25.2 C
Dehradun
Monday, March 30, 2026


spot_img

‘दीघा जगन्नाथ धाम’ विवाद बढ़ा, बंगाल में लकड़ी के इस्तेमाल की जांच करेगा पुरी मंदिर प्रशासन

भुवनेश्वर: पश्चिम बंगाल के दीघा में नए बने जगन्नाथ मंदिर को ‘जगन्नाथ धाम’ कहे जाने पर विवाद और गहरा गया है। इस बीच, पुरी के श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (एसजेटीए) ने जांच शुरू कर दी है कि क्या वाकई पुरी मंदिर की पवित्र लकड़ी का इस्तेमाल दीघा मंदिर की मूर्तियां बनाने में किया गया।
ओडिशा के कानून मंत्री पृथ्वीराज हरिचंदन ने बताया कि मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी, जो अभी मुंबई दौरे पर हैं, रविवार को लौटकर इस मुद्दे को पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के सामने उठाएंगे। उन्होंने कहा, ‘पुरी के लोग ‘जगन्नाथ धाम’ नाम के गलत इस्तेमाल को कभी स्वीकार नहीं करेंगे। ‘धाम’ शब्द का गहरा आध्यात्मिक मतलब है, इसे ऐसे ही कोई भी इस्तेमाल नहीं कर सकता।’
हालांकि, मंत्री ने यह भी कहा कि ओडिशा सरकार को देशभर में जगन्नाथ मंदिर बनाए जाने से कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन दीघा को ‘जगन्नाथ धाम’ कहना भक्तों को मंजूर नहीं है। उधर, ओडिशा की उपमुख्यमंत्री प्रवाती परिडा ने भी तीखा बयान दिया। उन्होंने ममता बनर्जी का नाम लिए बिना कहा, ‘जिन्होंने भगवान जगन्नाथ के नाम का गलत इस्तेमाल किया है, उन्होंने हमेशा भारी नुकसान उठाया है। अब फिर कोई नुकसान झेलेगा।’ पुरी से सांसद और बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा ने भी दीघा मंदिर के लिए ‘जगन्नाथ धाम’ नाम के इस्तेमाल का कड़ा विरोध किया। उन्होंने कहा, ‘दुनिया में सिर्फ एक ही जगन्नाथ धाम है और वो पुरी में है। चार धामों में पुरी का खास स्थान है, और इसे कोई और जगह नहीं कहला सकती।’
इधर, एसजेटीए के मुख्य प्रशासक अरविंद पड्ही ने जांच शुरू कर दी है कि क्या दीघा मंदिर में पुरी की पवित्र लकड़ी का इस्तेमाल हुआ है। यह विवाद तब बढ़ा जब पुरी के सेवक रामकृष्ण दासमहापात्रा ने एक बंगाली चैनल में कथित तौर पर कहा कि उन्होंने पुरी से लकड़ी लाकर दीघा में मूर्तियां बनाईं। लेकिन बाद में उन्होंने इस बात से इनकार करते हुए कहा कि मूर्तियां नीम की लकड़ी से पुरी में ही बनाई गई थीं और फिर दीघा ले जाई गईं।
एसजेटीए ने अब पुरी मंदिर के कई सेवक संगठनों से भी राय मांगी है। शनिवार को पड्ही ने मंदिर के मुख्य सेवकों से चर्चा की और सभी सेवक संगठनों को रविवार शाम 5 बजे तक अपनी राय देने का निर्देश दिया है। इसी बीच, दैतापति निजोग के सचिव रामकृष्ण दासमहापात्रा, जो दीघा मंदिर के उद्घाटन में शामिल हुए थे, उन्हें भी नोटिस भेजकर रविवार सुबह हाजिर होने को कहा गया है।
गजपति महाराज ने कहा, ‘हमारे शास्त्रों के अनुसार, जगन्नाथ धाम केवल पुरी में है। इस पवित्र नाम का किसी और जगह के लिए इस्तेमाल करना धार्मिक भ्रम फैलाएगा और हमारी परंपरा के खिलाफ है।’ बता दें कि, रामकृष्ण दासमहापात्रा के साथ करीब 56 और पुरी के सेवक दीघा मंदिर के कार्यक्रम में शामिल हुए थे, जिससे विवाद और बढ़ गया है।

spot_img

Related Articles

Latest Articles

अमित शाह का बड़ा एलान: असम में लागू होगा UCC, घुसपैठियों को करेंगे बाहर

0
नई दिल्ली। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रविवार को असम के ढेकियाजुली और तिहु में चुनावी रैलियों को संबोधित करते हुए राज्य की...

नशामुक्ति और पुनर्वास संबंधी राष्ट्रीय परामर्श समिति की 5वीं बैठक आयोजित

0
नई दिल्ली।  सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री डॉ. वीरेंद्र कुमार ने नई दिल्ली में नशामुक्ति और पुनर्वास संबंधी राष्ट्रीय परामर्श समिति की 5वीं बैठक...

‘नई विदेशी मुद्रा सीमा के पालन को मिले तीन महीने का समय’, बैंकों ने...

0
नई दिल्ली। बैंकों ने आरबीआई से नई विदेशी मुद्रा सीमा का पालन करने के लिए तीन महीने का समय देने का आग्रह किया है।...

भारत विश्व गुरु की राह परः दून में नीति, तकनीक और जनभागीदारी पर मंथन

0
देहरादून। सर्वे चौक स्थित ऑडिटोरियम में दून पुस्तकालय एवं शोध केंद्र, चिंतन रिसर्च फाउंडेशन तथा भारतीय लोक प्रशासन संस्थान के तत्वावधान में “भारतः विश्व...

लाल आतंक का अंत: एक दशक में दस हजार से ज्यादा माओवादियों ने किया...

0
नई दिल्ली। सुरक्षा दबाव और पुनर्वास प्रयासों के संयोजन ने देश के सबसे लंबे समय तक चलने वाले विद्रोहों में से एक माओवाद को...