जल्दी पहुंचेगी। नई व्यवस्था में एक ही काॅल पर पुलिस, फायर और मेडिकल सेवाओं को एक साथ सूचना मिलेगी। इससे आपात स्थिति में होने वाली देरी काफी हद तक खत्म हो जाएगी।
ईआरएसएस 2.0 के तहत कंट्रोल रूम में एक आधुनिक डैशबोर्ड होगा, जहां यह देखा जा सकेगा कि घटना कहां हुई है, कौन-सी गाड़ी भेजी गई है और वह कितनी देर में पहुंचेगी। अगर कहीं देरी होती है तो तुरंत दूसरी गाड़ी भेजी जा सकती है। इससे पूरे आॅपरेशन पर लगातार निगरानी रहती है और जवाबदेही भी बढ़ती है। पूरी योजना को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। पहले चरण में सभी मौजूदा आपात नंबरों को 112 में समाहित किया जाएगा।

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