30.2 C
Dehradun
Thursday, April 30, 2026


spot_img

खड़ी पहाड़ी पर भी चढ़ जाएगा ‘जोरावर’ टैंक, सेना में शामिल होने से पहले रचा अद्भुत कीर्तिमान

हजीरा। भारत की सैन्य क्षमता लगातार मजबूत हो रही है। इसी सिलसिले में दो वर्ष के रिकॉर्ड समय में स्वदेशी हल्के टैंक को बनाया गया है जो खड़ी पहाड़ी पर आसानी से चढ़ सकता है। चीन के साथ सीमा विवाद के बीच विकसित यह टैंक रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता के पथ पर बढ़ते भारत की शक्ति का प्रमाण है। इस टैंक के सेना में शामिल होने के बाद पूर्वी लद्दाख के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में भारत की ताकत और बढ़ेगी।
गलवन में चीन से झड़प के बाद तनाव के बीच लद्दाख सीमा पर इस टैंक की जरूरत महसूस हो रही थी। इस टैंक का नाम जोरावर रखा गया है। शनिवार को इस टैंक की झलक दिखी। पहली बार किसी टैंक को इतने कम समय में डिजाइन कर परीक्षण के लिए तैयार किया गया है। इसका नाम डोगरा राजवंश के जनरल जोरावर सिंह के नाम पर रखा गया है। जनरल जोरावर ने पश्चिमी तिब्बत में सैन्य अभियानों का नेतृत्व किया था।
रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) और प्राइवेट कंपनी लार्सन एंड टूब्रो (एलएंडटी) ने इस टैंक को विकसित किया है। इसका परीक्षण अंतिम चरण में है। डीआरडीओ के प्रमुख डॉ. समीर वी. कामत ने शनिवार को गुजरात के हजीरा स्थित एलएंडटी संयंत्र में परियोजना की प्रगति की समीक्षा की। डॉ. कामत ने कहा कि वर्ष 2027 में इस टैंक को सेना में शामिल किया जा सकता है। सशस्त्र बल में जोरावर को शामिल करने के बाद 59 टैंक शुरू में सेना को दिए जाएंगे। वायुसेना के सी-17 श्रेणी के परिवहन विमान में एक बार में दो टैंकों की आपूर्ति कर सकती है क्योंकि यह टैंक हल्का है और इसे पहाड़ी घाटियों में उच्च गति से चलाया जा सकता है।
डीआरडीओ स्वदेशी रूप से गोला-बारूद विकसित करने के लिए भी तैयार है। रूस और यूक्रेन संघर्ष से सबक सीखते हुए डीआरडीओ और एलएंडटी ने टैंक में घूमने वाले हथियारों के लिए यूएसवी को इंटीग्रेट किया है। डीआरडीओ प्रमुख ने बताया कि दो से ढाई साल में हमने न केवल इस टैंक को डिजाइन किया है, बल्कि इसका पहला प्रोटोटाइप भी बनाया है। अगले छह महीनों में पहले प्रोटोटाइप का विकास परीक्षण किया जाएगा।
जोरावर को सभी परीक्षणों के बाद वर्ष 2027 तक भारतीय सेना में शामिल किए जाने की उम्मीद है। इस अवसर पर बोलते हुए एलएंडटी के कार्यकारी उपाध्यक्ष अरुण रामचंदानी ने कहा कि यह डीआरडीओ और एलएंडटी का संयुक्त प्रयास है। दुनिया में कहीं भी इतने कम समय में कोई नया प्रोडक्ट तैनात नहीं किया गया है। यह डीआरडीओ और एलएंडटी दोनों के लिए एक अद्भुत उपलब्धि है।
डीआरडीओ टैंक लैब के निदेशक राजेश कुमार ने कहा कि आम तौर पर तीन प्रकार के टैंक होते हैं। वजन के आधार पर तीन श्रेणियां होती हैं। भारी टैंक, मध्यम टैंक और हल्के टैंक। हर एक की अपनी भूमिका है। एक सुरक्षा के लिए है, दूसरा आक्रमण के लिए है, लेकिन हल्के टैंक सुरक्षा के साथ आक्रामक भूमिका भी निभाते हैं। इसलिए कई देश हल्के टैंक बना रहे हैं।

spot_img

Related Articles

Latest Articles

जल जीवन मिशन 2.0 के तहत उत्तराखंड, कर्नाटक और त्रिपुरा के साथ सुधार संबंधी...

0
नई दिल्ली। जल जीवन मिशन (जेजेएम) 2.0 को 10 मार्च 2026 को केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा मंजूरी दिए जाने के बाद, सुधार से संबंधित समझौता...

भारत ने गैर-जीवाश्म ईंधन से 50ः बिजली का लक्ष्य पांच साल पहले हासिल कियारू...

0
नई दिल्ली। भारत ने पांच साल पहले ही गैर-जीवाश्म ईंधन स्रोतों से 50 प्रतिशत बिजली प्राप्त करने का लक्ष्य हासिल कर लिया है। केंद्रीय...

ओबीसी, ईबीसी और डीएनटी छात्रों के लिए 242 करोड़ रुपये से अधिक की राशि...

0
नई दिल्ली। सरकार ने अन्य पिछड़ा वर्ग-ओबीसी, आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग-ईबीसी और गैर-अधिसूचित घुमंतू तथा अर्ध-घुमंतू जनजातियों-डीएनटी से आने वाले विद्यार्थियों के लिए...

सांसद ने सराहा विभागों का कार्य, बेहतर समन्वय से योजनाएं पूर्ण करने के निर्देश

0
देहरादून। सांसद माला राज्य लक्ष्मी शाह ने राजपुर रोड स्थित वन मुख्यालय के मंथन सभागार में आयोजित जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति (दिशा)...

कृत्रिम बुद्धिमत्ता के विविध क्षेत्रों में उपयोग पर आयोजित हुआ सार्थक विमर्श

0
देहरादून। तेलंगाना लोक भवन में “विभिन्न क्षेत्रों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के उपयोग” विषय पर एक महत्वपूर्ण विचार-विमर्श का आयोजन किया गया, जिसमें राज्यपाल...