नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव खतरनाक मोड़ पर पहुंचता दिख रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने दो टूक कहा है कि ईरान को सार्थक समझौता करना होगा, अन्यथा उसे बहुत बुरे परिणाम भुगतने पड़ेंगे। यह चेतावनी स्विट्जरलैंड के जिनेवा में हुई उच्चस्तरीय परमाणु वार्ता के बाद आई, जहां अपेक्षित प्रगति नहीं हो सकी। ईरान ने अमेरिकी चिंताओं पर एक लिखित प्रस्ताव भेजने पर सहमति जताई है, जबकि वॉशिंगटन उसके इंतजार में है।
समुद्र में शक्ति प्रदर्शनमध्य-पूर्व और आसपास के जलक्षेत्र में अमेरिकी सैन्य मौजूदगी तेजी से बढ़ी है। क्षेत्र में तीन विमानवाहक पोत—यूएसएस अब्राहम लिंकन, यूएसएस जेराल्ड आर. फोर्ड और एक अन्य स्ट्राइक ग्रुप—तैनात बताए जा रहे हैं। अब्राहम लिंकन के साथ कई विध्वंसक पोत हैं, जिन पर टामहाक क्रूज मिसाइलें तैनात हैं। कुल मिलाकर 13 विध्वंसक पोत क्षेत्र में मौजूद या मार्ग में बताए गए हैं। ये बैलिस्टिक मिसाइल रक्षा और सटीक हमलों में सक्षम हैं।
हवा से दबाव: एफ-35 से ड्रोन तकजार्डन के मुवाफ्फक साल्ती एयर बेस और खाड़ी क्षेत्र के अन्य ठिकानों पर एफ-35, एफ/ए-18 सहित आधुनिक लड़ाकू विमान तैनात किए गए हैं। उपग्रह तस्वीरों और फ्लाइट ट्रैकिंग डाटा के अनुसार, यहां कम से कम 30 लड़ाकू विमान, चार इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर जेट और पांच एमक्यू-9 रीपर ड्रोन सक्रिय हैं।
ईंधन भरने वाले केसी-135 टैंकर, टोही विमान और कमान-नियंत्रण प्लेटफॉर्म भी पहुंच चुके हैं, जिनसे लंबी अवधि के हवाई अभियान की क्षमता बढ़ती है। यूरोप स्थित ठिकानों पर अतिरिक्त टैंकर और कार्गो विमान भी तैनात किए गए हैं ताकि आपूर्ति श्रृंखला बनी रहे।
पेंटागन ने पैट्रियट और थॉड वायु रक्षा प्रणालियां भी क्षेत्र में भेजी हैं। अनुमान है कि 30 से 40 हजार अमेरिकी सैनिक मध्य-पूर्व में तैनात हैं। हिंद महासागर के डियागो गार्सिया अड्डे पर बी-2 स्टील्थ बमवर्षक समेत लंबी दूरी के बमवर्षक हाई अलर्ट पर रखे गए हैं।
व्हाइट हाउस का कहना है कि कुछ प्रगति हुई है, पर कई मुद्दों पर दूरी बनी हुई है। विकल्पों में सीमित हवाई हमलों से लेकर परमाणु और मिसाइल ठिकानों पर लंबा अभियान शामिल बताया जा रहा है। उधर, रूस ने संयम की अपील की है। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने कहा कि समस्याओं का समाधान राजनीतिक और कूटनीतिक माध्यमों से होना चाहिए। उधर, ईरान ने ओमान की खाड़ी में रूस के साथ सैन्य अभ्यास भी किया है। रूस ने स्टेरेगुशिय क्लास का रूसी पोत ईरान के बंदर अब्बास में तैनात किया है। चीन ने भी पूर्व में ईरान के साथ ‘सिक्योरिटी बेल्ट’ ड्रिल में हिस्सा लिया था, लेकिन इस बार उसकी तरफ से ऐसी कोई घोषणा नहीं की गई है।
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो अगले सप्ताह इजरायल जाकर प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से मुलाकात करेंगे। माना जा रहा है कि ईरान पर बढ़ते दबाव में इजरायल की भूमिका भी अहम हो सकती है।
ईरान पर कभी भी हो सकता है अमेरिका का हमला, ट्रंप ने फिर दी चेतावनी
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