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Saturday, April 25, 2026


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ओडिशा के पूर्व सीएम नवीन पटनायक की हालात स्थिर

भुवनेश्वर: लगातार 24 साल तक ओडिशा के मुख्यमंत्री रहने वाले और मौजूदा समय में राज्य में विपक्ष के नेता नवीन पटनायक को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। वे शनिवार शाम से बेहतर महसूस नहीं कर रहे थे। वहीं ताजा जानकारी के अनुसार उनकी तबीयत अब स्थिर है और डॉक्टर लगातार उनकी देखरेख कर रहे हैं।
ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री और बीजू जनता दल (बीजेडी) के अध्यक्ष नवीन पटनायक रविवार शाम को तबीयत बिगड़ने के कारण अस्पताल में भर्ती हुए। उन्हें भुवनेश्वर के एसयूएम अल्टीमेट मेडिकेयर अस्पताल में दाखिल कराया गया। डॉक्टरों के मुताबिक उन्हें डिहाइड्रेशन (शरीर में पानी की कमी) की समस्या हुई थी। फिलहाल उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है।
पार्टी नेताओं के अनुसार, 78 वर्षीय पूर्व मुख्यमंत्री ने शनिवार रात बेचैनी और अस्वस्थता की शिकायत की थी। इसके बाद कुछ डॉक्टरों ने उनके निवास नवीन निवास जाकर जांच की। स्वास्थ्य में सुधार न होने पर रविवार को उन्हें अस्पताल लाया गया था।
जैसे ही यह खबर सामने आई, राज्य के कई बड़े नेता उन्हें देखने अस्पताल पहुंचे। ओडिशा के मंत्री मुकेश माहलिंग और पृथ्वीराज हरिचंदन, साथ ही बीजेपी नेता बाबू सिंह ने अस्पताल जाकर उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली। इससे पहले भुवनेश्वर की मेयर और बीजद नेता सुलोचना दास भी अस्पताल पहुंची थीं।
नवीन पटनायक ने पिछले महीने मुंबई के एक अस्पताल में गर्दन की हड्डी (सर्वाइकल आर्थराइटिस) की सर्जरी करवाई थी। बता दें कि वे 20 जून को मुंबई गए थे। 22 जून को उनकी रीढ़ की हड्डी से जुड़ी सर्जरी की गई थी। इसके बाद 7 जुलाई को उन्हें अस्पताल से छुट्टी मिली और 12 जुलाई को वे भुवनेश्वर लौट आए थे।
गौरतलब है कि 12 अगस्त को नवीन पटनायक ने ओडिशा सरकार और बीजेपी पर बेटियों की सुरक्षा को लेकर कड़ा हमला बोला था। उन्होंने यह बयान उस समय दिया था जब बरगढ़ जिले की 13 वर्षीय एक लड़की ने खुद को आग लगाकर जान देने की कोशिश की थी और 11 अगस्त को उसकी मौत हो गई थी। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा था कि ‘यह बेहद दुखद और चौंकाने वाली बात है कि एक और बेटी ने खुद को जला लिया। मेरी संवेदनाएं परिवार के साथ हैं। भगवान उन्हें इस अपूरणीय क्षति को सहने की शक्ति दें।’
पूर्व मुख्यमंत्री ने चिंता जताई थी कि केवल एक महीने में चार लड़कियां इसी तरह की घटनाओं में अपनी जान गंवा चुकी हैं। उन्होंने लिखा था कि यह ‘कोई इक्का-दुक्का मामले नहीं हैं, बल्कि बेटियों के दर्दनाक हालात की झलक हैं।’ उनका कहना था कि राज्य का प्रशासन बेटियों में सुरक्षा और विश्वास पैदा करने में नाकाम हो रहा है। पूर्व सीएम ने सरकार से सवाल किया कि आखिर कब ऐसा माहौल बनेगा, जिसमें बेटियां खुद को सुरक्षित, मूल्यवान और सुनी हुई महसूस करें।

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