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Tuesday, February 10, 2026


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दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस वे: ढाई घंटे का सफर अब 45 मिनट में होगा पूरा |Postmanindia

दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस वे को एक अप्रैल से आम जनता के लिए खोल दिया गया है. एक्सप्रेस वे शुरू हो जाने से दिल्ली से मेरठ की दूरी अब 45 मिनट में तय होगी. वहीं गाजियाबाद से मेरठ जाने में केवल 25 मिनट का समय लगेगा. अभी तक सहारनपुर, देहरादून, उत्तराखंड जाने के लिए मोदी नगर, मुरादनगर जैसे जाम वाले रास्तों से होकर गुजरना पड़ता था. अब इस समस्या का सामना नहीं करना पड़ेगा. केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने ट्वीट करते हुए लिखा, “दिल्ली मेरठ एक्सप्रेस वे अब पूरा हो चुका है और यातायात के लिए खोल दिया गया है. हमने दिल्ली – मेरठ के बीच यात्रा के समय को 2.5 घंटे से घटाकर 45 मिनट करने के अपने वादे को पूरा किया है.

इस एक्सप्रेस वे को स्मार्ट एक्सप्रेस वे भी कहा जा रहा है. इसमें मौसम, यातायात और एक्सप्रेस वे से जुड़ी दूसरी जानकारियों के साथ दुर्घटना जैसी जानकारी भी अलग-अलग स्थानों पर प्रदान की जाएंगी. 8-10 किमी की दूरी पर एक्सप्रेस वे की हर लेन के ऊपर डिस्पले लगी होंगी, जिसमें गाड़ी की रफ्तार देखी जा सकेगी. डासना से मेरठ तक एक्सप्रेस वे में 72 कैमरे लगाए गए हैं.

ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रीडर

इसकी सबसे खास बात, ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रीडर है. इस तकनीक को पहली बार लागू  किया गया है. इसके माध्यम से रास्ते में बिना रुके ही टोल शुल्क का संचालन हो सकेगा और इसके साथ टोल प्लाजा पर जो टाइम, ईंधन और जाम लगता है उसमें कमी आएगी. इसके साथ डासना से मेरठ के बीच ग्रीन एक्सप्रेस वे बनाया जा रहा है जिसमें 50 हजार पेड़ लगाए गए हैं.

प्रवेश और निकास द्वार

जो लोग दिल्ली से मेरठ जाना चाहते हैं उनके लिए सरायं काले खां, अक्षरधाम मंदिर, इंदिरापुरम, डूंडाहेड़ा, डासना, ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस वे, भोजपुर, मेरठ पर प्रवेश द्वार है. वहीं जो लोग मेरठ से दिल्ली आ रहे हैं उनके लिए, डासना, डूंडाहेड़ा, नोएडा, सराय काले खां स्थानों पर निकास द्वार दिए गए हैं. इससे एक्सप्रेस वे पर यातायात का संचालन अच्छे से हो पायेगा.

वाहनों की अधिकतम रफ्तार 80 किमी प्रति घंटा

दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस वे पर भारी वाहनों की अधिकतम रफ्तार 80 किमी प्रति घंटा और कार की स्पीड 100 किमी प्रति घंटा रखी गई है. चढ़ते और उतरते समय जाम की स्थिति न बने इसके लिए एक्सप्रेस वे पर डासना में 5-5 लेन बनाई गई हैं.  दोनों तरफ 5-5 टोल बूथ बनाए गए हैं और हर बूथ के बीच 100 मीटर का अंतर रखा गया है.

150 मिनट का सफर अब केवल 45 मिनट में

राष्ट्रीय राजधानी में काम करने वाले एनसीआर के कई लोग गाजियाबाद और आसपास के पश्चिमी यूपी क्षेत्रों में रहना पसंद करते हैं. डासना और  मोदी नगर जैसे औद्योगिक क्षेत्रों की आबादी के कारण यहां भारी जाम का सामना करना पड़ता है. जाम के कारण ही पहले ये सफर ढाई घंटे का होता था, जो अब 45 मिनट का हो गया है. इसके कारण ही इसे पश्चिमी यूपी की लाइफलाइन कहा जा रहा है.

ये भी पढ़ें: हरिद्वार कुंभ के पहले दिन निर्मोही अखाड़े में अपर मेला अधिकारी से हाथापाई और मारपीट

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