25.2 C
Dehradun
Monday, August 24, 2026


spot_img

खड़ी पहाड़ी पर भी चढ़ जाएगा ‘जोरावर’ टैंक, सेना में शामिल होने से पहले रचा अद्भुत कीर्तिमान

हजीरा। भारत की सैन्य क्षमता लगातार मजबूत हो रही है। इसी सिलसिले में दो वर्ष के रिकॉर्ड समय में स्वदेशी हल्के टैंक को बनाया गया है जो खड़ी पहाड़ी पर आसानी से चढ़ सकता है। चीन के साथ सीमा विवाद के बीच विकसित यह टैंक रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता के पथ पर बढ़ते भारत की शक्ति का प्रमाण है। इस टैंक के सेना में शामिल होने के बाद पूर्वी लद्दाख के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में भारत की ताकत और बढ़ेगी।
गलवन में चीन से झड़प के बाद तनाव के बीच लद्दाख सीमा पर इस टैंक की जरूरत महसूस हो रही थी। इस टैंक का नाम जोरावर रखा गया है। शनिवार को इस टैंक की झलक दिखी। पहली बार किसी टैंक को इतने कम समय में डिजाइन कर परीक्षण के लिए तैयार किया गया है। इसका नाम डोगरा राजवंश के जनरल जोरावर सिंह के नाम पर रखा गया है। जनरल जोरावर ने पश्चिमी तिब्बत में सैन्य अभियानों का नेतृत्व किया था।
रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) और प्राइवेट कंपनी लार्सन एंड टूब्रो (एलएंडटी) ने इस टैंक को विकसित किया है। इसका परीक्षण अंतिम चरण में है। डीआरडीओ के प्रमुख डॉ. समीर वी. कामत ने शनिवार को गुजरात के हजीरा स्थित एलएंडटी संयंत्र में परियोजना की प्रगति की समीक्षा की। डॉ. कामत ने कहा कि वर्ष 2027 में इस टैंक को सेना में शामिल किया जा सकता है। सशस्त्र बल में जोरावर को शामिल करने के बाद 59 टैंक शुरू में सेना को दिए जाएंगे। वायुसेना के सी-17 श्रेणी के परिवहन विमान में एक बार में दो टैंकों की आपूर्ति कर सकती है क्योंकि यह टैंक हल्का है और इसे पहाड़ी घाटियों में उच्च गति से चलाया जा सकता है।
डीआरडीओ स्वदेशी रूप से गोला-बारूद विकसित करने के लिए भी तैयार है। रूस और यूक्रेन संघर्ष से सबक सीखते हुए डीआरडीओ और एलएंडटी ने टैंक में घूमने वाले हथियारों के लिए यूएसवी को इंटीग्रेट किया है। डीआरडीओ प्रमुख ने बताया कि दो से ढाई साल में हमने न केवल इस टैंक को डिजाइन किया है, बल्कि इसका पहला प्रोटोटाइप भी बनाया है। अगले छह महीनों में पहले प्रोटोटाइप का विकास परीक्षण किया जाएगा।
जोरावर को सभी परीक्षणों के बाद वर्ष 2027 तक भारतीय सेना में शामिल किए जाने की उम्मीद है। इस अवसर पर बोलते हुए एलएंडटी के कार्यकारी उपाध्यक्ष अरुण रामचंदानी ने कहा कि यह डीआरडीओ और एलएंडटी का संयुक्त प्रयास है। दुनिया में कहीं भी इतने कम समय में कोई नया प्रोडक्ट तैनात नहीं किया गया है। यह डीआरडीओ और एलएंडटी दोनों के लिए एक अद्भुत उपलब्धि है।
डीआरडीओ टैंक लैब के निदेशक राजेश कुमार ने कहा कि आम तौर पर तीन प्रकार के टैंक होते हैं। वजन के आधार पर तीन श्रेणियां होती हैं। भारी टैंक, मध्यम टैंक और हल्के टैंक। हर एक की अपनी भूमिका है। एक सुरक्षा के लिए है, दूसरा आक्रमण के लिए है, लेकिन हल्के टैंक सुरक्षा के साथ आक्रामक भूमिका भी निभाते हैं। इसलिए कई देश हल्के टैंक बना रहे हैं।

spot_img

Related Articles

Latest Articles

ब्रिक्स खेल मंत्रियों की बैठक में संयुक्त घोषणा पत्र सर्वसम्मति से स्वीकार

0
नई दिल्ली।  ब्रिक्‍स खेल मंत्रियों की बैठक का समापन आज आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम में हो गया। इसमें ब्रिक्‍स खेल संयुक्‍त घोषणा पत्र सर्वसम्‍मति...

नाथूला दर्रे के रास्ते कैलाश मानसरोवर यात्रा संपन्न, 464 श्रद्धालु हुए शामिल

0
नई दिल्ली। सिक्क्मि के नाथूला दर्रे के रास्‍ते से होने वाली कैलाश मानसरोवर यात्रा आज संपन्‍न हो गई। इसके माध्‍यम से 464 तीर्थ यात्रियों...

प्रधानमंत्री मोदी ने निजी अंतरिक्ष क्षेत्र से नवाचार की वैश्विक छवि बनाने का आग्रह...

0
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज कहा कि अंतरिक्ष क्षेत्र के स्टार्टअप्स ने सरकार में अपना विश्वास व्यक्त किया है। उन्होंने अंतरिक्ष क्षेत्र...

आईसीएआर महानिदेशक ने मृदा डेटाबेस को कृषि विकास के लिए महत्वपूर्ण आधार बताया

0
नई दिल्ली। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद-आईसीएआर के महानिदेशक डॉ. एम. एल. जाट ने कहा कि राष्ट्रीय मृदा सर्वेक्षण और भूमि उपयोग नियोजन ब्यूरो द्वारा...

गृह मंत्री अमित शाह राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति सम्मेलन में भाग लेंगे

0
नई दिल्ली।  केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह कल नई दिल्ली में आयोजित होने वाले नौवें राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति सम्मेलन में भाग लेंगे। दो दिवसीय यह...