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Friday, February 20, 2026


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फिर बहाल हुईं लंदन के लिए उड़ान सेवाएं, तकनीकी खराबी के कारण आया था अस्थायी व्यवधान

लंदन: लंदन के लिए उड़ान सेवाएं बुधवार दोपहर को फिर से बहाल हो गईं हैं। एक प्रमुख एयर ट्रैफिक कंट्रोल (एटीसी) केंद्र में तकनीकी खराबी के कारण अधिकारियों को अस्थायी रूप से ब्रिटेन की राजधानी में उड़ानों की संख्या सीमित करनी पड़ी थी।
ब्रिटेन का सबसे बड़ा और यूरोप का सबसे व्यस्त एयरपोर्ट हीथ्रो भी इस तकनी गड़बड़ी से प्रभावित हुआ था, जहां विमानों के उड़ान भरने (टेकऑफ) और उतरने (लैंडिंग) दोनों में बाधा आई। लंदन के गेटविक एयरपोर्ट ने बताया कि कुछ समय के लिए वहां से कोई उड़ान रवाना नहीं हुई। वहीं, छोटे सिटी एयरपोर्ट को भी बाधा का सामना करना पड़ा।
एयर ट्रैफिक कंट्रोल की एक बड़ी सुविधा नैट्स स्वॉनविक साइट ने बताया कि उसके इंजीनियरों ने दोपहर के समय गड़बड़ी को ठीक कर लिया और अब लंदन क्षेत्र में सामान्य परिचालन बहाल करने की प्रक्रिया में हैं। नैट्स ने बताया, हम एयरलाइंस और एयरपोर्ट ग्राहकों के साथ मिलकर व्यवधान को कम करने के लिए लगातार काम कर रहे हैं।
हीथ्रो एयरपोर्ट के प्रवक्ता ने बताया कि एयरपोर्ट से आने-जाने वाली उड़ानें फिर से शुरू हो चुकी हैं। गेटविक ने भी कहा कि वहां उड़ानें दोबारा शुरू हो गई हैं।
इससे पहले इस साल मार्च में हीथ्रो एयरपोर्ट पर एक दिन का पूरा व्यवधान आया था, जब एक सब स्टेशन में आगे लगने के कारण एयरपोर्ट की बिजली आपूर्ति बाधित हो गई थी। बुधवार को आई इस तकनीकी खराबी का असर कई जगहों तक देखने को मिला, क्योंकि मैनचेस्टर और बर्मिंघम जैसे उत्तरी शहरों के एयरपोर्ट ने ने भी उड़ानों रोकने की जानकारी दी थी।
दो साल पहले भी एयर ट्रैफिक कंट्रोल सिस्टम में आई गड़बड़ी के चलते ब्रिटेन के एयरस्पेस को बंद करना पड़ा था। उस समय भी समस्या कुछ घंटों में ठीक कर दी गई थी, लेकिन देशभर में उड़ानों के आगमन और प्रस्थान में भारी व्यवधान हुआ था। स्वॉनविक ऑपरेशंस रूम, इंग्लैंड और वेल्स के ऊपर की हवाई सीमा को स्कॉटलैंड की सीमा तक नियंत्रित करता है। यह लंदन के एयरपोर्ट पर कम ऊंचाई पर आने-जाने वाली उड़ानों की निगरानी भी करता है। यह केंद्र 2002 में शुरू किया गया था, जिसमें लॉकहीड मार्टिन कॉर्पोरेशन प्रमुख ठेकेदार थी। इसे नैट्स को 30 प्रतिशत अधिक क्षमता देने के उद्देश्य से बनाया गया था, ताकि यह 2020 तक सालाना 30 लाख उड़ानों को संभाल सके, जबकि जब यह शुरू हुआ था तब यह आंकड़ा करीब 20 लाख था।

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