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Wednesday, January 21, 2026


भारत-आसियान देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक, पांच साल के लिए बनी नई कार्य योजना; जानिए मकसद

कुआलालंपुर: भारत के विदेश राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा ने मलेशिया में भारत-आसियान बैठक की सह-अध्यक्षता की। वहीं भारत और आसियान देशों के बीच सहयोग बढ़ाने के लिए नई कार्य योजना पर भी सहमति जताई गई। साथ ही डिजिटल, रक्षा, स्वास्थ्य समेत कई क्षेत्रों में सहयोग पर चर्चा हुई। भारत के विदेश राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा ने मलेशिया की राजधानी कुआलालंपुर में आयोजित आसियान-भारत विदेश मंत्रियों की बैठक में भाग लिया और इसकी सह-अध्यक्षता की। इस बैठक में भारत और आसियान के बीच सहयोग बढ़ाने के लिए 2026 से 2030 तक की नई कार्य योजना (प्लान ऑफ एक्शन) को अपनाया गया। मंत्री मार्गेरिटा ने इस बैठक को उपयोगी और सफल बताया।
उन्होंने कहा कि यह कार्य योजना दोनों पक्षों के बीच समग्र रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत बनाएगी। उन्होंने यह भी बताया कि इस साल आसियान-भारत पर्यटन वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है, इसलिए बैठक में लोगों के बीच आपसी संपर्क बढ़ाने पर भी चर्चा हुई। इसके साथ ही बैठक में डिजिटल सहयोग, आपदा प्रबंधन, रक्षा, अर्थव्यवस्था, समुद्री सहयोग और स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में आगे बढ़ने के प्रस्तावों पर भी बातचीत हुई।
विदेश मंत्रियों की इस बैठक के दौरान विदेश राज्य मंत्री मार्गेरिटा ने कई देशों के नेताओं से द्विपक्षीय मुलाकातें भी कीं। उन्होंने आसियान के महासचिव डॉ. काओ किम होर्न से मुलाकात कर भारत-आसियान संबंधों को मजबूत करने के लिए उनके योगदान की सराहना की।
मार्गेरिटा ने इस दौरान वियतनाम के विदेश मंत्री बूई थान सोन से मुलाकात कर आपसी सहयोग को और बढ़ाने पर चर्चा की। इंडोनेशिया के विदेश मंत्री से भी विचार-विमर्श किया। साथ ही फिलीपींस की विदेश मंत्री थेरेसा लाजारो से मुलाकात कर दोनों देशों के बीच 75 वर्षों की राजनयिक साझेदारी को याद किया और आतंकवाद के खिलाफ भारत को समर्थन देने के लिए धन्यवाद दिया।
मामले में विदेश मंत्रालय के अनुसार मंत्री मार्गेरिटा की यह यात्रा मलेशिया के निमंत्रण पर 10-11 जुलाई को हो रही है। भारत और आसियान के बीच संस्कृति और सभ्यता पर आधारित मजबूत संबंध हैं। इसको लेकर विदेश मंत्रालय ने कहा कि आसियान भारत की एक्ट ईस्ट नीति और इंडो-पैसिफिक दृष्टिकोण का मुख्य आधार है। यह यात्रा भारत की आसियान की एकता और केंद्रीय भूमिका को समर्थन देने के साथ-साथ आसियान-भारत समग्र रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम है।
गौरतलब है कि दक्षिण पूर्वी एशियाई राष्ट्रों का संगठन (दक्षेस या ASEAN) 10 देशों का समूह है। 1967 में गठित इस समूह के संस्थापक सदस्य थाईलैंड, इंडोनेशिया, मलेशिया, फिलिपींस और सिंगापुर थे। बाद में ब्रूनेई, वियतनाम, लाओस और म्यांमार भी इसके सदस्य बने। 1994 में आसियान ने एशियन रीजनल फोरम (एआरएफ) की स्थापना की। इसका मकसद सुरक्षा को बढ़ावा देना था। एआरएफ में अमेरिका, रूस, भारत, चीन, जापान और उत्तरी कोरिया सहित 23 सदस्य हैं। बता दें कि आसियान का मुख्यालय इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता में है।

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